प्लास्टिक कचरे पर सरकार से जवाब तलब, हाईकोर्ट शिफ्टिंग के खिलाफ रिव्यू पिटिशन की तैयारी
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में बुधवार को दो महत्वपूर्ण मामलों में अहम घटनाक्रम सामने आए। एक ओर न्यायालय ने राज्य में प्लास्टिक कचरे के प्रभावी निस्तारण और सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब तलब किया।
वहीं दूसरी ओर नैनीताल से हल्द्वानी हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मुद्दे पर राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर करने का निर्णय लिया है।
प्लास्टिक कचरा प्रबंधन से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पंचायतीराज निदेशक और शहरी विकास निदेशक को शपथपत्र दाखिल कर यह बताने के निर्देश दिए कि पूर्व में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने मुख्य सचिव को भी राज्यभर में प्लास्टिक कचरे के निस्तारण और स्वच्छता को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर विचार करने को कहा, जिसमें स्कूली बच्चों, प्रबुद्ध नागरिकों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने अदालत को बताया कि प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर मशीनें और उपकरण खरीदे गए, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी प्लास्टिक कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं।
जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य में वर्ष 2013 की नियमावली और वर्ष 2018 के प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है।
उत्पादकों और विक्रेताओं द्वारा प्लास्टिक वापस लेने की व्यवस्था भी लागू नहीं हो सकी है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
इधर, नैनीताल से हल्द्वानी हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मुद्दे पर राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ की बैठक में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर करने का फैसला लिया गया।
संघ के अध्यक्ष रमन शाह ने कहा कि उत्तराखंड राज्य पुनर्गठन अधिनियम में हाईकोर्ट का स्थान नैनीताल निर्धारित है और इसमें संशोधन के बिना केवल प्रशासनिक आदेश से हाईकोर्ट का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें हल्द्वानी में हाईकोर्ट स्थापित होने से व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है, लेकिन पूरी प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए।
बैठक में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत और डीएस मेहता सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी शिफ्टिंग के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पर्वतीय राज्य की मूल अवधारणा को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट नैनीताल में स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य की अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान पर भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की शिफ्टिंग से जुड़े 4 मई 2024 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी।
साथ ही राज्य सरकार को हल्द्वानी के गौलापार में प्रस्तावित हाईकोर्ट परिसर के लिए आवश्यक सभी स्वीकृतियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था।
अब इस फैसले के खिलाफ राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहा है।


