RTI खुलासा: बेदखली वादों का ‘वनवास’, 1989 के केस आज भी फाइलों में कैद

बेदखली वादों का ‘वनवास’, 1989 के केस आज भी फाइलों में कैद

चम्पावत। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी में पूर्णागिरि (टनकपुर) उप जिलाधिकारी कार्यालय से राजस्व न्याय व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है।

समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया को प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार तहसील खटीमा में वर्ष 1989, 1992 और 1993 में दर्ज बेदखली वाद आज तक पूरी तरह निस्तारित नहीं हो सके हैं।

सूचना के मुताबिक बेदखली वाद संख्या 22/17 सन् 1993-94, वाद संख्या 22/11 सन् 1992-93 तथा वाद संख्या 22/108 सन् 1989-90 अब भी लंबित हैं।

कई मामलों में तहसीलदार स्तर पर आख्या और क्षतिपूर्ति संबंधी कार्रवाई जारी बताई गई है। दशकों पुराने मामलों के लंबित रहने से राजस्व न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त सूचना में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में न्यायालय उप जिलाधिकारी/विहित प्राधिकारी पूर्णागिरि द्वारा कुल 197 दिवस न्यायिक कार्य संपादित किए गए।

वहीं कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्यालय ने “सूचना कार्यालय में धारित नहीं है” कहकर जवाब दिया, जिससे रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठने लगे हैं।

आरटीआई के जरिए प्राप्त मासिक विवरण पत्र में तहसील पूर्णागिरि (टनकपुर) में राजस्व वादों की बड़ी संख्या लंबित पाई गई। भू-गृहादि वाद, धारा 229 बी, 131 बी, स्टाम्प वाद समेत कई मामलों में वर्षों से निस्तारण नहीं हो पाया है। कई प्रकरण छह माह से अधिक पुराने होने के बावजूद तय मानकों के अनुरूप निपटाए नहीं गए।

सूचना में यह भी उजागर हुआ कि अदम पैरवी, गुण-दोष, पुनर्स्थापना और अपीलीय न्यायालय से प्राप्त मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया भी बेहद धीमी गति से चल रही है। इससे आम लोगों को लंबे समय तक न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।

समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने कहा कि यदि राजस्व न्यायालयों में 30-30 वर्ष पुराने मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर विषय है।

उन्होंने ऐसे मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि लंबित मामलों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम जनता की सबसे बड़ी ताकत है और इसके माध्यम से सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को लगातार जनता के सामने लाया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

प्रमुख खुलासे एक नजर में

  • वर्ष 1989, 1992 और 1993 के बेदखली वाद अब तक लंबित।
  • कई सूचनाओं पर विभाग का जवाब- “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं”।
  • वर्ष 2023 में केवल 197 दिवस न्यायिक कार्य संपादित।
  • राजस्व न्यायालयों में बड़ी संख्या में पुराने वाद लंबित।
  • निस्तारण प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल।
  • आरटीआई से न्यायिक एवं प्रशासनिक लापरवाही उजागर।