GST चोरी का बड़ा खुलासा। फर्जी फर्मों के नेटवर्क से सरकार को 4 करोड़ का नुकसान
- राज्य कर विभाग की संयुक्त टीम की कार्रवाई, दो फर्मों ने मौके पर जमा किए 50 लाख
रिपोर्ट- अमित भट्ट
देहरादून। राज्य कर विभाग ने जीएसटी चोरी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के नाम पर बने इस फर्जीवाड़े में कर माफिया द्वारा खड़ी की गई नकली फर्मों की चेन ने सरकार को लगभग चार करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।
देहरादून, हरिद्वार, चमोली और काशीपुर में निर्माण और वर्क कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी 08 फर्मों पर हुई छापेमारी में यह खुलासा हुआ कि ये फर्में फर्जी खरीद–बिक्री के बिल बनाकर अनुचित आईटीसी ले रही थीं।
कार्रवाई राज्य कर आयुक्त सोनिका के निर्देश पर की गई। मुख्यालय की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) की टीम ने छापेमारी में समन्वित भूमिका निभाई। जांच में पता चला कि हरिद्वार के जगजीतपुर–कनखल क्षेत्र में एक फर्म स्वामी ने कई फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा कर रखा था।
यह नेटवर्क कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं करता था, बल्कि अलग-अलग कंपनियों को फर्जी बिल जारी कर आईटीसी का गलत फायदा पहुंचाता था। इस माध्यम से असल में कारोबार कर रही फर्में अपनी जीएसटी देयता को अवैध रूप से घटा लेती थीं।
दो फर्मों ने मौके पर दिए 50 लाख, आगे भी होगी वसूली
छापेमारी के दौरान जब विभागीय टीम ने फर्जीवाड़े का पूरा तरीका पकड़ा, तो दो फर्मों ने मौके पर ही 50 लाख रुपये जमा कर दिए। अधिकारियों ने साफ किया कि कर चोरी से जुड़े हर रुपये की वसूली की जाएगी, साथ ही कानून के तहत भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई में 20 अधिकारियों की टीम शामिल रही।
कमीशन पर बिकते थे फर्जी बिल
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि हरिद्वार स्थित यह फर्म विभिन्न कारोबारियों को तीन से पाँच प्रतिशत कमीशन पर फर्जी बिल बेचती थी। विभाग इस पूरे मामले को कर कानूनों के तहत आपराधिक षड्यंत्र मान रहा है और इसमें शामिल व्यक्तियों व फर्मों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।



