खास खबर: बारिश बनी मुसीबत! देहरादून में पानी-पानी, मसूरी रोड पर पहाड़ दरका, थराली में दलदल में फंसी कार

बारिश बनी मुसीबत! देहरादून में पानी-पानी, मसूरी रोड पर पहाड़ दरका, थराली में दलदल में फंसी कार

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर कहर बरपा रहा है। पहाड़ से लेकर मैदान तक लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जगह-जगह भूस्खलन, जलभराव और सड़क बाधित होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

नदी-नाले उफान पर हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा और बोल्डर गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।

मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तराखंड में आने वाले दिनों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है।

31 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। वहीं 1 सितंबर को देहरादून और टिहरी में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। 4 सितंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

5 जिलों में स्कूल बंद

भारी बारिश की आशंका और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। देहरादून में जिलाधिकारी ने जिले के सभी शासकीय, अशासकीय और निजी विद्यालयों में कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया है।

सभी आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। पौड़ी, अल्मोड़ा, नैनीताल और बागेश्वर प्रशासन की ओर से भी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर आदेश जारी किए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचें और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।

देहरादून में जलभराव, QRT टीमें मैदान में

राजधानी देहरादून में लगातार बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। जिलाधिकारी आशीष चौहान ने सभी संबंधित विभागों को फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।

जिले के सभी QRT नोडल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों के अलावा सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, ट्रैफिक पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की टीमें भी मौके पर स्थिति का जायजा ले रही हैं।

प्रशासन की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जलभराव या सड़क अवरोध की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पानी वाले बैंड पर भूस्खलन, एक घंटे ठप रहा मसूरी मार्ग

बारिश के बीच मसूरी-देहरादून मार्ग पर पानी वाले बैंड के पास भारी भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

भूस्खलन की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग की टीम जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सड़क से मलबा और बड़े पत्थर हटाए गए, जिसके बाद मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया। मार्ग खुलने के बाद जाम में फंसे वाहनों को धीरे-धीरे निकाला गया।

ज्वालापुर रेलवे स्टेशन के बाहर गिरा विशाल पेड़

हरिद्वार में भी भारी बारिश का असर देखने को मिला। रात के समय ज्वालापुर रेलवे स्टेशन के बाहर एक विशालकाय पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया। पेड़ की चपेट में आने से बिजली की तारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं।

गनीमत रही कि घटना के वक्त मौके पर ज्यादा भीड़ नहीं थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। रेलवे कर्मचारियों को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और पेड़ को काटकर रास्ते से हटाने का काम शुरू किया।

पेड़ गिरने के कारण कुछ समय तक आवाजाही प्रभावित रही और बिजली की तारें टूटने से आसपास अंधेरा छा गया। हालांकि घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

सीतापुर रेलवे फाटक पर वाहन की टक्कर, लगा लंबा जाम
हरिद्वार में ही रविवार शाम सीतापुर रेलवे फाटक पर एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में रेलवे फाटक क्षतिग्रस्त हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

सूचना मिलने पर रेलवे कर्मचारी मौके पर पहुंचे और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद फाटक की मरम्मत की गई। इसके बाद यातायात व्यवस्था को दोबारा सुचारु किया गया।

कुशा घाट बिजलीघर की छत टपकी

भारी बारिश के बीच कुशा घाट के पास बने बिजलीघर के कार्यालय की जर्जर छत से पानी टपकने लगा। कार्यालय के अंदर पानी आने से कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

कर्मचारियों का आरोप है कि भवन की छत कई वर्षों से जर्जर हालत में है और हर बारिश में इसी तरह पानी टपकता है। कर्मचारियों ने विभागीय अधिकारियों से भवन की छत की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।

थराली में सड़क बनी दलदल, फंसी कार

चमोली जिले के थराली विकासखंड की सोल घाटी में बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। थराली-डूंगरी मोटर मार्ग पर जगह-जगह दलदल बन गया है। इसी दलदल में एक अल्टो कार फंस गई।

कार को निकालने के लिए ग्रामीणों ने पिकअप वाहन से रस्सी बांधी और काफी मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला। यह सड़क सोल घाटी के करीब 16 गांवों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही सड़क की स्थिति बदतर हो जाती है। जगह-जगह मलबा और बड़े पत्थर जमा हो जाते हैं, जबकि कई हिस्सों में सड़क बहने से आवाजाही खतरनाक हो जाती है।

10 से 12 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क बंद होने की स्थिति में सोल घाटी के लोगों को तहसील मुख्यालय तक पहुंचने के लिए कई बार 10 से 12 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि थराली-डूंगरी मोटर मार्ग पीएमजीएसवाई के अधीन है, लेकिन बरसात में सड़क की हालत हर साल बिगड़ जाती है। उनका आरोप है कि सड़क खोलने के लिए पर्याप्त मशीनरी और संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार मार्ग को बहाल करने में लंबा समय लग जाता है।

नंदानगर से जोड़ने की कवायद भी अधूरी

सोल घाटी को नंदानगर से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण की कवायद लंबे समय से चल रही है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक तकनीकी अड़चनों के कारण काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की बाधाओं को दूर कर जल्द काम शुरू कराने की मांग की है।

फ्लैश फ्लड रिस्क फिलहाल ‘एरिया ऑफ कंसर्न’ शून्य
हालांकि 29 अगस्त की सुबह जारी फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन में उत्तराखंड के लिए फिलहाल ‘एरिया ऑफ कंसर्न’ शून्य बताया गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़क बाधित होने, नालों के उफान और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बनी हुई है।

मौसम की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र लगातार निगरानी कर रहे हैं। लोगों से खास तौर पर नदी-नालों, पुलों और संवेदनशील पहाड़ी मार्गों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

बारिश के दौरान इन सावधानियों का रखें ध्यान

  • अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।
  • निचले इलाकों, नदी-नालों और पुलों के आसपास न जाएं।
  • पानी से भरी सड़क पर वाहन लेकर जाने से बचें।
  • पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।
  • बिजली के टूटे तारों और खंभों से दूरी बनाए रखें।
  • बारिश के दौरान बिजली के उपकरणों को आवश्यकता न होने पर बंद रखें।
  • घर की नालियों और गटर को साफ रखें ताकि जलभराव न हो।
  • वाहन चलाते समय गति कम रखें और दृश्यता कम होने पर अतिरिक्त सावधानी बरतें।
  • मौसम खराब होने पर पर्वतीय क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा टालें।
  • किसी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन तंत्र को सूचना दें।