बिग ब्रेकिंग: मासूम की हत्या में 2018 की सजा रद्द, आरोपी बरी। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में आरोपी गिरफ्तार

मासूम की हत्या में 2018 की सजा रद्द, आरोपी बरी। नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड में बच्चों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में अदालत और पुलिस की कार्रवाई सामने आई है। एक ओर नैनीताल हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 में 7 वर्षीय मासूम की कथित यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में निचली अदालत से सुनाई गई सजा को रद्द करते हुए आरोपी अमित कौशल को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।

वहीं, दूसरी ओर हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र में नाबालिग बच्चे के साथ दुष्कर्म और मारपीट के आरोप में पुलिस ने 40 वर्षीय मोहम्मद आजम उर्फ अफजल को गिरफ्तार किया है।

2013 के मासूम हत्याकांड में आरोपी बरी

पहला मामला 23 अगस्त 2013 का है। देहरादून जिले के डोईवाला क्षेत्र से 7 वर्षीय पुन्नू अचानक लापता हो गया था।

अगले दिन बच्चे का शव आरोपी के पारिवारिक परिसर में खड़ी एक एस्टीम कार से बरामद हुआ था। इसके बाद पीड़ित पिता की तहरीर पर पुलिस ने हत्या, साक्ष्य मिटाने समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के बाद पुलिस ने अमित कौशल को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की। देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट/विशेष पॉक्सो अदालत ने अप्रैल 2018 में उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302, 377, 201 और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने की। बचाव पक्ष की अधिवक्ता ममता बिष्ट ने अदालत में दलील दी कि अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और आरोपी के खिलाफ अपराध में प्रत्यक्ष सहभागिता साबित नहीं हुई है।

कार और फोरेंसिक साक्ष्य पर उठे सवाल

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि जिस कार से बच्चे का शव बरामद हुआ, उसका मालिकाना हक केवल आरोपी के पास था। पुलिस जांच के दौरान कार की चाबी भी आरोपी के पास नहीं बल्कि परिवार की अन्य सदस्य, उसकी मां के पास थी।

इसके अलावा, फोरेंसिक जांच में कार की सीट या कवर पर खून अथवा कथित दुष्कर्म से संबंधित कोई अंश नहीं मिला। अदालत ने यह भी माना कि केवल संयुक्त पारिवारिक परिसर में खड़ी कार से शव मिलने के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 का इस्तेमाल अभियोजन की कमजोरियों को दूर करने के लिए नहीं किया जा सकता।

सभी गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2018 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया और अमित कौशल को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने उसे तत्काल जेल से रिहा करने के आदेश दिए, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।

हल्द्वानी में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तारी

दूसरा मामला हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र का है, जहां नाबालिग बच्चे के साथ दुष्कर्म और मारपीट के आरोप में पुलिस ने मोहम्मद आजम उर्फ अफजल को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित बच्चे की मां ने शिकायत दी थी कि अब्दुल्ला पेट्रोल पंप के पास ईंटों के चट्टे के पीछे मोहम्मद आजम ने उसके नाबालिग पुत्र के साथ दुष्कर्म और मारपीट की। शिकायत के आधार पर थाना मुखानी में FIR संख्या 126/2026 दर्ज की गई।

मामले में BNS की धारा 115(2), 137(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना उप निरीक्षक दीपा जोशी को सौंपी गई है।

एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए तत्काल कार्रवाई की और 13 अगस्त को मोहम्मद आजम उर्फ अफजल (40) को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक आरोपी मूल रूप से ग्राम कायमगंज, तहसील बिलासपुर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और वर्तमान में भूरा मुल्ला, अब्दुल्ला पेट्रोल पंप के पास, मुखानी थाना क्षेत्र में रह रहा था।

बच्चों के खिलाफ अपराध पर जीरो टॉलरेंस

एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी ने कहा कि नाबालिग बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति है और आरोपियों के खिलाफ त्वरित एवं कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

दोनों मामलों में कार्रवाई का स्वरूप अलग है। एक पुराने मामले में हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की कमी के आधार पर दोषसिद्धि को पलटते हुए आरोपी को बरी किया है, जबकि दूसरे मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर पॉक्सो समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है।