ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की निष्क्रियता, सीएम पोर्टल की शिकायतें भी ठंडे बस्ते में
चम्पावत। प्रदेश में अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खा रही। खासतौर पर पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र में अतिक्रमण के मामलों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक ओर सरकार “अतिक्रमण मुक्त प्रदेश” का नारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग जिलों में कार्रवाई के अलग-अलग मापदंड देखने को मिल रहे हैं। कई जगहों पर जहां तेजी से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, वहीं चम्पावत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है।
ग्रामीण इलाकों में राजस्व भूमि और सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण की शिकायतों के बावजूद न तो प्रभावी कार्रवाई हो रही है और न ही पुराने मामलों का समाधान। स्थिति यह है कि सीएम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को केवल औपचारिकता निभाते हुए निस्तारित कर दिया जाता है।
कई मामलों में शिकायतों का निपटारा यह कहकर कर दिया गया कि अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, लेकिन वर्षों बाद भी जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिखा।
वहीं कुछ मामलों में तो शिकायत के बावजूद अतिक्रमण को होने दिया गया, जिससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कुछ मामलों में शिकायतकर्ताओं की पहचान अतिक्रमणकारियों तक पहुंचा दी गई, जिससे उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा।
इन परिस्थितियों में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन अतिक्रमण के मामलों में लापरवाही बरत रहा है या फिर मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के कारण कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है।
प्रदेशभर में एक समान नीति और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग अब जोर पकड़ती जा रही है।

