बिग ब्रेकिंग : पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल: महिला चिकित्सालय एक डॉक्टर के भरोसे, ट्रामा सेंटर का वादा अब तक अधूरा

पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहाल: महिला चिकित्सालय एक डॉक्टर के भरोसे, ट्रामा सेंटर का वादा अब तक अधूरा

पिथौरागढ़: सीमांत जिला पिथौरागढ़ की आधी आबादी की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए स्थापित एकमात्र महिला चिकित्सालय वर्तमान में गंभीर संकट से जूझ रहा है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी के चलते यह अस्पताल फिलहाल सिर्फ एक महिला विशेषज्ञ के भरोसे संचालित हो रहा है। हालात 10 फरवरी के बाद और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

महिला चिकित्सालय में कुल तीन विशेषज्ञ पद स्वीकृत हैं। इनमें से एक स्थायी महिला चिकित्सक इस समय मातृत्व अवकाश पर हैं। दूसरा पद बांडधारी महिला चिकित्सक के पास है, जिनका बांड कार्यकाल

10 फरवरी को समाप्त हो रहा है, जबकि बांड का नवीनीकरण अप्रैल के अंत तक ही संभव हो पाता है। तीसरा विशेषज्ञ पद लंबे समय से रिक्त पड़ा है।

महिलाओं पर सीधा असर

विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सबसे अधिक असर कम और मध्यम आय वर्ग की महिलाओं पर पड़ रहा है। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार निजी अस्पतालों का रुख कर लेते हैं,

लेकिन अधिकांश महिलाओं के लिए महिला चिकित्सालय ही एकमात्र सहारा है। जिला चिकित्सालय में लंबा इंतजार और आपात स्थिति में जनपद से बाहर रेफर किया जाना आम हो गया है।

महिला चिकित्सालय पर पिथौरागढ़ के साथ-साथ नेपाल, चंपावत और बागेश्वर से भी मरीजों का दबाव रहता है। प्रतिदिन लगभग 300 महिलाएं उपचार के लिए पहुंचती हैं।

महीने में करीब 200 प्रसव कराए जाते हैं, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत सिजेरियन होते हैं। पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में महिलाएं प्रसव के लिए यहां आती हैं।

सीएम के गृह जनपद में भी हालात चिंताजनक

चिंताजनक पहलू यह है कि पिथौरागढ़ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गृह जनपद होने के बावजूद महिला स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद कमजोर बनी हुई है।

भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ ने बताया कि एक पद रिक्त है, एक चिकित्सक मातृत्व अवकाश पर हैं और एक बांडधारी डॉक्टर का कार्यकाल फरवरी में समाप्त हो रहा है।

इस संबंध में निदेशालय को अवगत करा दिया गया है और प्रयास किया जा रहा है कि मरीजों को परेशानी न हो।

बेरीनाग ट्रामा सेंटर का वादा अब तक अधूरा

सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बेरीनाग ट्रामा सेंटर की घोषणा पिछली भाजपा सरकार के दौरान की गई थी, लेकिन यह प्रस्ताव अब तक फाइलों में ही दबा हुआ है। ट्रामा सेंटर न होने के कारण गंभीर सड़क हादसों में घायल मरीजों को आज भी 230 किमी दूर हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है।

गंगोलीहाट, बेरीनाग, जौलजीबी, डीडीहाट जैसे क्षेत्रों में ट्रामा सेंटर की मांग लंबे समय से की जा रही है। तीन वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विभाग ने बेरीनाग में 12 बेड के ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है।

डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ पिथौरागढ़ ने कहा कि जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल बनने के बाद ट्रामा सेंटर की जरूरत कम होगी। बेरीनाग ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

हायर सेंटर की दौड़ बन रही जानलेवा

ट्रामा सेंटर की कमी के कारण दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों को पहले जिला अस्पताल लाया जाता है, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है। इस लंबी दूरी के कारण कई मरीजों की रास्ते में ही मौत हो चुकी है।