बड़ी खबर: E100 इथेनॉल फ्यूल को मिली मंजूरी, भारत में जल्द दौड़ेंगी 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां

E100 इथेनॉल फ्यूल को मिली मंजूरी, भारत में जल्द दौड़ेंगी 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में 100 प्रतिशत इथेनॉल (E100) ईंधन के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

इस फैसले के साथ ही देश में पूरी तरह इथेनॉल आधारित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

नागपुर में आयोजित शुगर, इथेनॉल और बायो-एनर्जी इंडिया कॉन्फ्रेंस में नितिन गडकरी ने घोषणा की कि E100 ईंधन के कानूनी उपयोग से संबंधित फाइल को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

इससे पहले देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) पर जोर दिया जा रहा था, लेकिन अब सरकार इथेनॉल आधारित वैकल्पिक ईंधन को और व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

गडकरी के अनुसार आने वाले डेढ़ महीने में टोयोटा, सुजुकी, हुंडई और एमजी जैसी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां E100 फ्यूल पर चलने वाले नए वाहन बाजार में उतार सकती हैं। वहीं मारुति सुजुकी अपनी फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर और हीरो मोटोकॉर्प इथेनॉल आधारित मोटरसाइकिल का प्रदर्शन पहले ही कर चुके हैं।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में विशेष प्रकार के इंजन, फ्यूल पाइपलाइन और कैलिब्रेशन सिस्टम लगाए जाते हैं, जो उच्च मात्रा में इथेनॉल के उपयोग के अनुरूप तैयार किए जाते हैं। इसलिए मौजूदा पेट्रोल या E20 आधारित वाहनों में E100 ईंधन का इस्तेमाल संभव नहीं होगा।

हालांकि इस नई व्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। E100 में लगभग 93 से 95 प्रतिशत इथेनॉल और शेष हिस्सा पेट्रोल व अन्य एडिटिव्स का होता है, ताकि कम तापमान में भी वाहन आसानी से स्टार्ट हो सकें।

इसके अलावा इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होने के कारण वाहनों का माइलेज भी कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है।

इसके साथ ही देशभर के पेट्रोल पंपों पर E100 ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अलग स्टोरेज टैंक और डिस्पेंसर स्थापित करने होंगे, जिसमें समय और निवेश दोनों की आवश्यकता होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि E100 को बढ़ावा मिलने से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और गन्ना तथा अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले बायो-फ्यूल की मांग बढ़ेगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।

सरकार का यह कदम भारत को स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है।