कहीं भर्ती पर रोक, कहीं याचिका खारिज। हाईकोर्ट के चार अहम फैसलें, आप भी पढ़ें….
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए रामनगर में निर्धारित स्थलों से बाहर मीट की दुकान खोलने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
वहीं लोक निर्माण विभाग (PWD) में कनिष्ठ अभियंताओं की नई भर्ती के अधियाचन पर रोक लगा दी। इसके अलावा प्रदेश की मंडी परिषदों की भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़ी जनहित याचिका निरस्त कर दी गई, जबकि हरिद्वार के लक्सर स्थित ग्राम पंचायत सेठपुर के मामले में चकबंदी अधिकारी को पंचायत के प्रस्ताव की सत्यता जांचने के निर्देश दिए गए हैं।
रामनगर में निर्धारित स्थलों पर ही खुलेंगी मीट की दुकानें
हाईकोर्ट ने उमर कुरैशी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें नगर पालिका परिषद रामनगर के निर्धारित स्थलों से बाहर बीफ की दुकान खोलने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र देने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत व्यापार करने का अधिकार निरपेक्ष नहीं है और जनहित में इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
नगर पालिका के अनुसार, वर्ष 2006 के राजपत्रित उप-नियमों के तहत रामनगर में कुल 16 बीफ दुकानों की सीमा निर्धारित है। इनमें मोहल्ला खतारी मीट मार्केट में 12 और मोहल्ला गूलरघट्टी में चार दुकानें शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि जब तक संबंधित उप-नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक उनके विपरीत किसी अन्य स्थान पर दुकान खोलने की अनुमति देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
संविदा कनिष्ठ अभियंताओं को राहत, नई भर्ती के अधियाचन पर रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में कनिष्ठ अभियंताओं के पदों पर नई भर्ती के लिए 30 जुलाई 2026 को भेजे गए अधियाचन के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने राहुल सैनी व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वे पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से विभाग में संविदा कनिष्ठ अभियंता के रूप में कार्यरत हैं और आवश्यक योग्यताएं पूरी करते हैं। इसके बावजूद उनकी सेवाओं के भविष्य पर निर्णय किए बिना उन्हीं पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
इससे पहले अदालत राज्य सरकार को संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पर विचार करने का निर्देश दे चुकी है। हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मंडी परिषदों की भूमि पर अतिक्रमण की PIL खारिज
प्रदेश की विभिन्न मंडी परिषदों की जमीनों पर कथित अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट ने जनहित याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने 6 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आया कि उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी बोर्ड के प्रबंध निदेशक विभिन्न मंडी समितियों के सचिवों से जानकारी लेकर मामले की जांच कर रहे हैं। वहीं, कृषि उत्पादन मंडी समिति किच्छा को दुकानदारों के अस्थायी अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं।
खंडपीठ ने कहा कि जब संबंधित विभाग पहले से ही मामले की जांच कर रहा है और कथित कब्जाधारी भी याचिका में पक्षकार नहीं हैं, तो इस रिट याचिका में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। इसी आधार पर जनहित याचिका निरस्त कर दी गई।
सेठपुर ग्राम पंचायत के मामले में नौ महीने के भीतर कार्रवाई के निर्देश
हरिद्वार जिले के लक्सर विकासखंड की ग्राम पंचायत सेठपुर से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए संबंधित चकबंदी अधिकारी को सबसे पहले यह जांचने का निर्देश दिया कि ग्राम पंचायत के सदस्यों ने प्रधान को याचिका दायर करने के लिए अधिकृत करने वाला प्रस्ताव वास्तव में पारित किया था या नहीं।
याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि 23 जून 2026 को इस संबंध में चकबंदी अधिकारी को प्रत्यावेदन दिया गया, लेकिन उस पर निर्णय नहीं लिया गया। याचिका के साथ पंचायत सदस्यों का कथित प्रस्ताव भी संलग्न किया गया था।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने निर्देश दिया कि यदि प्रस्ताव पारित होने की पुष्टि होती है, तो अधिकारी अतिक्रमण से जुड़े मुद्दे पर विचार कर कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करें।
पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से नौ महीने के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही, फैसले से प्रभावित होने की संभावना वाले लोगों को सुनवाई का उचित अवसर भी देना होगा।



