बिग ब्रेकिंग: सुप्रीम कोर्ट में कई संवेदनशील मामलों पर बड़ी सुनवाई। आप भी पढ़ें….

सुप्रीम कोर्ट में कई संवेदनशील मामलों पर बड़ी सुनवाई। आप भी पढ़ें….

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों कई अहम मामलों में सख्त टिप्पणियां और महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए साफ कर दिया कि कानून का दुरुपयोग कर संपत्ति, सरकारी नौकरी या संस्थागत लाभ हासिल करने की कोशिश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

अदालत ने बेनामी संपत्ति, फर्जी पहचान से सरकारी नौकरी, ड्रग नेटवर्क, ऐतिहासिक धरोहरों की बदहाली और विशेष कानूनों के लंबित मामलों पर केंद्र और राज्यों को कड़े निर्देश दिए।

सबसे अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेनामी लेन-देन में खरीदी गई संपत्ति पर केवल नाममात्र के मालिक द्वारा बनाई गई वसीयत के आधार पर मालिकाना हक का दावा नहीं किया जा सकता।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि वसीयत का इस्तेमाल ‘बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम, 1988’ की कानूनी रोक को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी व्यावसायिक अनुबंध के तहत दूसरे व्यक्ति के पैसों से खरीदी गई संपत्तियां “फिड्यूशियरी रिलेशनशिप” की श्रेणी में नहीं आएंगी और ऐसी संपत्तियां केंद्र सरकार द्वारा जब्त की जा सकती हैं।

इसी क्रम में अदालत ने झारखंड और बिहार पुलिस में अलग-अलग पहचान के जरिए दोहरी नौकरी पाने वाले कांस्टेबल के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी, विशेषकर पुलिस सेवा, को धोखाधड़ी का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता।

अदालत ने उसकी बर्खास्तगी बहाल करते हुए टिप्पणी की कि कानून लागू करने वालों द्वारा ही फर्जी दस्तावेजों और प्रतिरूपण का इस्तेमाल करना कानून के शासन को कमजोर करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने NDPS और UAPA जैसे विशेष कानूनों के मामलों में लंबित ट्रायल को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों की संख्या के आधार पर विशेष अदालतें स्थापित की जाएं, जहां केवल ऐसे मामलों की सुनवाई हो।

अदालत ने यह भी कहा कि इन अदालतों में ट्रायल दिन-प्रतिदिन के आधार पर चलें और हर महीने कम से कम एक मामले का निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

पंजाब में बढ़ते ड्रग नेटवर्क पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि पुलिस केवल छोटे ड्रग पेडलरों को पकड़कर प्रचार कर रही है, जबकि “बड़े मगरमच्छ” खुले घूम रहे हैं। कोर्ट ने राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तंत्र विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों की बदहाली पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने दिल्ली गोल्फ क्लब और अन्य निजी संस्थाओं को ऐतिहासिक स्मारकों को लीज पर दिए जाने पर हैरानी जताई और कहा कि कई संरक्षित इमारतें अतिक्रमण, चोरी और उपेक्षा का शिकार हैं।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित SHO के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा सुप्रीम Court ने अप्रैल और मई 2026 के दौरान कई महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत भी स्पष्ट किए। अदालत ने दोहराया कि वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल राजस्व रिकॉर्ड से जमीन का मालिकाना हक साबित नहीं होता, जमानत की शर्त के रूप में आरोपी को संपत्ति बेचने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और केवल गाली-गलौज को IPC की धारा 294 के तहत अश्लीलता नहीं माना जा सकता।

इन फैसलों और टिप्पणियों से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट अब कानून के दुरुपयोग, संस्थागत भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की दिशा में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है।