SIT की हिरासत में हैं प्रमोद नौटियाल, 32 दिन की CCTV फुटेज गायब होने से जांच तेज
- देहरादून से पूछताछ के लिए बदरीनाथ ले गई एसआईटी, मंदिर समिति के चार अन्य कर्मचारियों से भी हो रही पूछताछ; गायब CCTV रिकॉर्डिंग बनी जांच का सबसे बड़ा सवाल।
देहरादून। बदरीनाथ धाम के बहुचर्चित चढ़ावा चोरी प्रकरण में रविवार देर रात हुए घटनाक्रम पर बड़ा खुलासा हुआ है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के निलंबित वैयक्तिक सहायक (पीए) प्रमोद नौटियाल किसी अज्ञात लोगों के कब्जे में नहीं, बल्कि चमोली पुलिस की एसआईटी की हिरासत में हैं।
एसआईटी उन्हें रविवार रात देहरादून स्थित उनके नेहरू कॉलोनी आवास से पूछताछ के लिए बदरीनाथ ले गई, जहां उनसे मामले में गहन पूछताछ की जा रही है।
चमोली के एसपी सुरजीत सिंह पंवार के अनुसार, एसआईटी ने प्रमोद नौटियाल के साथ मंदिर समिति के चार अन्य कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए तलब किया है।
इनमें सीसीटीवी निगरानी से जुड़े कर्मचारी, एक अधिकारी, सहायक लेखाकार तथा अन्य संबंधित कार्मिक शामिल हैं। सभी से बदरीनाथ थाने में अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।
परिवार ने जताई थी अपहरण की आशंका
रविवार रात चार सादे कपड़ों में पहुंचे लोग स्वयं को पुलिसकर्मी बताते हुए प्रमोद नौटियाल को बयान दर्ज कराने के नाम पर अपने साथ ले गए थे।
देर रात तक उनके वापस नहीं लौटने और स्थानीय पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं होने पर उनकी मां हेमलता नौटियाल ने नेहरू कॉलोनी थाने में तहरीर देकर अपहरण और अनहोनी की आशंका जताई थी।
परिजनों का कहना था कि प्रमोद नौटियाल ने मामले में उच्च न्यायालय का रुख किया था और उन्हें 16 जुलाई तक गिरफ्तारी जैसी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत मिली हुई थी।
ऐसे में देर रात उन्हें घर से ले जाए जाने पर परिवार की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि बाद में स्पष्ट हो गया कि उन्हें एसआईटी पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी।
चार अन्य कर्मचारियों पर भी जांच का फोकस
एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मंदिर समिति के चार अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। इनमें सीसीटीवी सिस्टम की निगरानी करने वाले कर्मचारी, एक अधिकारी, सहायक लेखाकार और अन्य संबंधित कार्मिक शामिल हैं।
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड संधारण, सीसीटीवी निगरानी और नकदी प्रबंधन की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही।
32 दिन की CCTV फुटेज गायब, जांच का सबसे बड़ा सवाल
जांच के दौरान सामने आया है कि संवेदनशील क्षेत्रों की लगभग 45 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित होनी चाहिए थी, लेकिन जांच एजेंसियों को केवल 15 दिन की फुटेज ही उपलब्ध हुई। करीब 32 दिन की रिकॉर्डिंग गायब होने से जांच और तेज हो गई है।
एसआईटी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रिकॉर्डिंग तकनीकी कारणों से नष्ट हुई या उसे जानबूझकर हटाया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि गायब फुटेज से चढ़ावा कक्ष में आने-जाने वाले लोगों और कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने आ सकती थी।
क्या है मामला?
बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोप सामने आने के बाद बीकेटीसी ने प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया था। इसके बाद समिति की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि कथित गड़बड़ियां केवल एक दिन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि कई दिनों तक चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताएं हुईं। अब एसआईटी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका और पूरी व्यवस्था की गहन जांच कर रही है।
जांच के केंद्र में अब ये सवाल
- 32 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग आखिर कहां गई?
- क्या फुटेज तकनीकी कारणों से नष्ट हुई या जानबूझकर हटाई गई?
- चढ़ावा प्रबंधन में किन-किन कर्मचारियों की क्या भूमिका थी?
- क्या कथित अनियमितताओं में एक से अधिक लोगों की संलिप्तता है?
- एसआईटी की पूछताछ से क्या नए खुलासे सामने आएंगे?
एसआईटी द्वारा प्रमोद नौटियाल और मंदिर समिति के अन्य कर्मचारियों से एक साथ पूछताछ किए जाने से संकेत मिल रहे हैं कि चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

