करोड़ों की योजनाएं, गिने-चुने लेखाकार! वन विभाग में गहराया अकाउंटेंट संकट
देहरादून। उत्तराखंड का वन विभाग इन दिनों जंगलों की सुरक्षा से ज्यादा अपने वित्तीय प्रबंधन को लेकर चिंतित है। सैकड़ों करोड़ रुपये के बजट और प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत वन क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग में लेखाकारों (अकाउंटेंट) की भारी कमी सामने आई है। पहले से बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के बीच हाल ही में हुए तबादलों ने विभाग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
वन विभाग में अकाउंटेंट के कुल 34 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 13 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 21 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हालिया तबादला सूची में विभाग से 9 लेखाकारों को अन्य स्थानों पर भेज दिया गया, जबकि बदले में केवल 4 लेखाकार ही विभाग को मिले। यानी विभाग के पास कुल पांच लेखाकार और कम हो गए।
वन विभाग राज्य के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में शामिल है। विभाग के जिम्मे वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, कैंपा परियोजनाएं, इको-टूरिज्म योजनाएं, कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, ठेकेदारों का भुगतान और करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का वित्तीय प्रबंधन होता है। ऐसे में लेखाकारों की कमी सीधे तौर पर विभागीय कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि विभाग फिलहाल सहायक लेखाकारों (असिस्टेंट अकाउंटेंट) के सहारे काम चला रहा है। मुख्यालय से लेकर विभिन्न वन प्रभागों तक बजट प्रबंधन, भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय अभिलेखों का कार्य सीमित संसाधनों में संचालित किया जा रहा है।
सबसे अधिक प्रभावित होने वाले वन प्रभागों में पिथौरागढ़, चकराता, देहरादून, तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर वन प्रभाग, तराई पूर्वी वन प्रभाग, प्रमुख वन संरक्षक परियोजना कार्यालय और मसूरी वन प्रभाग शामिल हैं।
वन विभाग ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए निदेशालय विभागीय लेखा को पत्र भेजकर पर्याप्त संख्या में लेखाकार उपलब्ध कराने की मांग की है।
विभाग का कहना है कि यदि रिक्त पदों को जल्द नहीं भरा गया तो वित्तीय प्रबंधन, ऑडिट, भुगतान प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सीसीएफ (एचआरडी) पीके पात्रो के अनुसार विभाग ने लेखाकारों की कमी और उससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं का विस्तृत विवरण शासन को भेजा है। वहीं वन दारोगा संगठन ने भी रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग उठाई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने वन विभाग को ₹131.68 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इसके अलावा कैंपा योजना के तहत केंद्र सरकार से ₹253 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है।
इस प्रकार विभाग के पास कुल लगभग ₹384.68 करोड़ की वित्तीय जिम्मेदारी है, जिसके प्रबंधन के लिए पर्याप्त लेखाकारों की उपलब्धता बेहद आवश्यक मानी जा रही है।
ऐसे में अब निगाहें शासन और लेखा निदेशालय पर टिकी हैं कि वन विभाग के इस बढ़ते संकट का समाधान कितनी जल्दी किया जाता है।


