बिग ब्रेकिंग: NEET प्रदर्शन पर दर्ज 116 FIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 4 राज्यों ने मांगी रद्द करने की मंजूरी

NEET प्रदर्शन पर दर्ज 116 FIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 4 राज्यों ने मांगी रद्द करने की मंजूरी

नई दिल्ली। NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जुलाई 2026 में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर दर्ज मामलों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम सरकारों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कुल 116 FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है।

सभी राज्यों ने केंद्र सरकार की ओर से 25 जुलाई को दिए गए उस आश्वासन का हवाला दिया है, जिसमें आंदोलन वापस लेने की स्थिति में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की बात कही गई थी।

चारों राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संबंधित FIR रद्द करने का अनुरोध किया है। राज्यों का कहना है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के बाद वे इन मामलों को आगे चलाने या उनकी जांच जारी रखने की इच्छुक नहीं हैं।

केंद्र ने भी दिल्ली की FIR रद्द करने की मांग की

राज्यों के आवेदन से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने भी दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था। हालांकि, केंद्र ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।

इन सभी आवेदनों की अहमियत इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि प्रदर्शनकारी संगठन ने 5 सितंबर को दिल्ली में दोबारा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कराने के दौरान प्रदर्शनकारियों से मामलों को वापस लेने का जो वादा किया था, उसे अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार सुबह भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से अनुरोध किया कि केंद्र और चारों राज्यों की ओर से दाखिल आवेदनों पर दोपहर 2 बजे एक साथ सुनवाई की जाए।

बिहार में सबसे ज्यादा 69 FIR

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 69 FIR रद्द करने की मांग की है। ये मामले राज्य के अलग-अलग जिलों और थानों में दर्ज किए गए हैं। इनमें 20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 के बीच दर्ज FIR शामिल हैं।

पटना के गांधी मैदान और कोतवाली थाने के अलावा गोपालगंज टाउन, सीवान टाउन, जहानाबाद, कटिहार टाउन, मुजफ्फरपुर टाउन और बिहार शरीफ समेत कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।

महाराष्ट्र की 34 FIR भी सूची में

महाराष्ट्र सरकार ने 34 FIR रद्द करने का अनुरोध किया है। इनमें नागपुर, मुंबई, पुणे, जलगांव, बुलढाणा और अमरावती सहित कई स्थानों पर दर्ज मामले शामिल हैं।

शिवाजी पार्क और सीताबुलडी थानों के मामलों के अलावा गणेश पेठ, सादर, आजाद मैदान, चेंबूर, वाडी, बुलढाणा, डेक्कन, अंबी और रामटेक थानों में दर्ज FIR भी सूची में शामिल हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने अपने आवेदन में कहा है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के बाद वह सूचीबद्ध FIR को आगे चलाने या उनकी जांच जारी रखने की इच्छुक नहीं है।

पश्चिम बंगाल की 8 और असम की 5 FIR

पश्चिम बंगाल सरकार ने 8 FIR रद्द करने की मांग की है। इनमें एक मामला एंटाली थाने और सात मामले हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि यदि बाद में इन्हीं घटनाओं से जुड़ी कोई अन्य FIR उसके संज्ञान में आती है तो वह संबंधित व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से इसी तरह की राहत दिए जाने का विरोध नहीं करेगी।

पश्चिम बंगाल ने यह आश्वासन भी दिया है कि आवेदन में शामिल घटनाओं को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

वहीं, असम सरकार ने 5 FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। असम ने भी अन्य राज्यों की तरह कहा है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के बाद वह इन मामलों को आगे चलाने या उनकी जांच जारी रखने की इच्छुक नहीं है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

चारों राज्यों के आवेदनों में केंद्र सरकार के 25 जुलाई के आश्वासन को मुख्य आधार बनाया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने यह सवाल है कि क्या वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज इन FIR को रद्द करने का आदेश देता है।

इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक ओर सरकारें आंदोलन से जुड़े मामलों को समाप्त करने की मांग कर रही हैं।

वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी संगठन 5 सितंबर को दिल्ली में फिर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो सकता है कि जुलाई के आंदोलन से जुड़े मामलों पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी।