साइबर खतरों से कैसे बचें? जिज्ञासा विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को किया जागरूक
देहरादून। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर सुरक्षा और निजी डेटा का संरक्षण बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
इसी को लेकर जिज्ञासा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एआई एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज की ओर से साइबर सुरक्षा माह-2026 के अवसर पर ‘सिक्योरिंग द डिजिटल फ्यूचर’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और उभरती तकनीकों से जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में उद्योग विशेषज्ञ एवं ड्रीम्जक्राफ्ट इन्फोमैटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नितिन जैन ने विद्यार्थियों के साथ अपने व्यावहारिक अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता साझा की।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ सूचनाओं और डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है।
व्याख्यान के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कंप्यूटर विजन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और वास्तविक कार्यक्षेत्र में सामने आने वाली तकनीकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
नितिन जैन ने विद्यार्थियों को तकनीकी विकास के साथ सुरक्षा संबंधी पहलुओं को समझने और वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रोफेसर डॉ. संदीप कौटिश ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल विश्वविद्यालयों, संस्थानों या बड़ी कंपनियों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए सभी को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना होगा।
डीन डॉ. अमित कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने डिजिटल उपकरणों, ऑनलाइन खातों और निजी जानकारियों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर डिजिटल सुरक्षा के उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण के महत्व से अवगत कराने के साथ ही उभरती प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान अनुराग कुमार, डॉ. विजयलक्ष्मी सजवाण और आयुषी ठाकुर सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।



