बिग ब्रेकिंग: हाईकोर्ट में तीन महत्वपूर्ण फैसलों पर सुनवाई, दिए अहम निर्देश। आप भी पढ़ें….

हाईकोर्ट में तीन महत्वपूर्ण फैसलों पर सुनवाई, दिए अहम निर्देश। आप भी पढ़ें….

नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट में छात्र संघ चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण, हल्द्वानी के लाखामंडी क्षेत्र से ग्रामीणों को हटाने और आबकारी विभाग की वरिष्ठता सूची से जुड़े तीन अहम मामलों पर सुनवाई हुई।

छात्र संघ चुनाव के मामले में कोर्ट ने सरकार के 50 प्रतिशत आरक्षण के आदेश को वैध मानते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि आबकारी विभाग के मामले में सहायक आबकारी आयुक्त पद पर पदोन्नति पर अंतरिम रोक लगा दी गई है।

छात्र संघ चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण बरकरार

छात्र संघ चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने सुनवाई की।

रामनगर और हल्द्वानी कॉलेज के छात्र भरत केशवानी, मानस आर्य समेत अन्य छात्रों ने सरकार के उस शासनादेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत छात्र संघ चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि सरकार को छात्र संघ चुनाव में आरक्षण निर्धारित करने का अधिकार नहीं है और इसलिए शासनादेश को निरस्त किया जाना चाहिए।

वहीं, महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार को आरक्षण निर्धारित करने की शक्ति संविधान से प्राप्त है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को वैध माना और याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अब छात्र संघ चुनाव 50 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान के आधार पर ही होंगे।

लाखामंडी में वन भूमि से ग्रामीणों को हटाने के मामले में दो सप्ताह का समय

हल्द्वानी के लाखामंडी क्षेत्र में वन भूमि से ग्रामीणों को हटाए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि वन विभाग वर्षों से क्षेत्र में रह रहे लोगों को बिना सुनवाई का अवसर दिए बेदखल कर रहा है। ग्रामीणों ने उन्हें हटाने से पहले सुनवाई का अवसर देने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर कहा कि संबंधित ग्रामीण वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से रह रहे हैं और वन भूमि पर अतिक्रमण चिन्हित करने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र पर अपना जवाब दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

आबकारी विभाग में वरिष्ठता विवाद, सहायक आबकारी आयुक्त की पदोन्नति पर रोक

आबकारी विभाग की वरिष्ठता सूची को लेकर दायर याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए सहायक आबकारी आयुक्त पद पर होने वाली पदोन्नति पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार समेत संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता शुजात हसन ने 29 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 9 मई 2024 और 14 नवंबर 2024 की अनंतिम वरिष्ठता सूची पर उनकी आपत्ति खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

उन्होंने आबकारी निरीक्षक संवर्ग की अंतिम वरिष्ठता सूची में अपनी स्थिति क्रम संख्या 109 से बदलकर क्रम संख्या 71ए (72) किए जाने की मांग की है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, वह मूल रूप से उर्दू अनुवादक (लिपिकीय संवर्ग) के पद पर नियुक्त हुए थे और 27 सितंबर 2014 को आबकारी निरीक्षक पद पर पदोन्नत हुए।

उनके अधिवक्ता संदीप कोठारी ने 2024 में उत्तराखंड सरकारी सेवक वरिष्ठता नियमावली, 2002 के नियम 8(3) में हुए संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि एक ही चयन वर्ष में पदोन्नत और सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मियों के मामले में रोटा-कोटा नियम लागू होना चाहिए।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अनिल के डबराल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सीधी भर्ती की प्रक्रिया अलग चयन वर्ष में शुरू हुई थी, जबकि याचिकाकर्ता की पदोन्नति की प्रक्रिया बाद में शुरू हुई।

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर कहा कि संशोधित नियम 8(3) के तहत रोटा-कोटा व्यवस्था लागू होने के लिए नियुक्ति या पदोन्नति का एक ही चयन वर्ष में होना आवश्यक है। कोर्ट ने संबंधित प्रतिवादियों को चार सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी। तब तक सहायक आबकारी आयुक्त पद पर कोई पदोन्नति नहीं की जाएगी।