बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड भाजपा का बड़ा संगठन विस्तार, 178 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति में मिली जगह

उत्तराखंड भाजपा का बड़ा संगठन विस्तार, 178 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति में मिली जगह

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। पार्टी ने प्रदेश कार्यसमिति में कुल 178 नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनमें विशेष आमंत्रित सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और स्थाई आमंत्रित सदस्य शामिल हैं।

भाजपा की ओर से जारी सूची के मुताबिक 32 नेताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य, 121 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और 25 नेताओं को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। चुनाव से पहले संगठन में इतने बड़े स्तर पर नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने को भाजपा की चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

32 विशेष आमंत्रित सदस्य, पौड़ी और चंपावत को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

प्रदेश कार्यसमिति की पहली सूची में 32 नेताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। हालांकि, इस सूची में उत्तराखंड के दो जिलों पौड़ी और चंपावत को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राज्य के बाकी 10 जिलों से जुड़े नेताओं को इस श्रेणी में जगह दी गई है।

121 प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों में सभी जिलों को प्रतिनिधित्व

प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों की सूची सबसे बड़ी है। इसमें 121 नेताओं को शामिल किया गया है। इस सूची की खास बात यह है कि उत्तराखंड के सभी जिलों से जुड़े नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके जरिए भाजपा ने संगठन के अलग-अलग हिस्सों और क्षेत्रों को प्रदेश स्तर पर जोड़ने की कोशिश की है।

25 स्थाई आमंत्रित सदस्यों में सरकार और शीर्ष नेतृत्व
वहीं 25 नेताओं को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इस सूची में भाजपा के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ ही भाजपा के सांसदों और विधायकों को भी प्रदेश कार्यसमिति के ढांचे में स्थान दिया गया है।

2027 चुनाव से पहले संगठन को धार देने की कवायद
प्रदेश कार्यसमिति की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। भाजपा संगठन को मजबूत करने के साथ ही पार्टी के अलग-अलग नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंप रही है।

178 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति में शामिल करने के फैसले को संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

विशेष आमंत्रित सदस्यों से लेकर प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों और स्थाई आमंत्रित सदस्यों तक अलग-अलग स्तर पर नेताओं को जिम्मेदारी देकर भाजपा ने चुनाव से पहले अपने संगठनात्मक ढांचे को व्यापक बनाने का प्रयास किया है।

खास बात: प्रदेश कार्यसमिति में सभी जिलों को प्रतिनिधित्व देने से भाजपा ने क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची में पौड़ी और चंपावत का शामिल न होना चर्चा का विषय बन गया है।