RTI खुलासा: हल्द्वानी RTO ने 5 साल में कमाए 656 करोड़, 1.12 लाख से ज्यादा वाहन हुए पंजीकृत

हल्द्वानी RTO ने 5 साल में कमाए 656 करोड़, 1.12 लाख से ज्यादा वाहन हुए पंजीकृत

हल्द्वानी। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी में हल्द्वानी संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की पिछले पाँच वर्षों की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया को उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच आरटीओ हल्द्वानी में 1,12,945 वाहनों का पंजीकरण किया गया।

इसी अवधि में परिवहन कर, विभिन्न शुल्क और चालानों के माध्यम से विभाग ने 656.73 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व सरकारी खजाने में जमा कराया।

आरटीआई के जवाब के अनुसार पंजीकृत वाहनों में 69,134 दोपहिया, 27,119 चारपहिया, 2,548 टैक्सी तथा 3,813 मालवाहक वाहन शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कुमाऊं क्षेत्र में वाहन पंजीकरण की संख्या लगातार बढ़ रही है और हल्द्वानी आरटीओ का कार्यभार भी तेजी से बढ़ा है।

ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित आंकड़े भी काफी महत्वपूर्ण हैं। विभाग ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में 59,324 स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए, जबकि 66,298 लाइसेंसों का नवीनीकरण किया गया।

इसी दौरान यातायात नियमों के उल्लंघन या अन्य कारणों से 10,008 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए और 79 लाइसेंस निरस्त किए गए।

वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर भी आरटीआई में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। विभाग के अनुसार 1 मार्च 2021 से 28 फरवरी 2026 तक 65,001 वाहनों की फिटनेस जांच की गई, जिनमें से 799 वाहन विभिन्न तकनीकी और अन्य कारणों से फिटनेस परीक्षण में असफल पाए गए।

प्रवर्तन शाखा द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई।

इस दौरान 5,877 ओवरलोडिंग, 1,498 अवैध संचालन, 2,611 बिना परमिट तथा 3,355 बिना फिटनेस प्रमाणपत्र वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों की जानकारी विभाग उपलब्ध नहीं करा सका।

आरटीआई के एक अन्य जवाब में यह भी सामने आया कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान विभाग के रिकॉर्ड में शिकायतों की संख्या शून्य दर्ज की गई है। वहीं कुछ बिंदुओं पर विभाग ने यह कहते हुए सूचना देने से असमर्थता जताई कि संबंधित जानकारी उसके पास “धारित नहीं है“।

आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि परिवहन विभाग से प्राप्त ये आंकड़े सार्वजनिक हित से जुड़े हैं और विभाग की कार्यप्रणाली, राजस्व संग्रहण तथा प्रवर्तन व्यवस्था को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि जिन बिंदुओं पर अधूरी या अस्पष्ट जानकारी दी गई है, उनके संबंध में आवश्यक होने पर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आरटीआई से सामने आए इन आंकड़ों ने एक ओर जहां हल्द्वानी आरटीओ के बढ़ते कार्यभार और करोड़ों रुपये के राजस्व संग्रहण की तस्वीर पेश की है, वहीं कुछ सूचनाओं के अभाव और शिकायतों के रिकॉर्ड को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।