बिग ब्रेकिंग: धामी कैबिनेट की 24 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर। आप भी पढ़ें….

धामी कैबिनेट की 24 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर। आप भी पढ़ें….

बनबसा। भारत-नेपाल सीमा से सटे बनबसा में पहली बार आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

करीब 24 प्रस्तावों पर चर्चा के बाद सरकार ने नजूल भूमि के नियमितीकरण, युवाओं के कौशल विकास, पशुपालन को बढ़ावा देने और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाई।

कैबिनेट का सबसे अहम फैसला प्रदेश में नजूल भूमि के नियमितीकरण को लेकर रहा। सरकार ने खटीमा, बनबसा समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित नजूल भूमि के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। लंबे समय से भूमि अधिकारों की मांग कर रहे लोगों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से ₹200 करोड़ की स्किल डेवलपमेंट योजना को मंजूरी दी गई है।

योजना के तहत छात्रों को आधुनिक और उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा स्किल डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश के एक लाख से अधिक छात्र लाभान्वित होंगे।

पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करने का भी फैसला लिया गया है।

डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे करीब 2,000 लाभार्थियों को फायदा मिलने की संभावना है।

इसके अलावा पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों के बेहतर संचालन के लिए महानिदेशक का एक पद भी सृजित किया गया है।

कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कर्मचारी आचरण नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है।

इसके तहत समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के कर्मचारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण निर्धारित व्यवस्था के तहत देना होगा। साथ ही प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) अधिकारी के पद को समूह ‘ख’ में शामिल करने का निर्णय भी लिया गया।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए 10 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त कर 20 हजार वर्गमीटर भूमि का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही पांच करोड़ रुपये के गारंटी फंड की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।

कैबिनेट बैठक में डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, टीडीसी के लिए ₹66 करोड़ के विशेष पैकेज, टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने तथा वन भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए पीएमयू और नोडल अधिकारियों की व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई।

सरकार का कहना है कि इन फैसलों से सीमांत क्षेत्रों के विकास को गति मिलेगी, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों व पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

बनबसा में आयोजित यह कैबिनेट बैठक सीमांत क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकता को भी दर्शाती है।