वन महकमे में प्रशासनिक फेरबदल, 41 अधिकारियों को मिला प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी का दायित्व
- एपीसीसीएफ मीनाक्षी जोशी ने कार्यभार छोड़ने से पहले जारी की सूची, सीनियरिटी के आधार पर हुआ चयन
देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में लंबे समय से लंबित पदोन्नति का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। विभाग ने 41 डिप्टी रेंजर्स को प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) के रूप में नियुक्त करते हुए उनकी सूची जारी कर दी है। इस निर्णय को विभागीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
नए पदभार के साथ नई तैनाती
हाल ही में भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के तबादलों के बाद अब अधीनस्थ स्तर पर भी फेरबदल शुरू हो गया है। इसी क्रम में 41 डिप्टी रेंजर्स को न केवल प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी का पदभार सौंपा गया है, बल्कि उन्हें नई तैनाती भी दी गई है। इससे विभागीय कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कार्यभार छोड़ने से पहले अहम निर्णय
मानव संसाधन का प्रभार संभाल रहीं एपीसीसीएफ मीनाक्षी जोशी ने यह सूची अपनी जिम्मेदारी छोड़ने से ठीक पहले जारी की। विभागीय फेरबदल के तहत यह प्रभार अब पीके पात्रो को सौंपा जा चुका है। ऐसे में यह फैसला उनके कार्यकाल के एक अहम निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।
सीनियरिटी के आधार पर चयन
प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी बनाए गए सभी अधिकारियों का चयन सीनियरिटी के आधार पर किया गया है। इस प्रक्रिया पर लंबे समय से विभागीय स्तर पर काम चल रहा था, जिसे अंतिम रूप मीनाक्षी जोशी की देखरेख में दिया गया। वन मंत्री सुबोध उनियाल के अनुमोदन के बाद आदेश जारी किए गए।
किन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
- वीरेंद्र दत्त बडोला
- देवेंद्र सिंह
- ओम प्रकाश
- हेमचंद्र आर्य
- खीम सिंह संभल
- कमल सिंह पवार
- त्रिभुवन सिंह बोरा
- चंद्रशेखर शर्मा
- नेत्र सिंह
- उत्तम सिंह रावत
- गणेश बहुगुणा
- राजेश कुमार
- राजेंद्र प्रसाद आर्य
- दान सिंह हरकोटिया
- संजय प्रसाद सेमवाल
- विशन दत्त जोशी
- ओमप्रकाश वर्मा
- संतोष कुमार
- दिनेश कुकरेती
- सुनील सिंह रावत
- भगवत प्रसाद भादुला
- अनिल कुमार भादुला
- राम सिंह जेठा
- अशोक कुमार
- पंकज शर्मा
- बलबीर सिंह
- ललित मोहन आर्य
- मनोज कुमार
- अनीता रावत
- प्रमोद चंद भट्ट
- बाबू सिंह
- रमेश चंद भट्ट
- दीपक कुमार
- यशपाल सिंह
- दीप चंद जोशी
- कुंदन सिंह बिष्ट
- धर्मानंद पाठक
- मनोज कुमार तिवारी
- राकेश सिंह राणा
- दिनेश सिंह
- अखिलेश रावत
वन प्रबंधन को मिलेगी मजबूती
इन सभी अधिकारियों को अब अपने-अपने क्षेत्रों में वन क्षेत्राधिकारी की जिम्मेदारी निभानी होगी। इससे वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
कर्मचारियों में संतोष का माहौल
विभाग के भीतर लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों में इस फैसले के बाद संतोष का माहौल है। कई डिप्टी रेंजर्स वर्षों से अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभाल रहे थे, लेकिन औपचारिक पद नहीं मिला था।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, क्षेत्रीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी, जिससे जमीनी स्तर पर कामकाज में तेजी आएगी।
उत्तराखंड वन विभाग का यह निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल विभागीय ढांचा मजबूत होगा, बल्कि कर्मचारियों को उनके कार्य के अनुरूप पहचान और जिम्मेदारी भी मिल सकेगी।



