साइबर ठगों पर STF का शिकंजा! कहीं मौतों का मातम तो कहीं त्योहारों पर हाईटेक पहरा
देहरादून। उत्तराखंड में नवंबर का पहला सप्ताह हादसों और आपराधिक घटनाओं के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। बीते कुछ दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुए हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कहीं बदरीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत के पास दुर्घटनाग्रस्त होकर छह जिंदगियां निगल गया, तो कहीं उत्तरकाशी में पर्यटकों से भरी कार भागीरथी नदी में समा गई।
देहरादून के मोहब्बेवाला में कंटेनर कार पर पलटने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ में पिकअप और कार की भीषण भिड़ंत में आठ लोग घायल हो गए।
हवा, पानी और हाईवे पर हुए इन हादसों के बीच प्रदेश में ऑनलाइन निवेश के नाम पर हजारों लोगों से ठगी करने वाले नेटवर्क पर एसटीएफ ने शिकंजा कसा है।
दूसरी ओर धनतेरस और दीपावली के मद्देनजर नैनीताल पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए हल्द्वानी में 233 सक्रिय सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी शुरू कर दी है।
आसमान से सड़क तक हादसों का कहर, सात दिनों में कई परिवार उजड़े
उत्तराखंड में नवंबर की शुरुआत हादसों की लगातार खबरों के साथ हुई है। चमोली में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में छह लोगों की मौत, उत्तरकाशी के गंगनानी में कार नदी में गिरने से चार लोगों की मौत और दो महिलाओं के लापता होने तथा देहरादून के मोहब्बेवाला में कंटेनर पलटने से चार लोगों की जान जाने की घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।
इन हादसों के बीच बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लामबगड़ में दो वाहनों की आमने-सामने की टक्कर ने एक बार फिर पहाड़ी सड़कों पर सफर की चुनौतियों को सामने ला दिया है। इस दुर्घटना में आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई गई है।
बदरीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत के पास क्रैश, छह की मौत
हादसों की इस कड़ी में सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक चमोली जिले में सामने आई। ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था।
दोपहर करीब 1:14 बजे उड़ान भरने के कुछ समय बाद ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हाथी पर्वत के आसपास हेलीकॉप्टर का संपर्क टूट गया।
बाद में चाई गांव के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर में सवार पांच यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे, जबकि पायलट दिल्ली निवासी थे।
घटना की सूचना मिलते ही भारतीय सेना, जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें मौके पर पहुंचीं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और मौसम की चुनौतियों के बीच राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया।
इस हादसे में कर्नाटक के पुलिस अधिकारी अरुण सालुंके की भी जान चली गई। वह अपने दोस्तों के साथ बदरीनाथ धाम के दर्शन करने पहुंचे थे।
हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस दुर्घटना के बाद उत्तराखंड में संचालित हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हवाई सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में बदलता मौसम, तेज हवाएं, ऊंचाई और कम दृश्यता हेलीकॉप्टर संचालन को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
हादसे के बाद हेलीकॉप्टर के मालिकाना हक, चार्टर संचालन, पायलट और रखरखाव से जुड़ी अलग-अलग कंपनियों की भूमिका भी चर्चा में आई। ऐसे में जांच का अहम पहलू यह होगा कि उड़ान संचालन से लेकर तकनीकी रखरखाव तक निर्धारित सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया था।
गंगनानी में खाई से भागीरथी नदी में समाई कार, चार की मौत, दो महिलाएं लापता
चमोली के बाद उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए हादसे ने प्रदेश को एक और गहरे सदमे में डाल दिया।
गंगनानी के पास धारा कुंड से करीब 20 मीटर आगे डबरानी की ओर एक इनोवा कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी और सीधे भागीरथी नदी में समा गई।
कार में सात लोग सवार बताए गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आपातकालीन चिकित्सा सेवा की टीमें मौके पर पहुंचीं।
राहत एवं बचाव अभियान के दौरान चार लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि 17 वर्षीय वेदांत अशोकभाई पटेल को गंभीर हालत में रेस्क्यू किया गया।
हादसे में गुजरात निवासी अशोकबेन, रुतिका पटेल और घनश्यामभाई सरवालिया के साथ हरिद्वार निवासी चालक सुरेंद्र सिंह की मौत हुई। वहीं, सुधाबेन अशोकभाई पटेल और किरणबेन विशालभाई पटेल की तलाश के लिए नदी में सर्च अभियान चलाया गया।
पहाड़ी राजमार्गों की सुरक्षा पर फिर सवाल
गंगनानी हादसे ने पहाड़ी राजमार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान इन मार्गों पर दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। इनमें कई ऐसे चालक भी होते हैं, जिन्हें पहाड़ी रास्तों पर वाहन चलाने का पर्याप्त अनुभव नहीं होता।
ऐसे में संवेदनशील मोड़ों पर मजबूत क्रैश बैरियर, पैरापिट, चेतावनी संकेतक, गति नियंत्रण और नियमित सड़क सुरक्षा ऑडिट बेहद जरूरी हैं।
मोहब्बेवाला में कंटेनर कार पर पलटा, एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार की मौत
देहरादून के मोहब्बेवाला में 4 नवंबर को हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर माल से भरा एक कंटेनर कार के ऊपर पलट गया।
हादसे में कार सवार विश्वेश कपूर, उनकी पत्नी निशा आनंद कपूर, मां किरण कपूर और चालक नीरज कुमार की मौत हो गई। परिवार का छह वर्षीय बच्चा घायल हो गया।
बताया गया कि परिवार सहारनपुर से देहरादून आ रहा था और शहर में रहने वाले अपने परिजनों से मिलने जा रहा था। लेकिन मोहब्बेवाला के पास भारी कंटेनर कार पर पलट गया। कार कंटेनर के नीचे बुरी तरह दब गई।
पुलिस और राहत टीम ने क्रेन की मदद से कंटेनर हटवाकर राहत एवं बचाव कार्य किया। हादसे की भयावहता ने भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।
कंटेनर के 25 चालान लंबित, जिम्मेदार विभागों पर FIR
हादसे के बाद सामने आया कि कंटेनर के यातायात नियमों के उल्लंघन से संबंधित 25 चालान लंबित बताए गए हैं। सवाल यह है कि लगातार चालान लंबित होने के बावजूद वाहन सड़कों पर कैसे दौड़ रहा था और उसकी निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी?
इस मामले में पुलिस ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
मोहब्बेवाला क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। ऐसे में सड़क की डिजाइन, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
लामबगड़ में बोलेरो पिकअप और कार की आमने-सामने भिड़ंत, आठ घायल
इसी बीच चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुरुवार शाम लामबगड़ के पास एक और भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां बोलेरो पिकअप और राजस्थान नंबर की कार के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
पिकअप में छह लोग सवार थे, जबकि कार में दो लोग मौजूद थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और राहत टीम ने वाहनों में फंसे घायलों को बाहर निकाला और नजदीकी जेपी अस्पताल पहुंचाया।
घटना में आठ लोग घायल हुए। इनमें चार की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद जोशीमठ रेफर किया गया, जबकि अन्य चार का उपचार अस्पताल में जारी रहा। कार में सवार यात्रियों को भी चोटें आईं।
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य संभाला। फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
30 हजार करोड़ से अधिक की ठगी नेटवर्क पर STF का शिकंजा, दो गिरफ्तार
सड़क हादसों के बीच उत्तराखंड एसटीएफ ने ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ ने नवीन सिंह नेगी और कविता परमार को गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोग अधिक मुनाफे और विदेश यात्राओं का लालच देकर लोगों को विभिन्न कंपनियों में निवेश के लिए प्रेरित कर रहे थे। जांच में विदेश में बैठे मुख्य आरोपी लविश चौधरी का नाम सामने आया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने मामले की जांच के लिए एसटीएफ के अधीन विशेष अन्वेषण दल (SIT) गठित किया था। आईजी नीलेश आनंद भरणे और एसएसपी एसटीएफ के निर्देशन में प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज मुकदमों की एकीकृत जांच की जा रही है।
2022 से निवेश नेटवर्क से जुड़ा था नवीन
जांच में सामने आया कि नवीन सिंह नेगी वर्ष 2022 से इस नेटवर्क से जुड़ा था। बाद में वह लविश चौधरी द्वारा संचालित कंपनियों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करने लगा। एसटीएफ के मुताबिक, संबंधित कंपनियां आरबीआई और सेबी में पंजीकृत नहीं थीं।
कंपनी बंद होने और उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने के बावजूद नवीन ने नई कंपनी का प्रचार शुरू कर दिया था। वह जूम मीटिंग के जरिए लोगों को दोबारा ऑनलाइन बिजनेस से जोड़ने का प्रयास कर रहा था।
महिला आरोपी की 12 से 13 विदेश यात्राओं का खुलासा
दूसरी गिरफ्तार आरोपी कविता परमार वर्ष 2022 से कंपनी से जुड़ी थी। पूछताछ में सामने आया कि उसने खुद और अपने परिजनों की आईडी बनाकर निवेश किया था। इसके अलावा रेफरल आईडी के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को नेटवर्क से जोड़ा।
एसटीएफ के अनुसार, उसकी रोबो आईडी में करीब 10 से 15 हजार लोग जुड़े हुए थे। वह कंपनी में सीनियर ईगल एग्जीक्यूटिव के पद तक पहुंच गई थी और उसे हर महीने करीब 1,000 डॉलर का लाभ मिलने का आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच वह कंपनी के सेमिनार में शामिल होने के लिए मलेशिया, थाईलैंड, दुबई और वियतनाम की करीब 12 से 13 बार यात्रा कर चुकी थी। इन यात्राओं का खर्च कंपनी उठाती थी।
एसटीएफ के मुताबिक, जूम मीटिंग और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। ऑनलाइन बैठकों में एक समय पर करीब एक हजार लोग जुड़ते थे।
निवेशकों की ओर से जमा कराई गई रकम के बदले उनके ऑनलाइन खातों में डॉलर के रूप में आंकड़े दिखाए जाते थे, जबकि वे वास्तविक धनराशि नहीं थे।
आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे के अनुसार, इस मामले में प्रदेश में करीब 10 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
इनमें बैंकिंग विवरण, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, व्हाट्सएप चैट, ट्रेडिंग खातों और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े साक्ष्य मिलने की संभावना है। जांच में मुख्य आरोपी और अन्य सहयोगियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
धनतेरस और दीपावली पर हल्द्वानी में हाईटेक निगरानी, 233 CCTV कैमरे सक्रिय
एक तरफ प्रदेश में हादसों और अपराधों ने चिंता बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ त्योहारों को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस ने निगरानी व्यवस्था मजबूत की है। धनतेरस और दीपावली के मद्देनजर नैनीताल पुलिस हल्द्वानी में पूरी तरह अलर्ट है।
शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और संवेदनशील स्थानों पर लगे 233 सक्रिय सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही ड्रोन के माध्यम से भी भीड़भाड़ वाले इलाकों की निगरानी की जा रही है।
एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी ने हल्द्वानी स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (CCR) का निरीक्षण कर कैमरों की कार्यशीलता और लाइव फीड की जांच की। उन्होंने एसपी संचार रेवाधर मठपाल को लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
एसएसपी ने स्पष्ट किया कि बाजारों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष नजर रखी जाए। सीसीटीवी या ड्रोन के जरिए कोई संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल संबंधित थाना और चौकी को सूचना देकर कार्रवाई की जाए।
पुलिस का उद्देश्य त्योहारों के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और आम लोगों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है।
हादसों से सबक और सुरक्षा इंतजामों की असली परीक्षा
उत्तराखंड में बीते दिनों हुई घटनाएं बताती हैं कि सुरक्षा की चुनौती केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। हवाई सेवाओं में मौसम और तकनीकी मानकों का पालन जरूरी है।
पहाड़ी सड़कों पर मजबूत सुरक्षा इंतजाम और अनुभवी ड्राइविंग की आवश्यकता है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में भारी वाहनों की निगरानी और सड़क डिजाइन की खामियों को दूर करना जरूरी है।
इसके साथ ही ऑनलाइन निवेश के नाम पर सक्रिय ठगी के नेटवर्क और त्योहारों के दौरान बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना भी पुलिस-प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
अब सवाल यह है कि क्या हादसों के बाद होने वाली जांच और कार्रवाई स्थायी सुरक्षा सुधारों में बदल पाएगी?
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और पर्यटन आधारित राज्य में सुरक्षा इंतजाम केवल हादसों के बाद सक्रिय होने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि दुर्घटनाओं और अपराधों को रोकने के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था विकसित करना भी उतना ही जरूरी है।



