बड़ी खबर: नियामकीय जांच में फंसे 18 BAMS प्रवेश, NCISM के आदेश पर हरकत में विश्वविद्यालय

नियामकीय जांच में फंसे 18 BAMS प्रवेश, NCISM के आदेश पर हरकत में विश्वविद्यालय

देहरादून। उत्तराखंड में आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) की आपत्ति के बाद उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने राज्य के दो निजी आयुर्वेदिक संस्थानों में सत्र 2022-23 के दौरान हुए कुल 18 छात्रों के प्रवेशों को लेकर कार्रवाई संबंधी निर्देश जारी किए हैं।

विश्वविद्यालय ने 24 जून को दोनों संस्थानों को पत्र भेजकर आयोग के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

मामला उत्तरकाशी स्थित मंजीरा देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और देहरादून के शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च से जुड़ा है। NCISM के अनुसार इन संस्थानों में कुछ छात्रों के प्रवेश राज्य काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित नहीं पाए गए, जिसके चलते उनकी वैधता पर प्रश्नचिह्न लगा है।

मंजीरा देवी कॉलेज के 14 प्रवेशों पर आपत्ति

NCISM ने 27 मई 2024 को जारी आदेश में उत्तरकाशी स्थित मंजीरा देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में सत्र 2022-23 के दौरान प्रवेश पाने वाले 14 छात्रों के रिकॉर्ड की जांच की थी।

आयोग के अनुसार कॉलेज द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण से प्राप्त अभिलेखों के सत्यापन में संबंधित छात्रों का आवंटन रिकॉर्ड नहीं मिला।

इसके बाद आयोग ने इन प्रवेशों को नियमों के अनुरूप नहीं माना और कॉलेज को आवश्यक कार्रवाई करते हुए छात्रों एवं उनके अभिभावकों को स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए।

शिवालिक संस्थान के 4 प्रवेश भी जांच के दायरे में

देहरादून के झाझरा स्थित शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च के चार छात्रों के प्रवेशों पर भी NCISM ने आपत्ति दर्ज की है। आयोग ने 11 अप्रैल 2025 को जारी आदेश में कहा कि संबंधित छात्रों का आवंटन भी राज्य काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से नहीं हुआ पाया गया।

संस्थान ने अपने पक्ष में कहा था कि रिक्त सीटों पर चार अभ्यर्थियों को नैनीताल हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में प्रवेश दिया गया था। हालांकि NCISM ने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद अपनी आपत्ति बरकरार रखी।

क्या कहते हैं नियम?

NCISM के नियमों के अनुसार विदेशी छात्रों को छोड़कर BAMS पाठ्यक्रम की सभी सीटों पर प्रवेश केवल केंद्र, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की अधिकृत काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जा सकता है।

निर्धारित प्रक्रिया से बाहर किए गए प्रवेशों को मान्यता नहीं दी जा सकती। इसी प्रावधान के आधार पर आयोग ने दोनों संस्थानों के मामलों में कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

विश्वविद्यालय ने दिए निर्देश

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने दोनों संस्थानों को भेजे गए पत्रों में कहा है कि,

  • संबंधित छात्रों और उनके अभिभावकों को स्थिति की जानकारी दी जाए।
  • NCISM के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • भविष्य में सभी प्रवेश निर्धारित नियमों और काउंसलिंग प्रक्रिया के अनुसार ही किए जाएं।

राज्य के दो निजी आयुर्वेदिक संस्थानों से जुड़े कुल 18 छात्रों के प्रवेशों पर एक साथ कार्रवाई शुरू होने के बाद यह मामला चिकित्सा शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित संस्थान आगे क्या कदम उठाते हैं और प्रभावित छात्रों के मामले में अंतिम निर्णय क्या होता है।

देखें आदेश:-

NCISM ORDERS ADMISSION CANCELLATION
NCISM ORDERS ADMISSION CANCELLATION

NCISM ORDERS ADMISSION CANCELLATION

NCISM ORDERS ADMISSION CANCELLATION

NCISM ORDERS ADMISSION CANCELLATION