बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड ग्रामीण बैंक घोटाले में 12 दोषी करार, मैनेजर को 4 साल की सजा

उत्तराखंड ग्रामीण बैंक घोटाले में 12 दोषी करार, मैनेजर को 4 साल की सजा

देहरादून। उत्तराखंड के बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा एक बहुचर्चित मामला आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गया है। Central Bureau of Investigation (CBI) की विशेष अदालत ने उधम सिंह नगर के बाजपुर में हुए करोड़ों रुपये के बैंक घोटाले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है।

अदालत ने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत कुल 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है।

अदालत का सख्त रुख, मैनेजर को 4 साल की सजा
देहरादून स्थित विशेष सीबीआई न्यायालय ने 31 मार्च 2026 को सुनवाई पूरी करते हुए मुख्य आरोपी तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम अवतार सिंह दिनकर को भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाया। अदालत ने उन्हें 4 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

11 अन्य दोषियों को भी सजा

इस मामले में बैंक अधिकारियों के साथ-साथ कई निजी व्यक्ति और बिचौलिये भी शामिल पाए गए। अदालत ने राम सिंह, हरजीत सिंह, दीवान सिंह, हरदत्त सिंह, जसवीर सिंह, बलकार सिंह, पूरन चंद, दीदार सिंह, महेश कुमार, गुरदीप सिंह और सोना सिंह को भी साजिश में दोषी माना।

इन सभी 11 दोषियों को एक-एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही इन पर कुल मिलाकर 3.3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

कैसे हुआ 3.40 करोड़ का घोटाला

सीबीआई जांच में सामने आया कि वर्ष 2014-15 के दौरान बाजपुर शाखा में तैनात प्रबंधक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक ट्रैक्टर डीलर M/s KGN Tractors and Equipments के साथ मिलकर सुनियोजित साजिश रची।

जांच में खुलासा हुआ कि, 

  • फर्जी तरीके से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल ऋण और कृषि टर्म लोन स्वीकृत किए गए
  • दस्तावेजों में ट्रैक्टर और कृषि उपकरण खरीदने का झूठा उल्लेख किया गया
  • ऋण की रकम को सीधे डीलर के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया
  • वास्तव में कोई मशीनरी खरीदी ही नहीं गई
  • इस पूरी धोखाधड़ी से बैंक को करीब 3.40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही

मामले में बैंक की आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। बिना सत्यापन के लोन पास किए गए और कागजों में फर्जीवाड़ा कर रकम का दुरुपयोग किया गया। यह घोटाला बैंकिंग सिस्टम में निगरानी की कमी को भी उजागर करता है।

केस की टाइमलाइन

  • 12 जून 2018: बैंक मुख्यालय, देहरादून के महाप्रबंधक ने CBI को शिकायत दी
  • 19 जून 2018: CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की
  • 24 दिसंबर 2018: आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
  • 31 मार्च 2026: अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई

यह फैसला न केवल बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही की अहमियत को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का शिकंजा आखिरकार कसता ही है।