क्राइम अपडेट: फोन कॉल से ठगी, मंडी में बवाल और शहर में विवाद। एक दिन में कई बड़े घटनाक्रम

फोन कॉल से ठगी, मंडी में बवाल और शहर में विवाद। एक दिन में कई बड़े घटनाक्रम

देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में आपराधिक घटनाओं, साइबर ठगी, किसान आक्रोश और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों ने एक साथ हलचल मचा दी है। अलग-अलग घटनाओं ने जहां प्रशासन की सतर्कता की परीक्षा ली, वहीं आम जनता की चिंता भी बढ़ा दी है।

सबसे पहले बात पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र की, जहां साइबर ठगों ने एक गर्भवती महिला को अपना शिकार बनाया। ठगों ने खुद को देहरादून के डिजी हेल्थ विभाग का कर्मचारी बताते हुए आंगनबाड़ी योजनाओं का लालच दिया और महिला से बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर ली।

इसके बाद उसके खाते से ₹35,000 उड़ा लिए गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि पुलिस और साइबर सेल की तत्परता से खाते को तुरंत होल्ड कर दिया गया, जिससे ठग पैसे निकालने में सफल नहीं हो सके।

इस मामले की जांच कर रहे गंगोलीहाट कोतवाली के एसएसआई बीसी मासीवाल ने बताया कि समय रहते कार्रवाई होने से पीड़िता की रकम सुरक्षित रहने की उम्मीद है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉल पर ओटीपी, पिन या बैंक विवरण साझा न करें। साथ ही ऐसी किसी भी घटना की तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर सूचना देने की सलाह दी गई है।

इसी तरह का एक बड़ा मामला देहरादून में सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने ओएनजीसी के एक रिटायर्ड अधिकारी को निशाना बनाया। ठगों ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से फर्जी निवेश योजना का झांसा देकर करीब ₹1.87 करोड़ की ठगी कर ली।

भारी मुनाफे का लालच देकर अधिकारी को शेयर ट्रेडिंग में निवेश के लिए उकसाया गया। जब तक उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तब तक देर हो चुकी थी। फिलहाल साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उधर, उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। एक युवक द्वारा ऑनलाइन ऐप से बिरयानी ऑर्डर करने के बाद उसे संदेह हुआ कि जिस नाम से रेस्टोरेंट रजिस्टर्ड है, उस नाम की कोई दुकान मौके पर मौजूद नहीं है।

इसके बाद युवक अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और डिलीवरी राइडर को रोक लिया। आरोप लगाया गया कि रेस्टोरेंट संचालक ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भ्रामक नाम से रजिस्ट्रेशन किया है।

स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई और मौके पर हंगामा शुरू हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया।

रुद्रपुर कोतवाली के एसएसआई अनिल जोशी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

वहीं, काशीपुर में गेहूं खरीद को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। मंडी समिति में पहुंचे किसानों ने खरीद व्यवस्था को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप था कि खरीद की कोई स्पष्ट सीमा तय नहीं की गई है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) युवा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने किया। आक्रोशित किसानों ने मंडी परिसर में नारेबाजी की और बाद में तोड़फोड़ भी शुरू कर दी। टेबल पलट दी गईं, बैनर फाड़ दिए गए और यहां तक कि गेहूं में आग लगाने की घटना भी सामने आई। इससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

सीनियर मार्केटिंग ऑफिसर अतुल चतुर्वेदी ने बताया कि केंद्र पर 800 क्विंटल खरीद का लक्ष्य पूरा हो चुका है, इसलिए खरीद बंद की गई है।

हालांकि इस जवाब से किसान संतुष्ट नहीं हुए। बाद में किसानों ने कैबिनेट मंत्री रामसिंह कैड़ा के आने की सूचना पर गेस्ट हाउस के बाहर धरना भी दिया, लेकिन मंत्री के न पहुंचने से वे निराश होकर लौट गए।

इसी बीच नैनीताल जिले के भीमताल क्षेत्र में एक और संवेदनशील मामला सामने आया। सूर्या गांव के पास ग्रामीणों ने एक मिनी ट्रक को रोका, जिसमें एक गौवंशीय पशु ले जाया जा रहा था।

ग्रामीणों को शक हुआ कि पशु को अवैध रूप से वध के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लेकर वाहन को कब्जे में ले लिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में जहां एक ओर साइबर अपराध तेजी से नए-नए रूप ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर भी असंतोष बढ़ रहा है।

ऐसे में जरूरी है कि एक ओर पुलिस और प्रशासन अपनी सतर्कता बढ़ाएं, वहीं आम जनता भी जागरूक होकर सावधानी बरते, ताकि इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।