हत्या, प्रेम प्रसंग, पॉक्सो, मेडिकल लापरवाही और फर्जी लाइसेंस जैसी कई बड़ी खबरें, एक क्लिक में पढ़ें….
देहरादून। उत्तराखंड में एक ही दिन के भीतर सामने आए कई बड़े घटनाक्रमों ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहीं इलाज में कथित चिकित्सीय लापरवाही से किशोर की मौत के मामले में अदालत के आदेश पर डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, तो कहीं चर्चित केतन लाल हत्याकांड में नया कानूनी मोड़ सामने आया।
दूसरी ओर बीकेटीसी की अरबों रुपये की संपत्तियों पर अवैध कब्जों के आरोपों ने धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वहीं गैंगवार से जुड़े हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में फरार आरोपियों पर इनाम बढ़ाया गया, जबकि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हत्या, दुष्कर्म, संदिग्ध मौत, हिंसा और फर्जी शस्त्र लाइसेंस जैसे मामलों ने पुलिस और प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।
इलाज में लापरवाही से किशोर की मौत, कोर्ट के आदेश पर डॉक्टरों पर मुकदमा
देहरादून में सड़क दुर्घटना में घायल 15 वर्षीय गौरव की मौत के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पांच चिकित्सकों और अस्पताल संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
परिजनों का आरोप है कि गंभीर रूप से घायल दाएं गुर्दे के बजाय बाएं गुर्दे का ऑपरेशन किया गया और समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण किशोर की जान चली गई। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
केतन लाल हत्याकांड में बड़ा यू-टर्न
प्रदेश के चर्चित केतन लाल हत्याकांड में नया मोड़ तब आया जब मृतक केतन लाल और उसके साथी दिवाकर डिमरी के खिलाफ ही पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
पुलिस का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देश, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर केतन की हत्या के आरोप में पहले ही चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। ऐसे में यह मामला अब दो अलग-अलग आपराधिक जांचों के साथ और अधिक जटिल हो गया है।
बीकेटीसी की अरबों की संपत्तियों पर अवैध कब्जे के आरोप
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों में फैली अरबों रुपये मूल्य की जमीनों, भवनों और धर्मशालाओं पर अवैध कब्जों, कम किराये, गायब अभिलेखों और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में इन सभी संपत्तियों की उच्चस्तरीय जांच, अवैध कब्जे हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
विक्रम शर्मा हत्याकांड में पुलिस का शिकंजा और कसा
डालनवाला के चर्चित विक्रम शर्मा हत्याकांड में फरार चल रहे पांच आरोपियों पर डीजीपी ने इनाम बढ़ाकर दो-दो लाख रुपये कर दिया है।
पुलिस के अनुसार यह हत्या गैंगवार, रंगदारी, कारोबारी हितों और अंतरराज्यीय अपराध सिंडिकेट से जुड़ी सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। एसटीएफ और देहरादून पुलिस कई राज्यों में लगातार दबिश दे रही है।
प्रेम प्रसंग का खौफनाक अंत, महिला की मौत
देहरादून के मियांवाला स्थित एक होमस्टे में एक महिला मृत मिली, जबकि बीएसएफ का जवान बेहोशी की हालत में मिला। पुलिस के मुताबिक जवान ने अपनी पत्नी को फोन कर महिला की हत्या और खुद जहर खाने की बात कही थी।
मृतका के पति की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदेशभर में हिंसा और दर्दनाक हादसे
बाजपुर में रेस्टोरेंट के भीतर युवकों पर लाठी-डंडों से हमला कर मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस जांच में जुटी है।
काशीपुर में बरसाती पानी से भरे गड्ढे में डूबने से दो छह वर्षीय मासूम दोस्तों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। मसूरी में दस दिन से लापता युवक का शव जंगल से बरामद होने के बाद हत्या, आत्महत्या और दुर्घटना तीनों एंगल से जांच चल रही है।
महिला सुरक्षा को लेकर फिर चिंता
पिथौरागढ़ के धारचूला में मूकबधिर नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का मामला सात महीने बाद सामने आया, जब उसने एक बच्ची को जन्म दिया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश तेज कर दी है।
वहीं हरिद्वार में महिला से कथित छेड़छाड़ के आरोप में दो युवकों की भीड़ द्वारा पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस जांच कर रही है।
फर्जी शस्त्र लाइसेंस और कांवड़ मेले से पहले बड़ी कार्रवाई
उधम सिंह नगर पुलिस ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस के खिलाफ अभियान चलाते हुए 94 संदिग्ध लाइसेंस जब्त कर उनसे जुड़े 119 हथियार थानों में जमा करा दिए हैं। दूसरी ओर कांवड़ मेले से पहले हरिद्वार नगर निगम ने करीब 5 हजार किलो प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त कर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कानून-व्यवस्था और जवाबदेही पर उठे सवाल
एक ही दिन में सामने आए इन घटनाक्रमों ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड में अपराध, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था और संगठित अपराध जैसे मुद्दे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
अब सभी मामलों में पुलिस जांच, अदालत की निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं। कई मामलों में सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इन घटनाओं ने प्रदेश में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।

