उत्तराखंड में चुनावी सरगर्मी तेज, सेवा संकल्प अभियान से बीजेपी मैदान में, कांग्रेस ने साधा निशाना
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अब सियासी गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं।
चुनाव में अभी समय है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने तरीके से जनता के बीच पकड़ मजबूत करने की कवायद में जुट गए हैं।
एक तरफ भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस लगातार धामी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने में जुटी है।
भाजपा के लिए सेवा संकल्प अभियान महज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़ा कार्यक्रम नहीं है।
चुनावी साल में शुरू हुआ यह अभियान पार्टी को सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और लाभार्थियों के जरिए जनता तक पहुंचने का अवसर भी दे रहा है। वहीं कांग्रेस इसे सरकार की नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने की कवायद बता रही है।
एक महीने तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उत्तराखंड में सेवा संकल्प अभियान का आगाज हुआ। भाजपा ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत 11 प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है।
इनमें विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, लाभार्थियों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
भाजपा का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार को केंद्र में रखते हुए लोगों को विकसित भारत 2047 के संकल्प से जोड़ना है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लोगों को हुए लाभ और बदलाव की कहानियों को भी सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
लेकिन राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस अभियान का समय काफी महत्वपूर्ण है। 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भाजपा को एक ऐसा मंच मिल रहा है, जिसके जरिए पार्टी सरकार की योजनाओं और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर सीधे जनता के बीच पहुंच सकती है।
क्या जनता की नब्ज टटोलने का मौका है अभियान?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक किसी भी चुनाव से पहले जनता के बीच लगातार संवाद बेहद महत्वपूर्ण होता है। सेवा संकल्प अभियान के दौरान भाजपा अलग-अलग वर्गों के लोगों से संपर्क करेगी।
ऐसे में पार्टी को सरकार की योजनाओं को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया जानने और स्थानीय स्तर पर उठ रहे मुद्दों की जानकारी हासिल करने का अवसर भी मिल सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र शेट्टी के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़ा है, लेकिन उत्तराखंड में इसका राजनीतिक महत्व अलग है। उनके अनुसार 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार और संगठन इस अभियान के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उनका कहना है कि विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने का उद्देश्य व्यापक जनसंवाद स्थापित करना भी हो सकता है।
हाल के महीनों में सामने आए विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के बीच भाजपा के लिए हर वर्ग तक पहुंच बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने बताया सेवा का अवसर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस अभियान को जनता से जुड़ने के अवसर के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल उत्सव नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक अभियान के दौरान विद्यार्थी, युवा, महिलाएं, लाभार्थी, सामाजिक संगठनों के लोग, महिला मंगल दल और जनप्रतिनिधियों समेत विभिन्न वर्गों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सरकार की कोशिश राज्य के सभी नागरिकों को इसमें सहभागी बनाने की है।
यही व्यापक जनसंपर्क आने वाले समय में भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
भाजपा के लिए चुनावी कैंपेन जैसा अवसर
भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार का कहना है कि सेवा संकल्प अभियान में किसी भी क्षेत्र और वर्ग को छोड़ा नहीं जाएगा।
उनके अनुसार अभियान में जनभागीदारी पर विशेष फोकस है और इससे आने वाले समय में जनसंवाद को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
यानी भाजपा के संगठनात्मक स्तर पर भी अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा है। अलग-अलग वर्गों के साथ संपर्क, सरकारी योजनाओं की जानकारी और जनता की प्रतिक्रिया ये सभी चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम हो सकते हैं।
कांग्रेस ने बताया ‘मेवा खाओ अभियान’
भाजपा जहां सेवा संकल्प अभियान को सेवा और जनभागीदारी से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस ने इस पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा के अभियान को ‘मेवा खाओ अभियान’ करार दिया है। उनका आरोप है कि सरकार जनता के सामने सेवा की बात कर रही है, जबकि राज्य में शिक्षा, भर्ती और एमबीबीएस प्रवेश से जुड़े कथित फर्जी प्रमाणपत्रों जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस का कहना है कि चुनावी साल में इस तरह के अभियान के जरिए सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है।
प्रीतम सिंह ने भी साधा निशाना
कांग्रेस के प्रदेश चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री प्रीतम सिंह ने भी भाजपा के सेवा संकल्प अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को सेवा अभियान चलाना ही था तो इसकी शुरुआत पहले की जा सकती थी।
प्रीतम सिंह का आरोप है कि चुनावी साल में सरकार जनता के बीच अपने खिलाफ उठ रहे सवालों और कथित असंतोष को कम करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम कर रही है। हालांकि, ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं और भाजपा इन्हें खारिज करती रही है।
भाजपा ने कांग्रेस पर किया पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने पलटवार किया। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक के सार्वजनिक जीवन में सत्ता को सेवा का माध्यम बनाने की बात पर जोर दिया है।
भाजपा का कहना है कि सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से जुड़ा कार्यक्रम है और इसका उद्देश्य देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ जनता को जोड़ना है।
धामी सरकार पर कांग्रेस के हमले, मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
इधर कांग्रेस लगातार राज्य सरकार को अलग-अलग मुद्दों पर घेर रही है। 17 सितंबर को कांग्रेस ने दिल्ली में छत्तीसगढ़ में अदाणी को दिए गए उत्तराखंड के कोल पावर प्लांट को लेकर सवाल उठाए थे।
18 सितंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस जिन मुद्दों को उठा रही है, वे उनके अनुसार तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
UIIDB की जमीन पर भी विवाद
कांग्रेस ने उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड यानी UIIDB को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। कांग्रेस का दावा था कि बोर्ड के जरिए हजारों बीघा सरकारी जमीन को कम कीमत पर दिए जाने की प्रक्रिया हुई है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि UIIDB का उद्देश्य राज्य में निवेश, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि अभी तक बोर्ड को 45 एकड़ जमीन भी नहीं मिली है।
कोल पावर प्लांट पर धामी का पलटवार
कोल पावर प्लांट के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के दौरान हुए ऊर्जा समझौतों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि पूर्व में हुए समझौतों के कारण उत्तराखंड को महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है, जबकि मौजूदा व्यवस्था राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार पीक समय में महंगी बिजली खरीदने की जरूरत को कम करने में यह व्यवस्था मदद कर सकती है और भविष्य में बिजली की उपलब्धता अधिक होने पर उसे बेचने का विकल्प भी रहेगा।
अंकिता भंडारी मामले पर भी कांग्रेस का हमला
कांग्रेस द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जाने के बीच मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस मामले में शुरुआत से कार्रवाई की गई और तीन दोषी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी और जांच चल रही है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।
सहसपुर सीट पर हरक सिंह रावत का बड़ा दावा
इधर कांग्रेस के भीतर भी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर दावेदारी का दौर शुरू हो चुका है। कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत लगातार सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
हरक सिंह रावत ने दावा किया है कि यदि कांग्रेस हाईकमान उन्हें सहसपुर से चुनाव लड़ाता है तो पार्टी यह सीट 20 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत सकती है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा पार्टी आलाकमान को बता दी है। हरक सिंह के मुताबिक उन्होंने क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का आकलन करने के बाद यह दावा किया है।
हालांकि, टिकट को लेकर अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान को करना है।
हरक सिंह का दावा सिर्फ सहसपुर तक सीमित नहीं
हरक सिंह रावत ने यह भी कहा कि सहसपुर से चुनाव लड़ने का प्रभाव आसपास की विधानसभा सीटों पर भी पड़ सकता है। उनका दावा है कि सहसपुर के साथ देहरादून और हरिद्वार जिले की कई सीटों पर भी उनका राजनीतिक प्रभाव है।
हरक सिंह रावत 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। हालांकि, कांग्रेस ने उन्हें 2022 विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया था। अब 2027 चुनाव से पहले उनका सहसपुर से चुनाव लड़ने का दावा पार्टी के भीतर टिकट को लेकर चल रही संभावित प्रतिस्पर्धा को भी सामने लाता है।
यमुना तट पर 2100 दीपों से भाजपा का जनसंपर्क संदेश
सेवा संकल्प अभियान के तहत विकासनगर के कालसी में यमुना तट पर भव्य दीपोत्सव का आयोजन भी किया गया। यमुना घाट पर 2100 दीप जलाए गए, जिससे पूरा तट रोशनी से जगमगा उठा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिपुर कालसी पहुंचकर मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण किया, हरिघाट का लोकार्पण किया और मां यमुना-कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया। इसके साथ ही ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम और यमुना आरती में भी हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कालसी और जौनसार-बावर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए सरकार काम कर रही है।
धार्मिक पर्यटन के जरिए स्थानीय रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने जौनसार-बावर क्षेत्र के विकास की चर्चा करते हुए हनोल मास्टर प्लान के लिए 150 करोड़ रुपये की स्वीकृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लाखामंडल सहित क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास पर भी सरकार ध्यान दे रही है।
सरकार का तर्क है कि पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, परिवहन और खान-पान जैसे क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
किशाऊ बांध भी बनेगा चुनावी विमर्श का हिस्सा
इसी बीच उत्तराखंड में किशाऊ बांध परियोजना को लेकर भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 15 सितंबर को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के बीच परियोजना को लेकर एमओयू हुआ।
टौंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध की ऊंचाई करीब 232.6 मीटर होगी। परियोजना की अनुमानित लागत 15,624 करोड़ रुपये है, जिसका करीब 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाना प्रस्तावित है।
परियोजना से 422 मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रावधान है, जिसमें उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को 211-211 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही गई है।
परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और यमुना बेसिन में जल उपलब्धता से जुड़े लाभ भी बताए गए हैं। लेकिन परियोजना के साथ विस्थापन और पुनर्वास की चुनौती भी जुड़ी है।
करीब 5500 लोगों के पुनर्वास की चुनौती
किशाऊ बांध परियोजना से उत्तराखंड के नौ और हिमाचल प्रदेश के आठ गांव प्रभावित होंगे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड के करीब 3406 और हिमाचल प्रदेश के 2092 लोगों का पुनर्वास किया जाना है।
इसके अलावा करीब 2500 हेक्टेयर वन भूमि परियोजना के लिए स्थानांतरित करने की आवश्यकता बताई गई है। उत्तराखंड के लिए इतनी बड़ी मात्रा में क्षतिपूरक वनरोपण के लिए जमीन उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती होगी।
यही वजह है कि परियोजना के साथ पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन को लेकर टिहरी बांध से मिले अनुभवों की चर्चा भी हो रही है।
टिहरी से सबक, किशाऊ में ‘पहले पुनर्वास, फिर निर्माण’ पर जोर
टिहरी बांध परियोजना के विस्थापन और पुनर्वास को लेकर लंबे समय तक सवाल उठते रहे हैं। जमीन के मूल्यांकन, पुनर्वास स्थलों की सुविधाओं, आजीविका और सामाजिक ताने-बाने से जुड़े मुद्दे सामने आए थे।
किशाऊ परियोजना में प्रभावित परिवारों के लिए भूमि के बदले भूमि, वैकल्पिक कृषि भूमि, विकसित प्लॉट और मुआवजे सहित कई प्रावधानों की बात कही गई है। LARR Act 2013 के तहत रोजगार या एन्युटी, आवास, परिवहन और आजीविका से जुड़ी सहायता जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं।
नीति में वयस्क महिलाओं और अविवाहित बेटियों को अलग इकाई के रूप में अधिकार देने तथा दोनों राज्यों के प्रभावित परिवारों के लिए समान पैकेज की व्यवस्था का भी उल्लेख है।
हालांकि, इस पूरी व्यवस्था की वास्तविक सफलता उसके जमीन पर लागू होने, समय पर मुआवजा मिलने और पुनर्वास स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने पर निर्भर करेगी।
अब असली परीक्षा जनसंवाद की
उत्तराखंड की राजनीति में फिलहाल तीन समानांतर तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। भाजपा सेवा संकल्प अभियान के जरिए अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने में जुटी है।
कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुद्दों को लगातार उठाकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं दोनों दलों के नेता 2027 के लिए अपने संगठन और संभावित उम्मीदवारों को सक्रिय कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकार नीरज कोहली के मुताबिक सरकार और संगठन चुनावी मोड में आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार सेवा संकल्प अभियान भाजपा को जनता से संवाद करने, सरकारी योजनाओं पर प्रतिक्रिया लेने और जमीनी स्तर के मुद्दों को समझने का अवसर दे सकता है।
हालांकि, किसी भी अभियान की शुरुआत में उसकी चुनावी सफलता तय नहीं की जा सकती। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जनता अभियान को किस रूप में लेती है और सरकार की योजनाओं तथा स्थानीय मुद्दों पर उसकी प्रतिक्रिया क्या रहती है।
युवाओं पर रहेगा विशेष फोकस
2027 के चुनाव को देखते हुए युवा मतदाताओं तक पहुंच राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र रहेगा। सेवा संकल्प अभियान में विद्यार्थियों और युवाओं को विशेष रूप से शामिल किया जाना इसी दिशा में देखा जा रहा है।
आने वाले महीनों में रोजगार, भर्ती, शिक्षा, पलायन, निवेश, महंगाई, बिजली, भूमि, भ्रष्टाचार के आरोप, धार्मिक पर्यटन और विकास जैसे मुद्दे चुनावी विमर्श में प्रमुखता पा सकते हैं।
सितंबर-अक्टूबर में तय होगी राजनीतिक जमीन
कुल मिलाकर सितंबर-अक्टूबर 2026 का दौर उत्तराखंड की राजनीति में गतिविधियों से भरा रहने वाला है। भाजपा सेवा संकल्प अभियान के जरिए सरकार और संगठन के काम को जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटी है।
हरक सिंह रावत की सहसपुर से दावेदारी, धामी सरकार पर कांग्रेस के लगातार हमले, मुख्यमंत्री के पलटवार और किशाऊ जैसी बड़ी परियोजनाओं के साथ जुड़े विकास तथा पुनर्वास के सवाल आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि जनता इन अभियानों, सरकारी दावों, विपक्ष के आरोपों और स्थानीय मुद्दों को किस तरह देखती है और आने वाले महीनों में राजनीतिक दल जनता से मिले फीडबैक के आधार पर अपनी रणनीति में क्या बदलाव करते हैं।


