उत्तराखंड में हंगामा, हादसे और बड़े खुलासे समेत 8 बड़ी खबरें, एक क्लिक में पढ़ें…..
देहरादून। उत्तराखंड में सोमवार का दिन अपराध, अव्यवस्था, हादसों और प्रशासनिक विवादों से जुड़ी कई बड़ी घटनाओं के कारण चर्चा में रहा।
राजधानी देहरादून से लेकर रुद्रप्रयाग, पौड़ी, अल्मोड़ा और हरिद्वार तक अलग-अलग घटनाओं ने कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सबसे ज्यादा चर्चा देहरादून की दून यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कथित अनधिकृत फ्रेशर्स पार्टी के बाद हुए हंगामे की रही। आरोप है कि पार्टी समाप्त होने के बाद 100 से अधिक छात्र-छात्राएं यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर सड़क पर उतर आए।
इस दौरान कुछ युवकों ने सड़क पर हुड़दंग किया, राहगीरों के साथ अभद्रता की और एक कार को घेरकर उसके शीशे तोड़ दिए। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने बिना शिकायत के भी जांच शुरू कर दी है।
हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी बीच देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में देर रात मेडिकल परीक्षण कराने पहुंचे दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हो गई।
अस्पताल परिसर में धक्कामुक्की, जूते-चप्पल चलने और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। विवाद के दौरान व्हीलचेयर क्षतिग्रस्त हो गई और ईएमओ कक्ष के बाहर लगा शीशा भी टूट गया। बीच-बचाव करने पहुंचे पीआरडी जवान के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है। घटना ने अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हरिद्वार जिले के रुड़की से एक बेहद गंभीर आपराधिक मामला सामने आया, जहां मां के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक व्यक्ति पर नाबालिग किशोरी को नशीला पदार्थ देकर कई महीनों तक दुष्कर्म करने का आरोप लगा है।
किशोरी के तीन माह की गर्भवती होने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी मोहम्मद नजीर को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।
राजधानी देहरादून में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के कथित दुरुपयोग का मामला भी सुर्खियों में रहा। एमबीबीएस प्रवेश में लाभ लेने के लिए कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में पांच महिलाओं के खिलाफ रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रशासन द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। उधर रुद्रप्रयाग में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चीरबासा हेलीपैड के पास भूस्खलन होने से पैदल मार्ग का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण यात्रियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था। विषम परिस्थितियों के बीच एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने राहत अभियान चलाकर 6500 से अधिक तीर्थयात्रियों और करीब 700 घोड़े-खच्चरों को सुरक्षित मार्ग पार कराया। क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पौड़ी जिले के कल्जीखाल ब्लॉक स्थित दिवई गांव में आबकारी विभाग की कथित छापेमारी को लेकर भी विवाद गहरा गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय टीम बिना उचित जानकारी और दस्तावेज दिखाए एक घर में घुसी तथा तलाशी ली।
तलाशी में कुछ भी बरामद नहीं होने के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।
रुड़की के गणेश चौक में दिनदहाड़े हुई एक घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। दिल्ली निवासी एक युवक ने बाजार में 10 रुपये का चाकू खरीदा और कुछ ही देर बाद उसी चाकू से अपनी गर्दन पर वार कर लिया।
गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है। पुलिस घटना के पीछे के कारणों की जांच कर रही है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र से आई एक दर्दनाक खबर ने पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
इनोलू गांव की 24 वर्षीय गर्भवती महिला निशा को समय पर उपचार नहीं मिल सका और इलाज की तलाश में भटकते-भटकते उसकी तथा गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों की मौत हो गई। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं और मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
वहीं नैनीताल जिले के रामनगर-देघाट मार्ग पर एक रोडवेज बस कार को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई। चालक की सूझबूझ के कारण बस पलटने से बच गई और बड़ा हादसा टल गया।
बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन घटना ने एक बार फिर पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा और चौड़ीकरण की जरूरत को उजागर कर दिया। अपराध, अव्यवस्था, स्वास्थ्य संकट, प्रशासनिक विवाद और प्राकृतिक आपदा से जुड़ी इन घटनाओं ने सोमवार को पूरे उत्तराखंड में चर्चा बटोरी।
एक तरफ केदारनाथ यात्रा मार्ग पर राहत एवं बचाव कार्यों ने प्रशासन की तत्परता दिखाई, तो दूसरी ओर कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली से जुड़े कई सवाल भी सामने आए।


