विशेष रिपोर्ट: रेखा आर्य के आरोप, साहू का पलटवार और 210 करोड़ का दावा! SIT जांच के घेरे में पूरा मामला

रेखा आर्य के आरोप, साहू का पलटवार और 210 करोड़ का दावा! SIT जांच के घेरे में पूरा मामला

देहरादून। उत्तराखंड की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच विवाद अब पुलिस जांच और राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है।

मंत्री ने पति पर शादी के समय पहली वैवाहिक स्थिति छिपाने, दूसरी महिलाओं से कथित संबंध रखने, मारपीट, मानसिक उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, दस्तावेजों में जालसाजी और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के कैंट थाने में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है।

दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने आरोपों को खारिज करते हुए कथित ऑडियो को एआई से तैयार बताया है और रेखा आर्य पर ही भ्रष्टाचार तथा करीब 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति को लेकर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब पूरे मामले में सबकी नजर पुलिस जांच और साक्ष्यों पर है।

2004 की शादी से शुरू हुआ विवाद

रेखा आर्य की शिकायत के मुताबिक, उनका विवाह 6 जुलाई 2004 को हिंदू रीति-रिवाज से गिरधारी लाल साहू के साथ हुआ था। मंत्री का आरोप है कि शादी के समय साहू ने खुद को अविवाहित बताया, जबकि बाद में उन्हें पता चला कि वह पहले से विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि पति के अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।

रेखा आर्य का दावा है कि शुरुआत में साहू ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मौखिक और लिखित रूप से माफी मांगी, लेकिन इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। मंत्री ने अपने और अपने नाबालिग बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।

मारपीट, जालसाजी और धमकी के आरोप

एफआईआर में रेखा आर्य ने आरोप लगाया है कि उनके पति ने सरकारी आवास पर स्टाफ की मौजूदगी में उनके लिए जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।

इसके अलावा, संबंधित कंपनियों के निदेशक पद से उन्हें हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

मंत्री का कहना है कि उन्होंने न तो संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और न ही निदेशक पद से हटने के लिए कोई त्यागपत्र दिया था। शिकायत में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, मारपीट, धमकी और वैवाहिक स्थिति छिपाने सहित विभिन्न धाराओं का उल्लेख है।

एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायत का हिस्सा हैं और उनकी पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

कथित ऑडियो ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर पहलू वह कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जिसे रेखा आर्य ने सार्वजनिक करते हुए दावा किया कि इसमें उन्हें नुकसान पहुंचाने या उनकी हत्या की साजिश से जुड़ी बातचीत है।

मंत्री ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद उन्हें अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपना पक्ष रखा और घरेलू उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं से आवाज उठाने की अपील की।

वीडियो सामने आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर आई और उन्हें देहरादून के कृष्णा मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया। सामने आई जानकारी के अनुसार, उन्हें छाती में दर्द और ब्लड प्रेशर बढ़ने की शिकायत हुई थी।

दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने कथित ऑडियो को एआई से तैयार बताया है। ऐसे में रिकॉर्डिंग की वास्तविकता, उसमें सुनाई देने वाली आवाज और बातचीत के संदर्भ की जांच अहम हो गई है। पुलिस ने ऑडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। जांच रिपोर्ट से ही इसकी प्रामाणिकता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

SIT के हवाले जांच, स्वास्थ्य सुधरने पर दर्ज होंगे बयान

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की है। टीम शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित ऑडियो, संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

एसआईटी प्रभारी के मुताबिक, रेखा आर्य के स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। पुलिस का उद्देश्य आरोपों से जुड़े तथ्यों को जुटाकर मामले के सभी पहलुओं की जांच करना है।

जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित जालसाजी से संबंधित दस्तावेज क्या हैं, ऑडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड हुआ और आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं।

210 करोड़ की संपत्ति का दावा, रेखा आर्य का पलटवार

रेखा आर्य की शिकायत के बाद गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि कथित ऑडियो एआई से तैयार किया गया है। साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

साथ ही उन्होंने दावा किया कि रेखा आर्य के पास करीब 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति है और महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े कामकाज, पोषण आहार तथा राशन वितरण में कथित भ्रष्टाचार की भी जांच होनी चाहिए। इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई निर्णायक प्रमाण सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।

रेखा आर्य ने इन आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपना काम ईमानदारी से किया है और आरोप जानबूझकर लगाए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि सबूत सामने आने पर वह अपनी शिकायत वापस लेने तक को तैयार हैं। इस तरह दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन दावों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।

अक्टूबर 2024 का पुराना प्रकरण फिर चर्चा में

मौजूदा विवाद के बीच अक्टूबर 2024 में बरेली में दर्ज एक पुराना मामला भी फिर चर्चा में है। उस समय रेखा आर्य ने बारादरी थाने में कल्पना मिश्रा/चतुर्वेदी नाम की महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

मंत्री का आरोप था कि महिला ने आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में गिरधारी लाल साहू को अपना पति बताया तथा बरेली स्थित उनके आवास का पता भी इस्तेमाल किया।

शिकायत में आवास से सात लाख रुपये और स्वर्ण जड़ित रुद्राक्ष की माला चोरी होने का आरोप भी लगाया गया था। सरकारी बोर्ड और हूटर लगी कार को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए थे।

यह पुराना प्रकरण उस समय भी चर्चा में रहा था, लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसी घटना के कारण पति-पत्नी के संबंधों में दरार आई।

पुराने मामले और वर्तमान एफआईआर के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। इसके लिए संबंधित मुकदमों के दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयानों की पड़ताल जरूरी होगी।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा, बीजेपी ने घरेलू विवाद बताया

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने रेखा आर्य के वीडियो और शिकायत का हवाला देते हुए महिला सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की मांग है कि कथित ऑडियो की निष्पक्ष जांच हो और आरोप सही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

दसौनी ने यह सवाल भी उठाया कि जब प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, तो आम महिलाओं की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने इस विवाद के संदर्भ में अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा भी उठाया।

बीजेपी की प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने पलटवार करते हुए कहा कि मामला घरेलू विवाद से जुड़ा है और रेखा आर्य ने शिकायत दर्ज कराकर अपने खिलाफ कथित उत्पीड़न पर कार्रवाई की पहल की है।

उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए देहरादून के एसएसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात कही।

वहीं, अभिनेता हेमंत पांडे ने सोशल मीडिया पर रेखा आर्य के समर्थन में संदेश देते हुए मामले में शीर्ष नेतृत्व से हस्तक्षेप की अपील की।

पुराने विवादों का भी हो रहा उल्लेख

गिरधारी लाल साहू का नाम पहले भी कुछ विवादों और कानूनी मामलों में सामने आने की खबरें रही हैं। इनमें बरेली का 1990 का जैन दंपती हत्याकांड, जमीन के लेन-देन से जुड़े विवाद, एक पूर्व कर्मचारी की ओर से 2017 में लगाए गए किडनी प्रत्यारोपण संबंधी आरोप और बिहार की लड़कियों को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी शामिल हैं।

जैन दंपती हत्याकांड के संबंध में साहू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और गैर-जमानती वारंट जारी होने की खबरें पहले सामने आई थीं। किडनी संबंधी आरोपों को साहू ने उस समय खारिज किया था, जबकि बिहार की लड़कियों पर टिप्पणी को लेकर विवाद के बाद उन्होंने माफी मांगी थी।

इन पुराने मामलों की वर्तमान स्थिति अलग-अलग हो सकती है और किसी आरोप या मुकदमे का उल्लेख अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है।

अब साक्ष्य तय करेंगे मामले की दिशा

रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू का विवाद अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पुलिस जांच, फॉरेंसिक परीक्षण और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

एक ओर मंत्री ने वैवाहिक धोखाधड़ी, उत्पीड़न, जालसाजी और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

वहीं दूसरी ओर साहू ने आरोपों को नकारते हुए ऑडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए और मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

फिलहाल एसआईटी की जांच, कथित ऑडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट, दस्तावेजों की पड़ताल और संबंधित पक्षों के बयान इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

अब सवाल केवल यह नहीं है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर क्या आरोप लगा रहे हैं, बल्कि यह है कि जांच में कौन-से तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं। निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि किन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण हैं और आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।