नारी शक्ति वंदन बिल पर सियासी घमासान। सीएम धामी ने विपक्ष को घेरा, कांग्रेस ने किया पलटवार
देहरादून। संसद में Nari Shakti Vandan Amendment Act को लेकर पैदा हुआ गतिरोध अब सियासी टकराव में बदल गया है।
केंद्र सरकार और भाजपा जहां बिल के पास न हो पाने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं उत्तराखंड कांग्रेस ने इसे लेकर भाजपा और प्रधानमंत्री पर तीखा पलटवार किया है। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में भी गर्माहट ला दी है।
उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Ganesh Godiyal ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने के लिए पहले से ही नैरेटिव तैयार कर रही थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिल संसद में गिरा, उसी समय भाजपा महिला सांसदों के पास विरोध की तख्तियां कैसे मौजूद थीं। उनके मुताबिक यह दर्शाता है कि भाजपा पहले से इस स्थिति के लिए तैयार थी और संभवतः बिल को गिराने की रणनीति का हिस्सा था।
गोदियाल ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बिल पास कराना चाहती, तो वह राजनीतिक स्तर पर प्रयास कर समर्थन जुटा सकती थी।
उन्होंने भाजपा पर उद्योगपतियों के मुद्दों पर सक्रियता दिखाने और महिलाओं के सवाल पर गंभीर न होने का आरोप भी लगाया। गोदियाल ने कहा कि अब जनता भाजपा की “चाल और चरित्र” को समझ चुकी है और इस तरह के राजनीतिक नैरेटिव का असर पहले जैसा नहीं रहेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश जैसे गंभीर मंच का इस्तेमाल विपक्ष पर हमला करने के लिए किया, जो परंपराओं के विपरीत है।
वहीं उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष Govind Singh Kunjwal ने केंद्र सरकार पर महिलाओं के मुद्दे पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही महिला आरक्षण की पक्षधर रही है और 2023 में संसद के दोनों सदनों में इस बिल को पारित कराने में विपक्ष ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कुंजवाल ने सवाल उठाया कि 33 प्रतिशत आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान को लागू करने में देरी क्यों की गई और इसे जनगणना तथा परिसीमन से क्यों जोड़ा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी कर चुनावी लाभ लेने की कोशिश की और परिसीमन के जरिए राजनीतिक समीकरण साधने की रणनीति बनाई जा रही थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे तथ्यों को समझें और किसी भी भ्रामक प्रचार से सावधान रहें।
दूसरी ओर, Pushkar Singh Dhami ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण बिल को रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सीधा प्रहार बताया।
धामी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल आम महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते, जबकि उनके अपने परिवारों की महिलाएं पहले से ही सत्ता और राजनीति में स्थापित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बिल महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता था, जिससे उनकी भागीदारी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होती। उन्होंने विपक्ष को इस अवसर को गंवाने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण को लेकर देशभर में सियासी माहौल गरमा गया है। एक ओर भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार की मंशा और रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है।
ऐसे में नारी शक्ति वंदन बिल अब केवल एक विधायी मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

