रिटायरमेंट से पहले जस्टिस आलोक वर्मा ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया मंजूर
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस आलोक कुमार वर्मा का इस्तीफा अब औपचारिक रूप से मंजूर हो गया है। केंद्र सरकार की ओर से 27 मई 2026 को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि उनका इस्तीफा 30 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
जस्टिस वर्मा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217(1) के परंतुक (ए) के तहत स्वेच्छा से राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपा था।
जानकारी के अनुसार जस्टिस आलोक कुमार वर्मा पिछले 28 दिनों से न्यायालय नहीं आ रहे थे। वे आगामी कुछ महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया। अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले सुनाए।
वाराणसी से उत्तराखंड हाईकोर्ट तक का सफर
16 अगस्त 1964 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मे जस्टिस आलोक कुमार वर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और उच्च शिक्षा भी वहीं से प्राप्त की। उन्होंने डीएवी पीजी डिग्री कॉलेज, वाराणसी से स्नातक और वर्ष 1985 में हरीश चंद्र पोस्टग्रेजुएट कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की।
इसके बाद वर्ष 1987 में वे उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए। उनकी पहली नियुक्ति झांसी में मुंसिफ सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर हुई थी। विभिन्न जिलों में सेवाएं देने के बाद उत्तराखंड राज्य गठन के समय उन्होंने उत्तराखंड न्यायिक सेवा का विकल्प चुना।
उत्तराखंड में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां
उत्तराखंड में जस्टिस वर्मा ने टिहरी, चमोली, उधम सिंह नगर और देहरादून जैसे जिलों में जिला जज के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड सरकार में प्रमुख सचिव (कानून) सह-एलआर जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी भी संभाली।
उनके न्यायिक अनुभव और योगदान को देखते हुए मई 2019 में उन्हें उत्तराखंड हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्होंने 27 मई 2019 को शपथ ली और बाद में मई 2021 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला।

