बिग ब्रेकिंग: नितिन नवीन ने फूंका चुनावी बिगुल, उत्तराखंड में गरमाई राजनीतिक सरगर्मियां। CM धामी बोले….

नितिन नवीन ने फूंका चुनावी बिगुल, उत्तराखंड में गरमाई राजनीतिक सरगर्मियां। CM धामी बोले….

देहरादून। हल्द्वानी में आयोजित भाजपा की दो दिवसीय विस्तारित प्रदेश कार्यसमिति बैठक ने उत्तराखंड की राजनीति को पूरी तरह चुनावी रंग में रंग दिया है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे को केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के चुनावी शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में जहां बूथ से लेकर शक्ति केंद्र तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई, वहीं तिलक विवाद और शुद्धिकरण प्रकरण ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया।

प्रदेश कार्यसमिति के अंतिम सत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक की।

उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि 2027 का चुनाव केवल सत्ता हासिल करने का चुनाव नहीं, बल्कि भाजपा की विचारधारा और संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा भी होगा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय करने, शक्ति केंद्रों को मजबूत बनाने और अनुभवी पदाधिकारियों के अनुभव का लाभ लेने पर जोर दिया। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनावी जीत की सबसे बड़ी गारंटी है।

नितिन नवीन ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड में भाजपा की ताकत उसके कार्यकर्ता हैं। उन्होंने पार्टी के 19 संगठनात्मक जिलों, 304 मंडलों, 2,835 शक्ति केंद्रों और 12,543 बूथों को आगामी चुनाव का सबसे बड़ा आधार बताया।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जनता के बीच लगातार संवाद बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया।

कार्यसमिति बैठक के बीच एक वीडियो ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। कार्यक्रम स्थल पर स्वागत के दौरान महिलाओं ने प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को तिलक लगाया, लेकिन कुछ ही क्षण बाद उन्होंने रुमाल से तिलक पोंछ दिया।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कांग्रेस ने इसे सनातन परंपराओं और देवभूमि की संस्कृति का अपमान बताते हुए भाजपा पर हमला बोल दिया।

कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि तिलक केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सम्मान और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने दुष्यंत गौतम से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए भाजपा पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया।

भाजपा की चुनावी रणनीति के समानांतर हल्द्वानी का चर्चित शुद्धिकरण विवाद भी सियासत के केंद्र में बना हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर पहले से राजनीतिक घमासान जारी है।

अब इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद विवाद और गहरा गया है। पुलिस को प्रदेशभर से करीब 80 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से कई में कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायतों की जांच के बाद हल्द्वानी कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है और जांच एसपी क्राइम को सौंपी गई है।

एफआईआर दर्ज होने के अगले ही दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि अब तक ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि किसी व्यक्ति को अपमानित करने के उद्देश्य से शुद्धिकरण कराया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को हवा देकर समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील विषयों पर राजनीति करने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

वहीं कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को भाजपा के खिलाफ बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शुद्धिकरण की घटना सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद गंभीर है तथा इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान और सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए भाजपा पर सवाल खड़े किए हैं। दूसरी ओर भाजपा नेतृत्व कांग्रेस पर तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगा रहा है।

नितिन नवीन का यह दौरा केवल कार्यसमिति बैठकों तक सीमित नहीं है। उनके कार्यक्रम में सेवा संकल्प अभियान की समीक्षा, पूर्व सैनिक सम्मेलन और पंजाबी गौरव सम्मेलन जैसे आयोजन भी शामिल हैं।

भाजपा इन कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करने और चुनाव से पहले व्यापक जनसंपर्क अभियान की नींव रखने की तैयारी कर रही है।

कुल मिलाकर हल्द्वानी में भाजपा की कार्यसमिति बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।

एक तरफ संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है, तो दूसरी ओर शुद्धिकरण और तिलक विवाद जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक उग्र बना दिया है।

आने वाले दिनों में भाजपा की चुनावी रणनीति और विपक्ष के हमलों के बीच उत्तराखंड की राजनीति और भी दिलचस्प होने के संकेत दे रही है।