शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया पर सवाल, चार दिन बाद ही शिक्षिका का ट्रांसफर निरस्त
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में प्राथमिक शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) की ओर से 27 अगस्त 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश को महज चार दिन बाद ही निरस्त कर दिया गया।
विभाग की ओर से आदेश निरस्त करने के पीछे जिला स्तरीय स्थानांतरण समिति से हुई एक अहम तथ्यात्मक चूक को कारण बताया गया है।
31 अगस्त 2026 को जारी आदेश संख्या 249/2026-27 के अनुसार सहायक अध्यापिका श्रीमती ज्योत्सना गुणवंत का राजकीय प्राथमिक विद्यालय उधवा, भीमताल से राजकीय प्राथमिक विद्यालय इन्द्रानगर, हल्द्वानी किया गया स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
विभाग के मुताबिक जिला स्तरीय स्थानांतरण समिति द्वारा स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य संज्ञान में नहीं लिया गया कि संबंधित शिक्षिका और उनके पति एक ही विकासखंड में कार्यरत हैं। इसी तथ्य को ध्यान में न रखे जाने के कारण शिक्षिका को पूर्व में विद्यालय आवंटित कर दिया गया था।
बाद में विभाग के संज्ञान में मामला आने के बाद 27 अगस्त को जारी स्थानांतरण आदेश की समीक्षा की गई और चार दिन के भीतर ही उसे निरस्त करने का फैसला लिया गया।
चार दिन में बदला आदेश
स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद उसके जल्द निरस्त किए जाने से प्राथमिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
खासतौर पर तब, जब स्थानांतरण प्रक्रिया जिला स्तरीय समिति के स्तर पर पूरी की जाती है और संबंधित शिक्षकों के सेवा विवरण तथा अन्य निर्धारित मानकों की जांच के बाद विद्यालय आवंटित किए जाने की व्यवस्था होती है।
एक ही विकासखंड में पति-पत्नी के कार्यरत होने का तथ्य स्थानांतरण प्रक्रिया में पहले ही सामने आ जाना चाहिए था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर समिति की ओर से दस्तावेजों और पात्रता संबंधी तथ्यों की जांच किस स्तर पर की गई।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
नैनीताल जिले में स्थानांतरण आदेशों में लगातार हो रहे संशोधन और निरस्तीकरण से शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े आदेशों में यदि निर्धारित नियमों और पात्रता की जांच पहले ही कर ली जाए तो बाद में आदेशों को संशोधित या निरस्त करने की स्थिति से बचा जा सकता है।
फिलहाल विभाग ने संबंधित शिक्षिका का 27 अगस्त को जारी स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जिला स्तरीय स्थानांतरण समिति की ओर से निर्धारित मानकों की जांच में चूक कैसे हुई और ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए विभाग क्या कदम उठाएगा।


