अपराधों की फेहरिस्त लंबी! रिश्वतखोरी में दो दरोगा घिरे, ठगी, मारपीट और संदिग्ध मौत के मामले कई मामले, पढ़ें….
देहरादून। उत्तराखंड में अपराध, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को एससी-एसटी एक्ट के मामले में अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिली है।
वहीं, रुड़की में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में दो तत्कालीन दरोगाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। ऊधमसिंह नगर में उत्तराखंड पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर ठगी करने वाला कथित फर्जी दरोगा गिरफ्तार हुआ है।
इसके अलावा देहरादून में मोबाइल चोरी कर बैंक खाते से 1.50 लाख रुपये निकालने, बुजुर्ग दंपती से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 50 लाख रुपये की साइबर ठगी और तीन महीने से लापता बीएससी छात्र का कंकाल मिलने के मामले भी चर्चा में हैं।
रेखा आर्य के पति को अदालत से राहत नहीं, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े उत्पीड़न और कथित जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के मामले में उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को अदालत से राहत नहीं मिली है।
देहरादून की पांचवीं अपर सत्र न्यायाधीश एवं एससी-एसटी एक्ट की विशेष न्यायाधीश अंजलि बेंजवाल की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में जान से मारने का आपराधिक षड्यंत्र रचने और एससी-एसटी एक्ट से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।
प्राथमिकी के अनुसार, कथित घटना वर्ष 2004 की है, जब शिकायतकर्ता के आवास पर मौजूद स्टाफ के सामने जातिसूचक और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
बचाव पक्ष ने घरेलू और आर्थिक विवाद, प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी तथा कथित घटना घर के भीतर होने का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत की मांग की।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि प्राथमिकी में स्टाफ की मौजूदगी में अपमानित करने का आरोप है और प्रथम दृष्टया एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध बनता है।
अदालत ने माना कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध की ओर संकेत करते हैं। ऐसे में अधिनियम की धारा 18 और 18ए के तहत अग्रिम जमानत पर लगी रोक लागू होती है।
इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई। हालांकि, अदालत के इस आदेश का अर्थ आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना नहीं है।
फाइनल रिपोर्ट के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप, दो तत्कालीन दरोगाओं पर मुकदमा
हरिद्वार जिले के रुड़की में गंगनहर कोतवाली क्षेत्र से जुड़े आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में दो तत्कालीन उपनिरीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले के अनुसार, पांच जुलाई 2023 को सुषमा सैनी ने निश्चय राणा और नितीश राणा निवासी ग्राम निरपुड़ा, जिला बागपत के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कराया था।
उस समय मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक मनदीप सिंह कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर 3.50 लाख रुपये लिए। इसके बाद छह 2024 को मामले में फाइनल रिपोर्ट भेज दी गई।
बाद में प्रकरण की दोबारा विवेचना शुरू हुई और इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन उपनिरीक्षक बलवंत पवार को सौंपी गई। आरोप है कि उन्होंने भी फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये मांगे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम देने से इनकार करने पर उसे गोली मारने, जेल भेजने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता ने उच्चाधिकारियों को ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई। इसके बाद एसपी देहात को मामले की जांच सौंपी गई। जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।
उत्तराखंड पुलिस में भर्ती का झांसा देकर ठगी, फर्जी दरोगा गिरफ्तार
ऊधमसिंह नगर जिले के पुलभट्टा थाना क्षेत्र में खुद को राजस्थान पुलिस का दरोगा बताकर उत्तराखंड पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देने वाले आरोपी मोहम्मद जाहिद को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर एक युवती से भर्ती कराने के नाम पर 40 हजार रुपये ठगने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर को आशा देवी निवासी किशनपुर, नानकमत्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी तुलसी राणा को पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर आरोपी ने रकम ली।
आरोपी ने कथित तौर पर युवती को उत्तराखंड पुलिस के नाम से फर्जी एडमिट कार्ड, जॉइनिंग लेटर, प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज और पुलिस की वर्दी भी दी थी।
शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। इसके बाद 18 अक्टूबर को आरोपी मोहम्मद जाहिद पुत्र मोहम्मद इस्माइल निवासी शरीफ नगर, थाना देवरनिया, जिला बरेली को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से राजस्थान पुलिस का फर्जी पहचान पत्र, उत्तराखंड पुलिस के नाम से तैयार किए गए भर्ती दस्तावेज और एक जोड़ी पुलिस वर्दी बरामद की है।
एसपी सिटी प्रमोद कुमार के अनुसार, आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि उसने अन्य लोगों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी की हो सकती है। संभावित पीड़ितों और आरोपी के नेटवर्क की जांच की जा रही है।।
देहरादून में मोबाइल चोरी कर खाते से उड़ाए 1.50 लाख रुपये, आरोपी गिरफ्तार
राजधानी देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में एक महिला का मोबाइल चोरी कर उसके बैंक खाते से रकम निकालने के मामले में पुलिस ने 22 वर्षीय आरोपी शाहरून को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी का मोबाइल, 40 हजार रुपये नकद, करीब 40 हजार रुपये की ज्वैलरी और वारदात के पैसों से खरीदी गई यामाहा आर15 मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस के अनुसार, शंकरपुर निवासी अनुराधा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका मोबाइल चोरी कर बैंक खाते से ऑनलाइन रकम निकाल ली गई। मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसने मोबाइल चोरी करने के बाद पासवर्ड तक पहुंच बनाकर उसमें मौजूद एप के जरिए 1.50 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर किए थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने इस रकम से मोटरसाइकिल और ज्वैलरी खरीदी थी।
आरोपी ने नशे की लत और महंगे शौक पूरे करने के लिए वारदात को अंजाम देने की बात कही है। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बुजुर्ग दंपती से 50 लाख की ठगी
देहरादून में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर हरिद्वार निवासी एक बुजुर्ग दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी दी। आरोपियों ने कथित तौर पर दंपती से करीब 50 लाख रुपये एक खाते में ट्रांसफर करा लिए।
पीड़िता की शिकायत पर देहरादून स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी में किन लोगों की भूमिका रही और रकम किन बैंक खातों में भेजी गई।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी में साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाते हैं।
तीन महीने से लापता बीएससी छात्र का किमाड़ी के जंगल में मिला कंकाल
देहरादून में करीब तीन महीने से लापता 22 वर्षीय बीएससी छात्र मोहम्मद शारिक का कंकाल किमाड़ी के जंगल में मिलने से सनसनी फैल गई है।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के शेरकोट का रहने वाला शारिक देहरादून की आजाद कॉलोनी में किराये पर रहता था और रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई कर रहा था।
जानकारी के अनुसार, शारिक 17 जुलाई 2026 की रात करीब 10 बजे स्कूटी लेकर अपने कमरे से निकला था। उसने आधे घंटे में वापस आने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद वह नहीं लौटा। अगले दिन उसके पिता मोहम्मद तारिक ने पटेल नगर कोतवाली में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
लंबे समय तक तलाश के बावजूद उसका पता नहीं चल सका। बाद में पुलिस ने अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। करीब 93 दिनों से लापता छात्र का कंकाल किमाड़ी से लगभग सात किलोमीटर अंदर जंगल में मिला। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान की।
परिजनों ने छात्र के साथ रहने वाले दो युवकों पर हत्या का शक जताते हुए मामले की गहन जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मौत की परिस्थितियों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
हरिद्वार में फेसबुक टिप्पणी पर विवाद, कांग्रेस नेता समेत कई लोगों पर मारपीट का मुकदमा
हरिद्वार के कनखल कोतवाली क्षेत्र में फेसबुक पर की गई टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि कांग्रेस नेता वरुण बालियान अपने समर्थकों के साथ आरके मिशन रोड स्थित एक हार्डवेयर की दुकान में पहुंचे और दुकानदार, उसकी पत्नी तथा बेटे के साथ पाइप और रॉड से मारपीट की।
पीड़ित कृष्ण नारायण सिंह के अनुसार, 18 अक्टूबर को दोपहर करीब 12 बजे वरुण बालियान, हिमांशु राजपूत, दिव्यांश अग्रवाल, विवेक भूषण, राहुल चौधरी और राहुल शर्मा समेत 20 से 25 लोग उनकी दुकान में घुस आए।
आरोप है कि हमलावरों ने उनके साथ मारपीट की। बीच-बचाव करने आई उनकी पत्नी गीता रानी और बेटे भानु प्रताप को भी पीटा गया। इस दौरान दुकान का सामान बिखर गया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।
बताया गया कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में शिक्षेत्तर कर्मचारियों के धरने को समर्थन देने पहुंचे वरुण बालियान को लेकर कृष्ण नारायण सिंह ने फेसबुक पर टिप्पणी की थी। इससे विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि धरने के दौरान माफी मांगने के बावजूद बाद में दुकानदार के साथ मारपीट की गई।
पीड़ित की शिकायत पर कनखल पुलिस ने कांग्रेस नेता समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। कोतवाली प्रभारी देवेंद्र सिंह रावत के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।
मोहब्बेवाला में लगातार हादसों से दहशत, लोग दैवीय प्रकोप से जोड़ रहे दुर्घटनाएं
देहरादून के मोहब्बेवाला-आशारोड़ी मार्ग पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेज रफ्तार ट्रकों, ओवरलोड वाहनों और ढलान वाले रास्ते पर नियंत्रण खोने की घटनाओं के कारण लोग दहशत में हैं।
कुछ स्थानीय निवासी इन दुर्घटनाओं को दैवीय प्रकोप और अदृश्य शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि अन्य लोग सड़क की बनावट और यातायात व्यवस्था को हादसों की वजह बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार दुर्घटनाओं के कारण सड़क किनारे स्थित मकानों में रहने वाले किरायेदार घर छोड़ रहे हैं।
नए किरायेदार भी मकान लेने से कतरा रहे हैं, जिससे मकान मालिकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। कुछ लोगों ने क्षेत्र में काल भैरव मंदिर स्थापित करने और पीपल का पेड़ लगाने की मांग की है।
स्थानीय निवासी नवनीत यादव के अनुसार, हादसों के कारण लोगों में डर बढ़ गया है और प्रशासनिक इंतजामों के बावजूद दुर्घटनाएं नहीं रुक रही हैं। दुकानदार रजनी ने भी चिंता जताई कि सड़क पर अनियंत्रित वाहन उनकी दुकान और आसपास के मकानों के लिए खतरा बने हुए हैं।
स्थानीय निवासी कुलदीप शर्मा और सुजीत कुमार ने पीपल का पेड़ काटे जाने तथा धार्मिक स्थल से जुड़ी गतिविधियों में बदलाव को हादसों से जोड़कर अपनी मान्यताएं रखीं।
वहीं, स्थानीय निवासी डॉ. संजीवनी ने ओवरलोड ट्रकों को दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बताते हुए कहा कि अब उन्हें स्कूटी चलाने में भी डर लगता है।
दूसरी ओर, परिवहन विभाग ने दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए वैज्ञानिक और सुरक्षात्मक उपायों पर काम करने की बात कही है। देहरादून की आरटीओ (प्रवर्तन) अनीता चमोला ने मोहब्बेवाला-आशारोड़ी मार्ग का निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों को तैनात कर वाहनों की जांच की जाएगी। साथ ही ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर भी नजर रखी जाएगी।
विभाग सड़क के बीच लगाए गए जिगजैग बैरिकेड्स के प्रभाव का भी आकलन कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जरूरत के मुताबिक सुरक्षा उपायों में बदलाव किया जाएगा।
उत्तराखंड में एक ओर भ्रष्टाचार, फर्जी भर्ती और साइबर ठगी के मामलों ने पुलिस की जांच व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी की है।
वहीं देहरादून में छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और मोहब्बेवाला में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इन सभी मामलों में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई अहम होगी।




