एम्स ऋषिकेश की CRE-3 भर्ती में कथित फर्जीवाड़ा, एक गिरफ्तार। दूसरे आरोपी की तलाश
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की CRE-3 भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। वायरमैन पद के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी की पहचान को लेकर संदेह हुआ।
जांच में परीक्षा देने वाले व्यक्ति और एम्स में नियुक्त होकर कार्यभार ग्रहण करने वाले व्यक्ति की पहचान में अंतर होने की आशंका सामने आई।
मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर नामजद आरोपी अशोक कुमार मीणा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे आरोपी विकास कुमार मीणा की तलाश की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को एम्स ऋषिकेश में CRE-3 भर्ती प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान वायरमैन पद के लिए उपस्थित अभ्यर्थी विकास कुमार मीणा की पहचान पर संदेह हुआ।
मूल अभिलेखों और पहचान पत्रों का मिलान करने पर दोनों दस्तावेजों में दर्ज विवरण समान मिले, लेकिन उन पर लगे फोटो अलग-अलग पाए गए।
इसके बाद एम्स प्रशासन ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
पूछताछ के बाद आरोपी गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देशन में पुलिस टीम गठित की गई। विवेचना के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर पुलिस ने अशोक कुमार मीणा (40 वर्ष), निवासी जयपुर, राजस्थान को 18 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार देहरादून भेज दिया गया।
दूसरे आरोपी की तलाश जारी
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि वायरमैन पद की भर्ती प्रक्रिया में कथित प्रतिरूपण किस तरह किया गया और पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ।
मामले में अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता और कथित फर्जीवाड़े से लाभ प्राप्त करने से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
कोतवाली ऋषिकेश के वरिष्ठ उपनिरीक्षक नवीन जोशी के अनुसार, बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान पहचान संबंधी गड़बड़ी का संदेह सामने आने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा चुका है, जबकि वांछित आरोपी विकास कुमार मीणा की तलाश जारी है।




