राजनीति: कांग्रेस ने 2027 के लिए संगठन को दी धार, रामशरण नौटियाल की एंट्री से भाजपा को झटका

कांग्रेस ने 2027 के लिए संगठन को दी धार, रामशरण नौटियाल की एंट्री से भाजपा को झटका

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक समीकरण साधने की दिशा में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों को जिलों, महानगरों, विधानसभा क्षेत्रों और पार्टी के विभिन्न अनुषांगिक संगठनों, विभागों एवं प्रकोष्ठों की जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

वहीं, दूसरी ओर गायक जुबिन नौटियाल के पिता और भाजपा के पूर्व नेता रामशरण नौटियाल ने दिल्ली में कांग्रेस का दामन थाम लिया है। चुनाव से पहले संगठनात्मक सक्रियता और दूसरे दलों के नेताओं की एंट्री को कांग्रेस की चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष राजीव महर्षि के मुताबिक, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से प्रदेश संगठन ने पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

संगठनात्मक क्षमता, अनुभव और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग नेताओं को जिलों, महानगरों, विधानसभा क्षेत्रों और पार्टी के विभिन्न विभागों का प्रभार दिया गया है।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नवनियुक्त प्रभारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित प्रवास करने, स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने तथा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने की अपेक्षा की है।

इसके साथ ही जन आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक बैठकों को प्रभावी तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभारियों को स्थानीय संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं एवं सुझावों से प्रदेश नेतृत्व को अवगत कराने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

वहीं, अनुषांगिक संगठनों, विभागों और प्रकोष्ठों के प्रभारी समाज के विभिन्न वर्गों को कांग्रेस की विचारधारा और नीतियों से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जिन पदाधिकारियों को अभी जिम्मेदारी नहीं दी गई है, उन्हें आने वाले समय में कार्य आवंटित किया जाएगा।

जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी

कांग्रेस ने संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को जिला सह प्रभारी और विधानसभा क्षेत्र प्रभारी नियुक्त किया है।

प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप को पौड़ी गढ़वाल, दर्शन लाल को हरिद्वार ग्रामीण, संजय जैन को रुड़की ग्रामीण, संजय पालीवाल को पछवादून, सतीश नैनवाल को ऊधम सिंह नगर, मधु को रुद्रपुर सिटी, हेमंत को अल्मोड़ा और राजेंद्र पाल को चंपावत की जिम्मेदारी दी गई है।

इसी तरह प्रदेश महासचिव नीरज त्यागी को पुरोला, अभिषेक सिंह को उत्तरकाशी, वीरेंद्र पोखरियाल को टिहरी, राकेश राणा को देवप्रयाग, दीप शर्मा को रुद्रप्रयाग, नवीन जोशी को चमोली, राकेश लाल को कोटद्वार ग्रामीण, अनिल भास्कर को कोटद्वार शहर, नरेंद्र राणा को हरिद्वार सिटी और राव शेर मोहम्मद को रुड़की शहर का प्रभारी बनाया गया है।

इसके अलावा विजय गुनसोला को देहरादून सिटी, अरविंद प्रधान को परवादून, सुमित्तर भुल्लर को काशीपुर सिटी, शोभा बिष्ट को हल्द्वानी सिटी और गणेश उपाध्याय को नैनीताल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

महासचिव संदीप को रानीखेत, पुष्कर जैन को बागेश्वर, संजय को पिथौरागढ़ और राजेंद्र को डीडीहाट का प्रभारी बनाया गया है।

प्रदेश पदाधिकारियों को विभागों और प्रकोष्ठों का प्रभार

प्रदेश कांग्रेस ने विभिन्न विभागों और संगठनों की जिम्मेदारी भी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। विजय सारस्वत को मेनिफेस्टो, सूर्यकांत धस्माना को एनएसयूआई और युवा कांग्रेस, लालचंद शर्मा को सैनिक विभाग, मनोज रावत को एसआईआर कमेटी का चेयरमैन, सीपी सिंह को अनुसूचित जाति विभाग, अनुपम शर्मा को प्रोटोकॉल, सुजाता पॉल को रचनात्मक कांग्रेस, इंदु मान को किसान कांग्रेस और सुखविंदर कौर को राजीव गांधी पंचायत राज संगठन की जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अतिरिक्त हाजी सर्बरयार खान को अल्पसंख्यक विभाग, प्रेम को मेनिफेस्टो एवं चार्जशीट कमेटी, संतोष चौहान को महिला कांग्रेस, संजय सैनी को लीगल सेल, पूर्व विधायक हेमेश को महात्मा गांधी नरेगा सेल, पूर्व विधायक राजकुमार को नगर निकाय सेल और राजीव महर्षि को प्रचार एवं प्रकाशन का दायित्व सौंपा गया है। पार्टी की ओर से 18 अन्य महासचिवों को भी अलग-अलग पोर्टफोलियो और जिम्मेदारियां दी गई हैं।

कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव से पहले संगठन के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी जाएं, ताकि चुनावी अभियान शुरू होने से पहले पार्टी का नेटवर्क सक्रिय हो सके और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच बनाई जा सके।

भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए रामशरण नौटियाल

कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारियों के बीच रामशरण नौटियाल की पार्टी में वापसी ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। रामशरण नौटियाल ने 19 अक्टूबर को दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

इस दौरान उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मौजूद रहे।

रामशरण नौटियाल ने कुछ दिन पहले ही भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद से ही कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं।

अब उनकी कांग्रेस में वापसी को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा में उन्हें घुटन महसूस हो रही थी और वहां के माहौल एवं कामकाज से उनका मन खिन्न हो गया था। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उम्मीद जताई कि रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को मजबूती मिलेगी।

12 साल बाद कांग्रेस में वापसी, चकराता की राजनीति पर नजर

रामशरण नौटियाल उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं और जिला पंचायत की राजनीति से अपनी पहचान बनाने के बाद विधानसभा चुनाव में भी उतर चुके हैं।

अप्रैल 2014 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। इसके बाद भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें चकराता सीट से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह से हुआ था।

चुनाव में रामशरण नौटियाल को 27,417 वोट मिले, जबकि प्रीतम सिंह को 36,853 वोट हासिल हुए। इस तरह नौटियाल को 9,436 मतों से हार का सामना करना पड़ा था।

अब करीब 12 साल बाद कांग्रेस में उनकी वापसी से जौनसार-बावर और चकराता क्षेत्र की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

भाजपा छोड़ने से पहले रामशरण नौटियाल ने संगठन में उचित सम्मान नहीं मिलने और सार्वजनिक मंचों पर अपमानित किए जाने जैसी शिकायतें उठाई थीं।

उनकी नाराजगी को पार्टी में अपनी भूमिका और योगदान को लेकर असंतोष से जोड़कर देखा गया। हालांकि, उनके पार्टी छोड़ने के कारणों और भाजपा के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

जुबिन नौटियाल के पिता की अपनी राजनीतिक पहचान

रामशरण नौटियाल की पहचान लोकप्रिय गायक जुबिन नौटियाल के पिता के रूप में भी है, लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में उनकी अपनी अलग पहचान रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर विधानसभा चुनाव लड़ने तक का उनका सफर क्षेत्रीय राजनीति में उनके अनुभव को दर्शाता है।

कांग्रेस में उनकी वापसी के बाद पार्टी उनके पुराने राजनीतिक संपर्कों और संगठनात्मक अनुभव का किस तरह इस्तेमाल करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, फिलहाल उनके किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने या टिकट दिए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

2027 से पहले कांग्रेस की रणनीति कितनी होगी असरदार?

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने, स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और भाजपा के खिलाफ प्रभावी राजनीतिक विकल्प पेश करने की चुनौती है। प्रदेश पदाधिकारियों को जिलों और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी सौंपना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

वहीं, रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी पार्टी को चकराता और जौनसार-बावर क्षेत्र में राजनीतिक रूप से मदद पहुंचा सकती है।

हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी असर स्थानीय संगठन के साथ उनके तालमेल, पार्टी में मिलने वाली भूमिका और क्षेत्रीय मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा।

कुल मिलाकर, कांग्रेस ने एक ओर संगठनात्मक जिम्मेदारियों का बंटवारा कर चुनावी तैयारियों को गति देने की कोशिश की है, तो दूसरी ओर रामशरण नौटियाल की एंट्री से भाजपा के असंतुष्ट नेताओं को लेकर राजनीतिक बहस को नया आधार मिला है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कांग्रेस अपनी इन तैयारियों को जमीनी अभियान में कितनी प्रभावी तरीके से बदल पाती है और 2027 के चुनाव में इसका कितना लाभ मिलता है।