पीपलकोटी टनल हादसे में CM धामी ने संभाला मोर्चा। हादसे की होगी जांच, मुआवजे का एलानO
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में निर्माणाधीन टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में हुए भीषण हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
13 अगस्त की शाम करीब 7:05 बजे टनल के भीतर अचानक पानी और मलबा आने से वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
प्रशासन के विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत, 12 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू और 3 मजदूरों के अभी भी लापता होने की सूचना है। हालांकि, चमोली जिलाधिकारी की ओर से 9 मौतों की बात कही गई है, जिससे मृतकों की संख्या को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और अन्य विशेषज्ञ एवं तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा गया। रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। फिलहाल टनल के अंदर फंसे तीन मजदूरों की तलाश में अभियान जारी है।
22 मजदूर आए थे हादसे की चपेट में
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार घटना विष्णुगाड परियोजना की करीब तीन किलोमीटर लंबी टीआरटी टनल में हुई। टनल के लगभग 1.5 किलोमीटर अंदर भूधंसाव के कारण अचानक पानी और मलबा आने से कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए।
शुरुआती सूचना में टनल के अंदर 18-19 मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में कुल 22 मजदूरों के वहां मौजूद होने की पुष्टि हुई।
घटना के बाद शुरुआती रेस्क्यू में कई मजदूरों को बाहर निकाला गया। इसके बाद एनडीआरएफ और आईटीबीपी समेत अन्य एजेंसियों को भी अभियान में शामिल किया गया। राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए छह बचावकर्मी भी सुरक्षित बताए गए हैं।
7 मजदूरों की मौत, 3 अब भी लापता
प्रशासन द्वारा जारी विस्तृत सूची के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सात मजदूरों में उत्तर प्रदेश के तीन, उत्तराखंड के दो और छत्तीसगढ़ के दो मजदूर शामिल हैं।
मृतकों की पहचान प्रदीप पंवार निवासी टिहरी गढ़वाल, मुकेश सिंह निवासी चमोली, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा और जितेंद्र कुमार निवासी उत्तर प्रदेश तथा लोकेश्वर और भुनेश्वर निवासी छत्तीसगढ़ के रूप में हुई है।
वहीं, टनल में अभी भी तीन मजदूरों के फंसे होने की जानकारी है। इनमें झारखंड के लुकास टोपनो और छत्तीसगढ़ के चेतन पोयाम तथा देवनाथ शामिल हैं। इन तीनों को सुरक्षित बाहर निकालना रेस्क्यू टीमों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
12 मजदूरों का रेस्क्यू, 11 का अस्पताल में इलाज
हादसे में सुरक्षित बाहर निकाले गए 12 मजदूरों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। इनमें 11 घायलों का जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में इलाज चल रहा है, जबकि घायल रोहित पांडे का उपचार बेस अस्पताल श्रीनगर में किया जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार रेस्क्यू किए गए मजदूरों में छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के श्रमिक शामिल हैं। एक मजदूर को मामूली चोट होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
CM धामी ने संभाला रेस्क्यू ऑपरेशन का मोर्चा
हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए। देर रात मुख्यमंत्री देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचे और अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रेस्क्यू किए गए श्रमिकों से भी बात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने श्रमिकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उनके उपचार एवं पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी फोन पर बातचीत कर हादसे में प्रभावित श्रमिकों की जानकारी साझा की।
14 अगस्त की सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। प्रतिकूल मौसम के बावजूद उन्होंने मौके पर पहुंचकर प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों से रेस्क्यू अभियान की जानकारी ली।
इसके बाद उन्होंने जिला चिकित्सालय गोपेश्वर पहुंचकर घायल मजदूरों से मुलाकात की और उनके इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया।
आपदा प्रबंधन मंत्री ने भी लिया जायजा
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर पीपलकोटी टनल हादसे में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता टनल में फंसे तीनों मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
मदन कौशिक के मुताबिक हादसे में मृत मजदूरों के परिजनों को आपदा नियमों के तहत चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। घायलों के इलाज और मुआवजे की कार्रवाई भी निर्धारित मानकों के अनुसार की जाएगी।
हादसे की होगी विस्तृत जांच
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने बताया कि घटना के बाद आपदा प्रबंधन का इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) तत्काल सक्रिय कर दिया गया था। राहत और बचाव कार्य में सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि शुरुआती तौर पर आशंका है कि टनल के अंदर कहीं कैविटी बनने के कारण पानी और मलबे का रिसाव हुआ हो सकता है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। टनल में अचानक पानी और मलबा आने की वजह, निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जाएगी।
रातभर चला रेस्क्यू, अब भी तीन जिंदगियां दांव पर
13 अगस्त की शाम हुए इस हादसे के बाद से ही रेस्क्यू टीमें लगातार मलबे और पानी के बीच अभियान चला रही हैं। टनल के अंदर मौजूद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें संयुक्त रूप से काम कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू अभियान के दौरान बचावकर्मियों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। फिलहाल पूरा फोकस टनल में फंसे तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव की संभावना भी प्रशासन ने जताई है, क्योंकि खोज एवं बचाव अभियान अभी जारी है।


