राजनीति: ED की कार्रवाई से मचा सियासी घमासान, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए दोहरे निशाने

ED की कार्रवाई से मचा सियासी घमासान, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए दोहरे निशाने

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार को दो बड़े मुद्दों ने सियासी माहौल गरमा दिया। एक ओर UKSSSC भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई छापेमारी को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गईं।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की चार्जशीट कमेटी ने धामी सरकार पर सरकारी जमीनों के आवंटन में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए जवाब मांगा।

ED की कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेता हरीश रावत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों और चल रही जांच को लेकर खुलकर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी एजेंसी को उनकी घोषित या अघोषित संपत्तियों की जांच करनी है तो वह पूरी तरह तैयार हैं। रावत ने कहा कि CBI, ED, आयकर विभाग या अन्य कोई भी एजेंसी उनकी जांच कर सकती है और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए कहा कि कुछ लोगों के पास जांच एजेंसियों से लेकर विभिन्न प्रकार के राजनीतिक और प्रचारात्मक हथियार मौजूद हैं, जिनका वे इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भर्ती घोटाले या किसी भी कथित टेंपरिंग से जुड़ा यदि कोई प्रमाण किसी के पास है तो उसे जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए।

रावत ने दावा किया कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी कोई गलत काम नहीं किया और एक बार में पूरी सच्चाई सामने आ जानी चाहिए।

चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर हुई कार्रवाई को लेकर भी हरीश रावत ने कहा कि मामला भले ही उनके पूर्व ओएसडी से जुड़ा हो, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश उन्हें निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चंदन सिंह जीना लंबे समय तक उनके साथ जुड़े रहे हैं और इसलिए इस कार्रवाई को सीधे उनसे जोड़कर देखा जा रहा है।

इधर, हरीश रावत द्वारा कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने की चर्चा पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि रावत ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है।

उन्होंने केवल इतना कहा था कि वह पार्टी को किसी असहज स्थिति में नहीं डालना चाहते और इस विषय पर विचार कर रहे हैं। गोदियाल ने कहा कि हरीश रावत की कांग्रेस के प्रति निष्ठा पहले भी थी और आगे भी बनी रहेगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने भी ED कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित बताते हुए कहा कि चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं और उनके सहयोगियों के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई पहले भी विभिन्न राज्यों में देखी गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2016 के मामले को लगभग दस साल बाद फिर से प्रमुखता से क्यों उठाया जा रहा है। माहरा ने नोटबंदी का हवाला देते हुए यह भी पूछा कि यदि कथित धनराशि 2016 से जुड़ी है तो उसके संबंध में इतने वर्षों में क्या स्थिति रही होगी।

वहीं रामनगर के ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी ने भी कार्रवाई को हरीश रावत पर दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही उनके करीबी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

उधर देहरादून में आयोजित कांग्रेस चार्जशीट कमेटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार को सरकारी और लीज की जमीनों के मुद्दे पर घेरा।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकारी जमीनों का आवंटन इस तरह किया जा रहा है जिससे भविष्य में राज्य के विकास के लिए आवश्यक भूमि की कमी पैदा हो सकती है।

करन माहरा ने कहा कि उत्तराखंड की सरकारी भूमि आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति है और उसका उपयोग अत्यंत पारदर्शी तथा जनहित में होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में ऐसी शर्तें रखी गई हैं जिनके कारण स्थानीय युवा और छोटे उद्यमी प्रतिस्पर्धा में शामिल ही नहीं हो सकते।

उन्होंने दावा किया कि कुछ परियोजनाओं के लिए 60 करोड़ रुपये की नेटवर्थ, 25 से अधिक देशों में कारोबार और हजार कमरों के संचालन जैसे अनुभव की शर्तें स्थानीय लोगों को बाहर करने का काम कर रही हैं।

कांग्रेस ने डाबा माइनर क्षेत्र की करीब 1.5 लाख वर्ग मीटर भूमि के आवंटन का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम कीमत पर जमीन दी गई, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।

माहरा ने दावा किया कि यदि भूमि का पारदर्शी तरीके से निस्तारण किया जाता तो सरकार को कहीं अधिक राजस्व प्राप्त हो सकता था।

इसके अलावा कांग्रेस ने एक अन्य भूमि आवंटन मामले में भी कीमतों के पुनर्मूल्यांकन के बाद करोड़ों रुपये के अंतर का हवाला देते हुए सरकार पर वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, पारदर्शी भूमि नीति और सरकारी जमीनों के आवंटन से जुड़े सभी निर्णयों को सार्वजनिक करने की मांग की।

ED कार्रवाई और जमीन आवंटन के मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने एक साथ सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है, जबकि भाजपा की ओर से अभी इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

ऐसे में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।