विशेष रिपोर्ट: बारिश का कहर! कहीं कार खाई में गिरी, कहीं सड़कें बंद। अधूरे पुल और गड्ढों ने बढ़ाई मुश्किलें

बारिश का कहर! कहीं कार खाई में गिरी, कहीं सड़कें बंद। अधूरे पुल और गड्ढों ने बढ़ाई मुश्किलें

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ से मैदान तक जनजीवन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहाड़ी जिलों में भूस्खलन और बोल्डर गिरने से सड़कें बार-बार बंद हो रही हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कें और गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं।

उत्तरकाशी में मनेरा बाईपास पर भूस्खलन की चपेट में आकर एक कार खाई में जा गिरी। वहीं चमोली के नंदानगर क्षेत्र में पहाड़ी टूटने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई। नौगांव में अधूरा मोटर पुल ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

मनेरा बाईपास पर भूस्खलन की चपेट में आई कार

उत्तरकाशी के मनेरा बाईपास पर पिछले कई दिनों से पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं। मंगलवार को अचानक भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर सड़क पर गिरने लगे।

खतरा भांपकर कार सवार समय रहते वाहन छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चला गया। कुछ ही देर बाद मलबे की चपेट में आने से कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे खाई में जा गिरी।

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने संवेदनशील हिस्सों का निरीक्षण कराने, सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने और खतरे वाले स्थानों पर यातायात नियंत्रित करने की मांग की है।

एक साल से अधूरा पुल, जान जोखिम में डालकर आवाजाही

नौगांव विकासखंड के कुपड़ा-कुंशाला-त्रिखीली मोटर मार्ग पर गड़गाड़ में निर्माणाधीन मोटर पुल भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक साल बीतने के बाद भी पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। सड़क की स्थिति भी खराब है और लोगों को अस्थायी रास्तों से आवाजाही करनी पड़ रही है।

इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पुल और सड़क का काम जल्द पूरा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

चमोली में पहाड़ी टूटने से नंदानगर मार्ग बंद

चमोली में भी बारिश के बीच भूस्खलन ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नंदानगर जाने वाले मार्ग पर थिरपाक-छीड़िया के पास मंगलवार दोपहर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। भारी मात्रा में चट्टान, मलबा और बोल्डर आने से मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।

सड़क बंद होने से कई वाहन और यात्री रास्ते में फंस गए। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी से दोबारा पत्थर गिरने का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने सड़क से मलबा हटाकर यातायात जल्द बहाल करने की मांग की है।

गड्ढों ने मैदानी इलाकों में बढ़ाया हादसों का खतरा

बारिश का असर केवल पहाड़ी सड़कों तक सीमित नहीं है। देहरादून समेत मैदानी इलाकों में जगह-जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और गड्ढे राहगीरों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

बारिश के पानी में गड्ढे दिखाई नहीं देने के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने 21 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश से नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

छह महीने में सड़क हादसों में 235 मौतें

उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 16 अगस्त 2026 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में **235 लोगों की मौत** हुई है, जबकि **854 लोग घायल** हुए और **9 लोग लापता** बताए गए हैं। ऐसे में खराब सड़कें, गड्ढे, भूस्खलन और चालक की लापरवाही सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

वर्षवार आंकड़ों के मुताबिक 2019 में सड़क दुर्घटनाओं में 866 लोगों की मौत हुई थी। 2020 में 674, 2021 में 820, 2022 में 1042, 2023 में 1054, 2024 में 1090 और 2025 में 1242 लोगों की जान सड़क हादसों में गई।

मौसम सुधरने पर गड्ढे भरने की कवायद

लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडे के मुताबिक लगातार बारिश के कारण सड़कों की मरम्मत में दिक्कत आ रही है।

बड़े गड्ढों में फिलहाल टाइल्स और छोटे गड्ढों में सड़क निर्माण सामग्री भरकर लोगों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मॉनसून के बाद सड़कों का स्थायी रूप से सुधार किया जाएगा।

विभाग के अनुसार **15 सितंबर के बाद प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान शुरू किया जाएगा** और करीब एक महीने में इसे पूरा करने का लक्ष्य है।

परिवहन विभाग के अपर आयुक्त सनत कुमार सिंह ने भी माना कि सड़क की खराब स्थिति, गड्ढे, सड़क का ऊबड़-खाबड़ होना और क्रैश बैरियर जैसी कमियां दुर्घटनाओं में भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन भी हादसों का बड़ा कारण है।

बारिश, भूस्खलन, अधूरे निर्माण और खराब सड़कों की यह स्थिति एक साथ सामने आने से उत्तराखंड में यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब चुनौती बारिश के बीच रास्ते खुले रखने के साथ-साथ संवेदनशील मार्गों और निर्माणाधीन परियोजनाओं में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।