सीएम आदर्श ग्राम सारकोट में जमीन विवाद गहराया, पुश्तैनी भूमि की धोखाधड़ी से बिक्री का आरोप
गैरसैंण। मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले बड़े पैमाने पर भूमि बिक्री का मामला सुर्खियों में था।
अब एक ग्रामीण ने अपनी पुश्तैनी जमीन को धोखाधड़ी से बेचने का आरोप लगाते हुए उपजिलाधिकारी गैरसैंण और तहसीलदार से शिकायत की है। प्रशासन ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है।
शिकायतकर्ता मदन सिंह का आरोप है कि गोल खाता संख्या-93 के 14 हिस्सेदारों में शामिल होने के बावजूद उनकी सहमति लिए बिना 35 नाली भूमि का सौदा कर दिया गया।
उनका कहना है कि इस भूमि में उनके खेत संख्या 663, 671 और 672 भी शामिल हैं, जिनका क्षेत्रफल करीब 12 नाली है। शिकायत में कहा गया है कि भूमि बिक्री के दौरान हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
बताया गया कि 13 मई को यह भूमि अल्मोड़ा निवासी रवि चौहान और बागेश्वर निवासी हरि सिंह के नाम बेची गई। इस मामले में दाखिल-खारिज की कार्रवाई से पहले 23 जुलाई को सुनवाई तय की गई है, जिसमें शिकायतकर्ता और भूमि विक्रेताओं दोनों को बुलाया गया है।
तहसीलदार गैरसैंण हरीश पांडे ने बताया कि दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि जून माह में सारकोट में 35 नाली भूमि की बिक्री का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों को जमीन बेचने पर रोक लगाने की मांग की थी।
इसके बाद जिलाधिकारी चमोली ने अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश के नेतृत्व में जांच समिति का गठन किया था। जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट गैरसैंण तहसील से तथ्य मिलने के बाद जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उत्तराखंड में हाल ही में सख्त भू-कानून लागू होने के बावजूद मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में बाहरी लोगों को जमीन बिक्री के मामलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और 23 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है।

