विशेष रिपोर्ट: बारिश का कहर! भीमताल में टैक्सी पर गिरा मलबा, पिथौरागढ़ में 24 सड़कें बंद, घरों में घुसा पानी

बारिश का कहर! भीमताल में टैक्सी पर गिरा मलबा, पिथौरागढ़ में 24 सड़कें बंद, घरों में घुसा पानी

देहरादून। उत्तराखंड में सितंबर की बारिश ने एक बार फिर पहाड़ से लेकर मैदान तक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश के बीच कहीं भूस्खलन से सड़कें बंद हैं तो कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ और कटाव का खतरा पैदा हो गया है।

भीमताल में पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में टैक्सी आने से बड़ा हादसा टल गया, जबकि पिथौरागढ़ में 24 मोटर मार्ग बंद हैं।

उधर नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से चमेलिया नदी का प्रवाह बाधित होने के बाद काली नदी के जरिए भारतीय सीमावर्ती इलाकों में संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है।

बाजपुर में रेबड़ा नदी के उफान से कई घरों में तीन से चार फीट तक पानी घुस गया, वहीं टिहरी के भिगुन गांव में भूस्खलन से कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है।

भीमताल में टैक्सी के सामने गिरा पहाड़ का मलबा, बाल-बाल बचे यात्री

नैनीताल जिले के भीमताल में हल्द्वानी रोड पर बोहराकुन के पास पहाड़ी से अचानक भारी मलबा और बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे। इस दौरान हल्द्वानी से भीमताल की ओर आ रही एक टैक्सी मलबे की चपेट में आ गई। गनीमत रही कि टैक्सी में सवार सभी लोग सुरक्षित बच गए।

बताया जा रहा है कि पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भरभराकर टैक्सी के ठीक सामने गिरा। अगर मलबा कुछ दूरी आगे गिरता तो टैक्सी इसकी चपेट में आ सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था।

भूस्खलन के कारण मार्ग पर यातायात बाधित हो गया। प्रशासन ने सड़क से मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीन मौके पर भेजी है।

नेपाल में चमेलिया नदी का प्रवाह रुका, काली नदी के रास्ते भारत में बाढ़ का खतरा

उत्तराखंड की सीमा से लगे नेपाल के दार्चुला जिले के अपिहिमाल क्षेत्र के भट्टाड़ में भारी भूस्खलन से चमेलिया नदी का प्रवाह बाधित हो गया। पहाड़ी से भारी मलबा गिरने के बाद नदी के रास्ते में प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बनने से वहां कृत्रिम झील बन गई।

हालांकि दो दिन बाद झील का जलस्तर कम होने से फिलहाल स्थिति कुछ सामान्य हुई है, लेकिन क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा अभी भी बना हुआ है। आशंका है कि यदि लगातार बारिश के कारण फिर बड़ा भूस्खलन हुआ और नदी का प्रवाह दोबारा बाधित हुआ तो जमा पानी का दबाव बढ़ सकता है।

प्राकृतिक बांध टूटने की स्थिति में तेज बहाव चमेलिया के रास्ते काली नदी तक पहुंच सकता है, जिससे भारत के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

चमेलिया नदी भारत के गेठीगाड़ा क्षेत्र के पास काली नदी में मिलती है, जिसके बाद काली नदी झूलाघाट और पंचेश्वर की ओर बहती है। खतरे को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क किया है और भारतीय क्षेत्र में भी काली नदी के जलस्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।

दार्चुला में प्रभावित परिवार सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

भूस्खलन के खतरे को देखते हुए अपिहिमाल गांव पालिका के अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा और भट्टाड़ के वार्ड अध्यक्ष ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान घोरसाड में शिफ्ट कराया। उनके पालतू जानवरों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

सशस्त्र बल बलाच बेस कैंप के डीएसपी पुष्कर सिंह के नेतृत्व में जवानों की टीम भी मौके पर पहुंची और प्रभावित परिवारों को खाद्य सामग्री, कंबल, तिरपाल और दवाइयां वितरित कीं।

दार्चुला के मुख्य जिला अधिकारी वर्त राज पौडेल के अनुसार फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन बारिश के बीच खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

पिथौरागढ़ में 24 सड़कें बंद, चीन सीमा के रास्ते भी प्रभावित

सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले में 24 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं। चीन सीमा और कैलाश मानसरोवर-आदि कैलाश क्षेत्र को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग भी भूस्खलन से प्रभावित हैं।

तवाघाट-गुंजी मार्ग कई स्थानों पर मलबा आने के कारण बंद है। एस बैंड के पास सड़क का बड़ा हिस्सा वॉशआउट होने से मार्ग को जल्द खोलना चुनौती बना हुआ है। कई वाहन और यात्री गुंजी तथा धारचूला की ओर फंसे हुए हैं।

इसी तरह तवाघाट-सोबला मार्ग भी पंगबावे समेत कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण बंद है। कंज्योति-तवाघाट-नारायण आश्रम मोटर मार्ग का करीब 50 मीटर हिस्सा वॉशआउट होने से सीमांत क्षेत्र की आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर के मुताबिक जिले में दो दर्जन सड़कें बंद हैं और उन्हें खोलने का काम लगातार जारी है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

गोरी नदी का बढ़ा जलस्तर, मदकोट में भूकटाव का खतरा

मुनस्यारी के मदकोट क्षेत्र में गोरी नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण भूकटाव शुरू हो गया है। नदी किनारे कटाव बढ़ने से कई आवासीय भवनों पर खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक नदी का जलस्तर और बढ़ा तो कई मकान इसकी चपेट में आ सकते हैं। मदकोट स्थित शिशु मंदिर के भवन पर भी खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कर सुरक्षा दीवार और अन्य सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की है।

बागेश्वर में आठ सड़कें बंद

बागेश्वर जिले में भी लगातार बारिश और भूस्खलन से आठ ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं। मलबा और बोल्डर आने से इन सड़कों पर यातायात प्रभावित है। सरयू और गोमती नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। संबंधित विभाग सड़कों को खोलने के लिए मलबा हटाने और अस्थायी मरम्मत में जुटे हैं।

रामनगर में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ा, पुराने बाढ़ के रिकॉर्ड ने बढ़ाई चिंता

रामनगर में लगातार बारिश के बीच कोसी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ रहा है। बीते दिन नदी का बहाव 12 हजार क्यूसेक के पार पहुंच गया। इसके बाद नदी के आसपास और मैदानी इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

हालांकि इस साल अब तक कोसी का अधिकतम जलस्तर 47,154 क्यूसेक दर्ज किया गया है, लेकिन नदी का पुराना इतिहास लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।

वर्ष 2021 में कोसी करीब 1.60 लाख क्यूसेक के बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थी। उस दौरान रामनगर और आसपास के कई इलाकों में भारी तबाही हुई थी और प्रभावित लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर तक की मदद लेनी पड़ी थी।

वर्ष 1993 में भी कोसी का जलस्तर करीब 1.59 लाख क्यूसेक तक पहुंचा था। ऐसे में लगातार बारिश के बीच नदी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन और स्थानीय लोग नजर बनाए हुए हैं।

बाजपुर में बाढ़ जैसे हालात, घरों में घुसा तीन से चार फीट पानी

उधम सिंह नगर में बीती रात से हुई लगातार बारिश के बाद बाजपुर और जसपुर में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई। बाजपुर में रेबड़ा नदी के उफान पर आने से राजीव कॉलोनी और चकरपुर के कई घरों में तीन से चार फीट तक पानी घुस गया।

घर का सामान पानी में भीगकर खराब हो गया, जबकि कई दुकानों में भी पानी भरने से व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। नैनीताल हाईवे भी जलमग्न हो गया और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

जसपुर के गर्ग नहर रोड, आवास विकास और नई बस्ती समेत कई इलाकों में भी सड़कों पर पानी भर गया। नालियों और नालों के ओवरफ्लो होने से जल निकासी की समस्या और बढ़ गई।

पूर्व दर्जा मंत्री राजेश कुमार ने जलभराव को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की है। वहीं एसडीएम बाजपुर ऋचा सिंह ने बताया कि प्रभावित लोगों की सहायता की जा रही है और प्रशासन ने लोगों को अलर्ट किया है।

टिहरी के भिगुन गांव में भूस्खलन का खतरा, कई मकान जद में

टिहरी गढ़वाल के भिलंगना विकासखंड के भिगुन गांव में मूसलाधार बारिश के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। गांव को जोड़ने वाला मोटर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। पहाड़ी से लगातार मलबा और बड़े बोल्डर गिरने के कारण कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। क्षेत्रीय पटवारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया है, लेकिन ग्रामीण तत्काल सुरक्षात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि घनसाली से लगातार बारिश के कारण लैंडस्लाइडिंग की सूचना मिली है। एसडीएम की ओर से भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की संस्तुति की गई है और जल्द ही टीम भेजकर क्षेत्र का भू-सर्वेक्षण कराया जाएगा।

12 सितंबर तक बारिश से राहत के आसार कम

उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार 7 से 12 सितंबर तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। सोमवार 7 सितंबर को नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चमोली में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

8 और 9 सितंबर को भी राज्य में बारिश जारी रहने का अनुमान है। 10 सितंबर को देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। 11 और 12 सितंबर को भी राज्य के सभी जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।

लगातार बारिश, भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। प्रशासन और संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में जुटे हैं।