बिग ब्रेकिंग: बनबसा अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट सख्त, 488 कब्जाधारियों के दस्तावेजों की दोबारा होगी जांच

बनबसा अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट सख्त, 488 कब्जाधारियों के दस्तावेजों की दोबारा होगी जांच

नैनीताल। Uttarakhand High Court ने चंपावत जिले के बनबसा क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर हुए अतिक्रमण मामले में सख्त रुख अपनाया है।

गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के सचिव को अतिक्रमणकारियों के मामलों की दोबारा सुनवाई कर छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई अब छह सप्ताह बाद होगी। इससे पहले हाईकोर्ट ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया था कि वन भूमि पर कब्जा करने वाले लोगों को नोटिस जारी कर उनके दस्तावेजों की जांच की जाए और अवैध पाए जाने पर हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए।

कोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी अतिक्रमणकारियों को दस्तावेजों सहित पेश होने को कहा था।

जांच में कुल 488 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए थे, जिनमें से केवल 314 लोगों ने अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए। विभागीय जांच में इनमें से 174 लोगों के दस्तावेज अवैध पाए गए, जिसके बाद उन्हें भूमि खाली करने का नोटिस जारी किया गया।

हालांकि, कोर्ट ने अब इन दस्तावेजों का पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिन लोगों ने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार को इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो, तो Uttarakhand सरकार पूरा सहयोग उपलब्ध कराए।

यह जनहित याचिका चंपावत निवासी Bahadur Singh Patni द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि बनबसा क्षेत्र में वन विभाग की भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के कारण बाजार क्षेत्र और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

कई बार जाम लगने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।