बिग ब्रेकिंग: स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितताओं पर एक्शन। अस्पतालों पर जुर्माना और निलंबन, ESIC में जांच की मांग

स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितताओं पर एक्शन। अस्पतालों पर जुर्माना और निलंबन, ESIC में जांच की मांग

देहरादून। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर दो बड़े मामले सामने आए हैं। एक ओर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई), अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना (एएयूवाई) और राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई करते हुए तीन अस्पतालों की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है।

वहीं दूसरी ओर रुद्रपुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल में संविदा नर्सों ने अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

एसएचए की कार्रवाई के दायरे में बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज तथा देहरादून के ओजस्वी और अरिहंत अस्पताल आए हैं। इसके अलावा बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज पर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों से रेफर किए गए आयुष्मान लाभार्थियों को भर्ती नहीं करने, वैध रेफरल पत्र स्वीकार न करने और पात्र मरीजों से उपचार के नाम पर अवैध वसूली करने के आरोप हैं।

नैनीताल निवासी एक लाभार्थी ने शिकायत की कि उनके पिता के इलाज के दौरान अस्पताल ने करीब 1.44 लाख रुपये वसूल लिए, जबकि वे योजना के पात्र थे। प्राधिकरण ने अस्पताल से सात दिनों के भीतर जवाब तलब किया है। निलंबन अवधि के दौरान अस्पताल नए आयुष्मान लाभार्थियों को भर्ती नहीं कर सकेगा।

देहरादून के ओजस्वी अस्पताल की संबद्धता भी निलंबित कर दी गई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल ने एक लाभार्थी से 12 हजार रुपये की वसूली की, जबकि उसे कैशलेस उपचार मिलना चाहिए था।

अस्पताल ने बाद में राशि लौटा दी, लेकिन नियमों के उल्लंघन पर एसएचए ने 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। निरीक्षण में अस्पताल में रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर की अनुपलब्धता और स्वास्थ्य प्रबंधन पोर्टल पर गलत जानकारी जैसी कमियां भी सामने आईं।

अरिहंत अस्पताल के निरीक्षण में डायलिसिस यूनिट और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गईं। अस्पताल में डायलिसिस बेड के बीच मानक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा था।

मेडिकल सुपरविजन, संक्रमण नियंत्रण, पीपीई किट की उपलब्धता और एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से सत्यापन सहित कई व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सुधारात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

बलूनी अस्पताल के खिलाफ एक आयुष्मान लाभार्थी से दवाइयों और जांच के नाम पर 17,250 रुपये वसूलने का मामला सामने आया।

अस्पताल धनवापसी का दावा तो कर सका, लेकिन उसका कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाया। इस पर एसएचए ने 86,250 रुपये का जुर्माना लगाते हुए 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का अंतिम अवसर दिया है।

उधर, रुद्रपुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत 23 संविदा नर्सों को सेवा समाप्ति का नोटिस दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। नर्सों ने अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार पर मानसिक उत्पीड़न, कार्यस्थल पर दबाव बनाने और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।

नर्सों का कहना है कि उन्हें 15 जून को अचानक सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया गया। उनका आरोप है कि अस्पताल में लंबे समय से कर्मचारियों पर दबाव बनाकर काम कराया जा रहा है और नौकरी बचाने के लिए उन्हें अनुचित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों, विशेषकर रात्रिकालीन रिकॉर्डिंग की जांच कराने की मांग की है।

मामले की जानकारी मिलने पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल अस्पताल पहुंचे और कर्मचारियों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रमिकों के हित में स्थापित यह अस्पताल अपनी मूल भावना के अनुरूप काम करता नहीं दिख रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में एक्स-रे मशीन, विशेषज्ञ चिकित्सकों और महिला डॉक्टरों जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

ठुकराल ने कर्मचारियों से कथित सुविधा शुल्क वसूले जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं, कर्मचारियों ने सेवा समाप्ति नोटिस वापस लेने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इन दोनों घटनाओं ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।