भूमि बचाओ-धामी हटाओ अभियान से कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, हरक सिंह रावत के पारिवारिक विवाद से बनाई दूरी
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ जमीनों के कथित बंदरबांट के मुद्दे पर मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। पार्टी 4 नवंबर से प्रदेशभर में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान शुरू करने जा रही है।
इसके लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों और महानगरों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वहीं, दूसरी ओर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत से जुड़े पारिवारिक और संपत्ति विवाद पर पार्टी ने अपना पल्ला झाड़ते हुए इसे उनका निजी मामला बताया है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है और न ही इससे संगठन को कोई नुकसान होने वाला है।
सरकारी जमीनों के मुद्दे पर धामी सरकार को घेरेगी कांग्रेस
दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अध्यक्षता में उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक हुई।
बैठक के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर 4 नवंबर से प्रदेश के सभी जिलों और महानगरों में भूमि बचाओ-धामी हटाओ अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
अभियान के तहत कांग्रेस प्रदेश में सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों की जमीनों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। पार्टी ने अलग-अलग स्थानों पर जमीनों से जुड़े मामलों को उठाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी नियुक्त किया है।
नैनीताल जिले में पटवाडांगर निरीक्षण भवन और जोलीकोट की संपत्ति को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सीडब्ल्यूसी सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल और जिला अध्यक्ष को जिम्मेदारी दी गई है।
अल्मोड़ा जिले में निरीक्षण भवन अल्मोड़ा और कटारमाल के लिए विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और जिला अध्यक्ष को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रानीखेत के चौबटिया उद्यान पार्क निरीक्षण भवन के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, जबकि हल्द्वानी में एचएमटी रानीबाग की जमीन को लेकर विधायक तिलकराज बेहड़, विधायक सुमित हृदयेश और महानगर अध्यक्ष को जिम्मेदारी दी गई है।
भीमताल से रामगढ़ की भूमि के मामले में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक आदेश चौहान को जिम्मेदारी मिली है।
देहरादून जिले में आईडीपीएल ऋषिकेश की लगभग 633 एकड़ भूमि को लेकर डॉ. हरक सिंह रावत के साथ जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष अभियान की जिम्मेदारी संभालेंगे।
विकासनगर क्षेत्र में डाकपत्थर की करीब 180 एकड़ भूमि के मामले में चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और जिला अध्यक्ष को जिम्मेदारी दी गई है।
मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट के हाथीपांव क्षेत्र की लगभग 142 एकड़ भूमि को लेकर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। टिहरी गढ़वाल के धनोल्टी में करीब 247 एकड़ भूमि के मामले में विधायक विक्रम सिंह नेगी और विधायक लखपत बुटोला को जिम्मेदारी दी गई है।
हरिद्वार जिले में अलकनंदा होटल की संपत्ति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक ममता राकेश, अनुपमा रावत और रवि बहादुर को जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं, रानीपुर क्षेत्र के सलेमपुर मेहमूद की 21 एकड़ जमीन के मामले में विधायक फुरकान अहमद और वीरेंद्र जाति को अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हरक सिंह के पारिवारिक विवाद से कांग्रेस ने बनाई दूरी
एक तरफ कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमीनों के मुद्दे पर प्रदेशव्यापी अभियान की तैयारी कर रही है, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. हरक सिंह रावत से जुड़े पारिवारिक और संपत्ति विवाद ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
इस मामले में हरक सिंह रावत की पत्नी और पौड़ी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीप्ति रावत ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी बात रखी थी।
उन्होंने पारिवारिक घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए सवाल उठाए और मामले में अनर्गल दुष्प्रचार किए जाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी।
इस विवाद पर कांग्रेस प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हरक सिंह रावत का यह पूरी तरह निजी और पारिवारिक मामला है। इससे कांग्रेस पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि दीप्ति रावत ने वीडियो के माध्यम से जो सवाल उठाए हैं, उनकी पीड़ा स्वाभाविक है और उनके सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
राजेंद्र शाह ने कहा कि यदि लगाए गए आरोपों में सच्चाई है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। शासन, प्रशासन और मीडिया को भी इस मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित लोगों से सवाल करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों के अनर्गल बयानबाजी करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाना जरूरी है।
कांग्रेस महामंत्री ने दोहराया कि यह विवाद पार्टी से जुड़ा नहीं है और इससे संगठन को कोई नुकसान होने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने साफ कहा कि जो गलत है, वह गलत है और पूरे मामले की निष्पक्षता से पड़ताल होनी चाहिए।
राजनीतिक अभियान के बीच निजी विवाद बना चर्चा का विषय
कांग्रेस के लिए एक ओर धामी सरकार को सरकारी जमीनों के मुद्दे पर घेरने का बड़ा राजनीतिक अवसर है, तो दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता से जुड़ा पारिवारिक विवाद भी सुर्खियों में है।
खास बात यह है कि आईडीपीएल ऋषिकेश की 633 एकड़ भूमि को लेकर हरक सिंह रावत को स्वयं कांग्रेस ने अभियान की जिम्मेदारी सौंपी है।
ऐसे में पार्टी का उनके पारिवारिक विवाद से दूरी बनाना और साथ ही उन्हें राजनीतिक अभियान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना भी चर्चा का विषय बन गया है।



