एक तरफ टोल जाम, दूसरी तरफ सियासी घेराबंदी। उत्तराखंड में उफान पर विरोध की राजनीति
देहरादून। उत्तराखंड में सोमवार को सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर जबरदस्त हलचल देखने को मिली। एक ओर हरिद्वार में यूजीसी कानून, आरक्षण व्यवस्था और एससी-एसटी एक्ट में बदलाव की मांग को लेकर स्वर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने बहादराबाद टोल प्लाजा पर बड़ा प्रदर्शन किया।
वहीं दूसरी ओर हल्द्वानी के मंच शुद्धिकरण विवाद को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया। प्रदेश के कई हिस्सों में धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर पूरे दिन चलता रहा।
हरिद्वार के बहादराबाद टोल प्लाजा पर शांभवी पीठाधीश्वर एवं काली सेना प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप महाराज के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून के कुछ प्रावधानों को वापस लेने, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने और एससी-एसटी एक्ट में बदलाव की मांग उठाई।
प्रदर्शन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब छह घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी मौके पर डटे रहे, जिससे टोल प्लाजा के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
हालात को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में एडीएम ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता कर उनका ज्ञापन लिया और मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि जब तक यूजीसी से जुड़े विवादित प्रावधान वापस नहीं लिए जाते, आरक्षण व्यवस्था में सुधार नहीं होता और एससी-एसटी कानून में बदलाव नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की राजनीति बंद होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने आगामी चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों से दूरी बनाने की बात कहते हुए लोगों से तीसरे विकल्प पर विचार करने का आह्वान किया।
महासभा में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने, समान अवसर सुनिश्चित करने और आरक्षण व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए टोल प्लाजा को फ्री भी कर दिया।
दूसरी ओर हल्द्वानी के मंच शुद्धिकरण विवाद को लेकर प्रदेश की राजनीति में घमासान मचा रहा। कांग्रेस ने इस मुद्दे को दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच किया।
बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को बैरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया, जिसके चलते कई जगहों पर धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई कथित टिप्पणियां और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं।
वहीं उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने सरकार को संविधान विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने में विफल रही है।
मुख्यमंत्री आवास कूच में मसूरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस नेता सुमेन्द्र सिंह बोहरा और उनकी टीम भी शामिल हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, सम्मान और जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है।
उनके नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बारिश के बीच भी प्रदर्शन जारी रखा और हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण तथा राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर का विरोध किया।
कांग्रेस के प्रदर्शन के जवाब में भाजपा भी पूरी तरह सक्रिय नजर आई। देहरादून के गांधी पार्क में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश के मंत्री, विधायक, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर दलित समाज का अपमान करने और राजनीतिक लाभ के लिए सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि भाजपा का हल्द्वानी में हुए मंच शुद्धिकरण से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जिस स्थान पर कार्यक्रम हुआ था, वहां गंदगी फैली हुई थी और कुछ संगठनों ने सफाई अभियान चलाया था।
वहीं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कांग्रेस पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
हरिद्वार में भाजपा के धरने की एक और खास बात यह रही कि पार्टी के कई ऐसे नेता एक मंच पर दिखाई दिए, जिन्हें स्थानीय राजनीति में लंबे समय से एक-दूसरे का विरोधी माना जाता रहा है। मदन कौशिक, स्वामी यतीश्वरानंद, संजय गुप्ता और अन्य नेताओं की मौजूदगी को भाजपा की एकजुटता के संकेत के रूप में देखा गया।
गौरतलब है कि विवाद की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को हुई थी, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था।
इसके तीन दिन बाद उसी मंच का कुछ संगठनों द्वारा शुद्धिकरण किया गया, जिसके बाद कांग्रेस ने इसे दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए मुद्दा उठाया।
राहुल गांधी भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं और इसे दलित सम्मान से जुड़ा विषय बता चुके हैं। इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ हल्द्वानी में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेता गया।
कुल मिलाकर आरक्षण, यूजीसी कानून और हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद को लेकर सोमवार को उत्तराखंड की राजनीति पूरी तरह गर्म रही। हरिद्वार में सामाजिक संगठनों का आंदोलन, देहरादून में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन और उसके जवाब में भाजपा के धरनों ने साफ संकेत दिया कि प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।


