बिग ब्रेकिंग: हाईकोर्ट सख्त। 2,500 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे, उपनल नियमितीकरण पर सरकार से फिर जवाब तलब

हाईकोर्ट सख्त। 2,500 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे, उपनल नियमितीकरण पर सरकार से फिर जवाब तलब

  • सरकारी स्कूलों की बदहाली पर ताजा रिपोर्ट मांगी, उपनल अवमानना मामले में 10 सितंबर को तीन सचिव होंगे कोर्ट में पेश

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया।

एक ओर सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति पर सरकार से ताजा आंकड़े पेश करने के निर्देश दिए, वहीं उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े अवमानना मामले में सरकार को नया शपथ पत्र दाखिल करने की अनुमति देते हुए तीन वरिष्ठ सचिवों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए।

2,500 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे, 270 में पेयजल तक नहीं

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2024 के आंकड़ों पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि पुराने आंकड़ों के आधार पर सुनवाई नहीं हो सकती और सरकार वर्तमान स्थिति का विस्तृत शपथ पत्र जल्द दाखिल करे।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि राज्य के करीब 2,500 प्राथमिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि 270 स्कूलों में पेयजल की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 250 विद्यालयों के भवन जर्जर हालत में हैं, जिनका मरम्मत कार्य बजट के अभाव में लंबित है।

यह जनहित याचिका वर्ष 2024 में पिथौरागढ़ निवासी डॉ. राजेश पांडे ने दायर की थी। बाद में देहरादून निवासी रवींद्र सिंह मेहरा ने भी नई याचिका दाखिल कर शिक्षकों की नियुक्ति और जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण की मांग की।

उपनल मामले में सरकार को 27 अगस्त तक का समय

दूसरी ओर, उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) कर्मचारी संघ की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई में सरकार ने पहले से दाखिल शपथ पत्र वापस लेते हुए नया शपथ पत्र दाखिल करने के लिए 27 अगस्त तक का समय मांगा।

न्यायालय ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 10 सितंबर को तय की। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार से पूछा कि आखिर कोर्ट के आदेशों का पालन बार-बार क्यों नहीं किया जा रहा है।

उपनल कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि न्यायालय के निर्देशों के विपरीत कर्मचारियों से नए अनुबंध भरवाए जा रहे हैं।

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पैरवी करते हुए समय की मांग की। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने अगली सुनवाई पर सचिव कार्मिक एवं सतर्कता शैलेश बगौली, सचिव वित्त दिलीप जावलकर और सचिव सैनिक कल्याण युगल पंत को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए।

उपनल कर्मचारी संघ का कहना है कि वर्ष 2018 में हाईकोर्ट और वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नियमितीकरण का आदेश अब तक लागू नहीं किया गया है। करीब 22 हजार उपनल कर्मचारियों की नजर अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।