बिग ब्रेकिंग: ‘सिंगल ब्लो’ केस में बड़ी राहत। हाईकोर्ट ने रद्द की 307 की सजा, आरोपी रिहा

‘सिंगल ब्लो’ केस में बड़ी राहत। हाईकोर्ट ने रद्द की 307 की सजा, आरोपी रिहा

नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास (IPC 307) से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी हरीलाल को बड़ी राहत दी है।

न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 8 वर्ष की सजा को रद्द करते हुए कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि मामूली विवाद के दौरान अचानक हुए गुस्से का परिणाम थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जून 2020 का है, जब रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ क्षेत्र में मोबाइल फोन पर संगीत बजाने को लेकर विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर हरीलाल ने परमेश्वर नामक व्यक्ति के पेट पर चाकू से वार कर दिया।

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 326 (गंभीर चोट) के तहत दोषी ठहराते हुए 8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने मामले के साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए पाया कि:

  • आरोपी द्वारा केवल एक ही वार किया गया
  • घटना पूर्व नियोजित नहीं थी
  • वार के बाद आरोपी मौके से भाग गया
  • गवाहों के बयान कमजोर पड़े और कुछ मुकर गए
  • प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई

अदालत ने कहा कि धारा 307 के तहत सजा के लिए हत्या का स्पष्ट इरादा या जानकारी होना आवश्यक है, जो इस मामले में साबित नहीं हो पाया।

सजा में क्या बदलाव हुआ?

हाईकोर्ट ने IPC 307 के तहत दी गई सजा को रद्द कर दिया, जबकि IPC 326 के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

अदालत ने सजा को पहले ही जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दिया और निर्देश दिया कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। जुर्माने की राशि यथावत रखी गई है।

शराब की दुकान आवंटन पर भी हाईकोर्ट सख्त

इसी दौरान शराब की दुकान आवंटन से जुड़े एक अन्य मामले में भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
याचिकाकर्ता बलवंत सिंह ने अदालत में कहा कि उन्हें नियमानुसार शराब की दुकान का लाइसेंस मिला है, लेकिन स्थानीय विरोध और प्रशासनिक असहयोग के कारण वह दुकान शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने आबकारी आयुक्त को 21 अप्रैल को वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होकर राज्य की शराब नीति पर जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, रातीघाट क्षेत्र में सुरक्षा की मांग को लेकर दायर एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने जिला प्रशासन को नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।