बिग ब्रेकिंग: सचिवालय की सुरक्षा में बड़ी चूक! लाइसेंसी पिस्टल लेकर परिसर में घुसा प्राइवेट गार्ड, जांच शुरू

सचिवालय की सुरक्षा में बड़ी चूक! लाइसेंसी पिस्टल लेकर परिसर में घुसा प्राइवेट गार्ड, जांच शुरू

देहरादून। उत्तराखंड सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गुरुवार को उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक कारोबारी का निजी सुरक्षा गार्ड अपनी लाइसेंसी पिस्टल के साथ बिना समुचित सुरक्षा जांच के सचिवालय परिसर में प्रवेश कर गया।

काफी देर तक हथियार के साथ परिसर में घूमने के बाद जब सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों को इसकी जानकारी मिली तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। बाद में गार्ड को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।

बिना जांच के मिला सचिवालय में प्रवेश

जानकारी के अनुसार एक कारोबारी किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात के लिए सचिवालय पहुंचा था। उसके साथ वाहन में उसका निजी सुरक्षा गार्ड भी मौजूद था।

बताया जा रहा है कि किसी अधिकारी से टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद वाहन को सचिवालय में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। इस दौरान न तो वाहन में बैठे लोगों की तलाशी ली गई और न ही गार्ड के पास मौजूद हथियार की जांच की गई।

मुख्यमंत्री के काफिले वाले क्षेत्र के पास घूमता रहा गार्ड

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कारोबारी सचिवालय भवन के भीतर अधिकारी से मिलने चला गया, जबकि उसका निजी सुरक्षा गार्ड लाइसेंसी पिस्टल के साथ परिसर में काफी देर तक घूमता रहा। जिस स्थान पर मुख्यमंत्री के काफिले की आवाजाही होती है, उसी क्षेत्र के पास वाहन भी खड़ा था। इसके बावजूद किसी सुरक्षाकर्मी ने उससे पूछताछ नहीं की।

सूचना मिलते ही मचा हड़कंप

कुछ समय बाद सुरक्षा कर्मियों और इंटेलिजेंस यूनिट को सूचना मिली कि सचिवालय परिसर में एक व्यक्ति हथियार के साथ मौजूद है। इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने तत्काल गार्ड को रोका, उसके वाहन की जांच की और पूछताछ के लिए सचिवालय सुरक्षा अधिकारी के कार्यालय ले जाया गया।

गार्ड ने क्या बताया?

पूछताछ में निजी सुरक्षा गार्ड ने बताया कि वह अपने मालिक के साथ सचिवालय आया था। उसके अनुसार वाहन का कोई औपचारिक प्रवेश पास नहीं बनाया गया था, बल्कि एक अधिकारी से टेलीफोन पर बातचीत के बाद वाहन को अंदर जाने की अनुमति मिली थी।

सुरक्षा अधिकारी ने मानी चूक

सचिवालय सुरक्षा अधिकारी जीवन सिंह बिष्ट ने बताया कि गार्ड के पास छोटी लाइसेंसी पिस्टल थी, जो प्रवेश के दौरान सुरक्षा जांच में नजर नहीं आ सकी। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार वाहनों की पूरी तरह जांच नहीं हो पाती, लेकिन जैसे ही हथियार की जानकारी मिली, तत्काल कार्रवाई करते हुए गार्ड को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

जांच के घेरे में प्रवेश प्रणाली

घटना के बाद सचिवालय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि बिना पास के वाहन को किस अधिकारी के निर्देश पर प्रवेश दिया गया और सुरक्षा जांच में लापरवाही किस स्तर पर हुई।

उत्तराखंड सचिवालय प्रदेश का सबसे संवेदनशील प्रशासनिक परिसर माना जाता है, जहां मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से मौजूद रहते हैं।

ऐसे में हथियार के साथ किसी व्यक्ति का बिना समुचित जांच के परिसर में प्रवेश करना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब इस पूरे घटनाक्रम को सचिवालय की सुरक्षा प्रणाली में बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है।