बड़ी खबर: फर्जी प्रमाणपत्रों पर शिकंजा, MBBS दाखिले अब सत्यापन तक रहेंगे प्रोविजनल

फर्जी प्रमाणपत्रों पर शिकंजा, MBBS दाखिले अब सत्यापन तक रहेंगे प्रोविजनल

देहरादून। उत्तराखंड में NEET UG 2026 की राज्य केंद्रीकृत काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अब तक 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और उनके प्रवेश भी रद्द किए गए हैं। वहीं, जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी किए हैं कि काउंसलिंग के जरिए होने वाले MBBS दाखिलों में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का शत-प्रतिशत सत्यापन किया जाए। सत्यापन पूरा होने तक संबंधित अभ्यर्थी का प्रवेश प्रोविजनल यानी अस्थायी माना जाएगा।

फर्जी प्रमाणपत्र मिलने के बाद बढ़ी सख्ती

NEET UG 2026 की राज्य केंद्रीकृत काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में दाखिले को लेकर शिकायत सामने आई थी। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू की।

जांच में कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी सामने आने के बाद उनके प्रमाणपत्र और प्रवेश निरस्त किए गए।

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि किसी अभ्यर्थी ने फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल प्रवेश में अनुचित लाभ लिया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

साथ ही, ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसकी भी जांच कर कार्रवाई करने को कहा गया है।

अब सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की जांच
शुरुआती जांच में सामने आए मामलों के बाद सरकार ने जांच का दायरा केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं रखा है। अब आरक्षण, निवास, आय, जाति और अन्य श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्रों की भी जांच और सत्यापन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि किसी अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र कूटरचित पाया जाता है तो प्रमाणपत्र निरस्त करने के साथ संबंधित दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश लेने से योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं।

तीसरी काउंसलिंग से पहले बदली व्यवस्था

MBBS सीटों के लिए अब तक दो चरणों की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है। तीसरी काउंसलिंग से पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग ने दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था को मजबूत किया है।

नई व्यवस्था के तहत मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने के बाद भी अभ्यर्थी का दाखिला तब तक अंतिम नहीं माना जाएगा, जब तक उसके सभी जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन पूरा नहीं हो जाता।

यदि सत्यापन में प्रमाणपत्र सही पाए जाते हैं तो प्रवेश को नियमित किया जाएगा। वहीं, किसी दस्तावेज के फर्जी या संदिग्ध पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था से भी होगा सत्यापन

अब केवल मेडिकल कॉलेज स्तर पर दस्तावेजों की जांच नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर प्रमाणपत्र को संबंधित जारीकर्ता संस्था या सक्षम प्राधिकरण के पास भेजकर उसकी पुष्टि भी कराई जाएगी।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को इस संबंध में पत्र भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन में किसी भी तरह की चूक न हो, इसके लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।

चार दाखिलों में फर्जी प्रमाणपत्र की पुष्टि

पूरे मामले की शुरुआत एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा की शिकायत से हुई थी। उन्होंने देहरादून जिलाधिकारी और चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से MBBS में दाखिला लेने वाले कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों पर सवाल उठाए थे।

प्रशासन की जांच में चार अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद इन अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द किए गए। मामले में चार अभ्यर्थियों समेत पांच लोगों के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

अब इस मामले के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल कॉलेजों को स्पष्ट कर दिया है कि दस्तावेजों की जांच केवल दाखिले की औपचारिक प्रक्रिया नहीं होगी।

सत्यापन पूरा होने तक MBBS प्रवेश प्रोविजनल रहेगा और फर्जी प्रमाणपत्र सामने आने पर प्रवेश निरस्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।