आयकर अपीलीय अधिकरण में 4,209 मामले लंबित, पांच साल के बजट और खर्च का हिसाब सार्वजनिक
- प्रथम अपील और ऑनलाइन सुनवाई के बाद आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया को मिले दस्तावेज; कर्मचारियों की संख्या, अपीलों के निस्तारण और सरकारी खर्च की जानकारी भी उजागर
हल्द्वानी। भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के अधीन आयकर अपीलीय अधिकरण (Income Tax Appellate Tribunal) की बेंगलुरु बेंच से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आई हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया की ओर से मांगी गई सूचना के जवाब में अधिकरण ने लंबित मामलों, दाखिल और निस्तारित अपीलों, कर्मचारियों तथा पांच वित्तीय वर्षों के बजट और खर्च से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।
जानकारी हासिल करने के लिए गोनिया को प्रथम अपील करनी पड़ी और ऑनलाइन सुनवाई में भी शामिल होना पड़ा।
1 जून 2026 तक 4,209 मामले लंबित
अधिकरण के अभिलेखों के अनुसार, 1 जून 2026 तक बेंगलुरु बेंच में 4,209 मामले लंबित थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2025 के बीच दाखिल अपीलों की संख्या में उतार-चढ़ाव रहा। वर्ष 2021 में 953, 2022 में 1,256, 2023 में 1,232, 2024 में 2,708 और 2025 में 3,264 अपीलें दाखिल हुईं।
इसी अवधि में निस्तारित मामलों की संख्या वर्ष 2021 में 2,578, 2022 में 2,314, 2023 में 1,252, 2024 में 1,922 और 2025 में 2,137 दर्ज की गई।
ये आंकड़े अपीलों के दाखिल होने और उनके निस्तारण की स्थिति सामने रखते हैं। हालांकि, लंबित मामलों की संख्या में बदलाव का सटीक आकलन करने के लिए पुराने लंबित मामलों और अन्य श्रेणियों के आंकड़ों का मिलान भी जरूरी है।
अपीलों के फैसलों का भी मिला ब्योरा
आरटीआई से प्राप्त तालिका में अपीलों के निर्णय की अलग-अलग श्रेणियों का विवरण भी दिया गया है। वर्ष 2021 में 1,151 अपीलें मंजूर, 474 आंशिक रूप से मंजूर और 953 खारिज दर्ज की गईं। वर्ष 2022 में 1,132 अपीलें मंजूर, 765 आंशिक रूप से मंजूर और 417 खारिज बताई गई हैं।
वर्ष 2023 के आंकड़ों में 573 खारिज, 521 अन्य प्रकृति की और 158 मंजूर अपीलें दर्ज हैं। वर्ष 2024 में 972 आंशिक रूप से मंजूर, 682 खारिज और 268 अन्य प्रकृति की अपीलें दर्ज की गईं।
वहीं, वर्ष 2025 में 1,196 अपीलें मंजूर, 529 आंशिक रूप से मंजूर और 412 खारिज बताई गई हैं। इन आंकड़ों की संबंधित वर्षों के कुल निस्तारण से तुलना करने पर कुछ अंतर दिखाई देता है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले मूल तालिकाओं का मिलान जरूरी होगा।
कर्मचारियों की संख्या और वेतन स्तर की जानकारी
अधिकरण ने विभिन्न पदों पर कर्मचारियों की संख्या और उनके वेतन स्तर से संबंधित विवरण भी उपलब्ध कराया है। इसमें उपाध्यक्ष, लेखाकार सदस्य, न्यायिक सदस्य, सहायक रजिस्ट्रार, वरिष्ठ निजी सचिव, निजी सचिव, कार्यालय अधीक्षक, उच्च एवं निम्न श्रेणी लिपिक और मल्टी टास्किंग स्टाफ सहित विभिन्न पद शामिल हैं।
इस जानकारी से अधिकरण में उपलब्ध मानव संसाधन और पदों की संरचना का विवरण सामने आता है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में पदवार वास्तविक संख्या और रिक्तियों के आंकड़े शामिल नहीं हैं, इसलिए उनके आधार पर कर्मचारियों की कमी या पर्याप्तता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
पांच वित्तीय वर्षों के बजट और खर्च का हिसाब
आरटीआई के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक विभिन्न मदों में स्वीकृत अनुदान और वास्तविक व्यय का विवरण भी दिया गया है। इसमें वेतन, भत्ते, चिकित्सा, कार्यालय खर्च, घरेलू यात्रा, कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी, एसएपी, आतिथ्य, पुरस्कार, ईंधन, किराया और डिजिटल उपकरण जैसी मदें शामिल हैं।
वर्ष 2021-22 में वेतन एवं भत्तों के लिए ₹4.89 करोड़ स्वीकृत किए गए, जिनमें से ₹4.69 करोड़ से अधिक खर्च हुए। चिकित्सा मद में ₹1.70 करोड़ का प्रावधान था, जबकि व्यय लगभग ₹13.92 लाख दर्ज किया गया। कार्यालय खर्च के लिए ₹77 लाख स्वीकृत हुए और लगभग ₹75.76 लाख खर्च किए गए।
वर्ष 2022-23 में वेतन एवं भत्तों के लिए ₹6 करोड़ स्वीकृत किए गए और लगभग ₹5.56 करोड़ खर्च हुए। चिकित्सा मद में ₹4.96 लाख से अधिक का व्यय दर्ज किया गया, जबकि कार्यालय खर्च ₹81.13 लाख बताया गया है।
वर्ष 2023-24 में वेतन मद में ₹2.70 करोड़ से अधिक स्वीकृत हुए और लगभग ₹2.60 करोड़ खर्च किए गए। भत्तों के लिए ₹2.14 करोड़ से अधिक स्वीकृत राशि के बराबर ही खर्च दर्ज है। चिकित्सा मद में लगभग ₹4.15 लाख और कार्यालय खर्च में ₹66.54 लाख से अधिक का व्यय हुआ।
वर्ष 2024-25 में वेतन मद में ₹3.19 करोड़ स्वीकृत हुए, जिनमें से लगभग ₹3.14 करोड़ खर्च किए गए। भत्तों के लिए ₹2.90 करोड़ से अधिक का प्रावधान था और लगभग पूरी राशि खर्च हुई। चिकित्सा मद में करीब ₹9.92 लाख और कार्यालय खर्च में लगभग ₹85.39 लाख का व्यय दर्ज किया गया।
वर्ष 2025-26 में वेतन मद के लिए ₹3 करोड़ से अधिक स्वीकृत हुए, जिनमें से लगभग ₹2.98 करोड़ खर्च किए गए। भत्तों में करीब ₹3 करोड़, चिकित्सा मद में लगभग ₹37.98 लाख, घरेलू यात्रा में ₹5.10 लाख और कार्यालय खर्च में लगभग ₹75.98 लाख व्यय दर्ज किया गया।
ये आंकड़े अलग-अलग बजट मदों के हैं। इन्हें अधिकरण के कुल बजट या कुल खर्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसके लिए सभी मदों का पूरा विवरण और समेकित आंकड़ा जरूरी है।
कुछ बिंदुओं की सूचना उपलब्ध नहीं
कार्यालय की ओर से दिए गए पत्र के अनुसार, आरटीआई आवेदन के बिंदु संख्या 7 से 10 तक मांगी गई जानकारी उसके पास उपलब्ध नहीं थी। शेष बिंदुओं के संबंध में जवाब और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से अहम जानकारी
आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गोनिया का कहना है कि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सूचना का अधिकार एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस मामले में आवेदन के बाद प्रथम अपील और ऑनलाइन सुनवाई की प्रक्रिया से गुजरकर दस्तावेज प्राप्त किए गए।
लंबित मामलों, अपीलों के निस्तारण, कर्मचारियों और सरकारी खर्च से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक होने से अधिकरण के कामकाज की स्थिति समझने में मदद मिलती है।
हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर व्यापक निष्कर्ष निकालने से पहले मूल अभिलेखों और सभी संबंधित मदों का सत्यापन आवश्यक है।




