स्थानांतरण सत्र खत्म, फिर भी आयुष विभाग ने बढ़ाई समयसीमा! नियमों से ऊपर कौन?
देहरादून। उत्तराखंड में वार्षिक स्थानांतरण सत्र 2026-27 आधिकारिक रूप से 30 जून को समाप्त हो चुका है। स्थानांतरण अधिनियम के तहत निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद सामान्य तबादला प्रक्रिया नहीं चल सकती।
इसके बावजूद आयुष विभाग द्वारा जारी एक आदेश ने नियमों के पालन और प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं विजय कुमार जोगदंडे ने 30 जून को आदेश जारी कर अधीनस्थ कार्यालयों से स्थानांतरण प्रस्ताव मांगे और उन्हें भेजने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय दे दिया। बताया जा रहा है कि इस अवधि को बढ़ाने के लिए कार्मिक विभाग से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई।
गौरतलब है कि वार्षिक स्थानांतरण सत्र की अंतिम तिथि पहले 10 जून निर्धारित थी, जिसे शासन ने बढ़ाकर 30 जून कर दिया था। यानी विभाग के पास प्रक्रिया पूरी करने के लिए 20 दिन का अतिरिक्त समय उपलब्ध था। इसके बावजूद समयसीमा के भीतर स्थानांतरण प्रस्तावों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
सूत्रों के मुताबिक, समय पर प्रस्ताव नहीं भेजे जाने को लेकर विभागीय स्तर पर नाराजगी भी जताई गई। हालांकि तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित कराने के बजाय निदेशक स्तर से ही प्रस्ताव भेजने की समयसीमा तीन दिन और बढ़ा दी गई।
इस आदेश के बाद कई अहम सवाल उठ रहे हैं। यदि स्थानांतरण अधिनियम और शासन की तय समयसीमा बाध्यकारी थी, तो अतिरिक्त समय देने का अधिकार किस नियम के तहत लिया गया?
क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति प्राप्त की गई थी? यदि नहीं, तो आदेश की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
प्रशासनिक गलियारों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हैं। चर्चा यह भी है कि कुछ विशेष प्रशासनिक आवश्यकताओं अथवा मनचाही तैनातियों को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया गया। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब सभी की निगाहें शासन और कार्मिक विभाग पर हैं कि वे इस मामले का संज्ञान लेते हैं या नहीं। यदि लेते हैं, तो नियमों के विपरीत जारी हुए इस आदेश की जांच और जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है।
