हाईकोर्ट के बड़े फैसलें। UPCL अभियंताओं की पदोन्नति पर रोक, मसूरी पालिका कर्मियों की वेतन कटौती थमी
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यूपीसीएल में सहायक अभियंताओं की अधिशासी अभियंता पद पर प्रस्तावित पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।
वहीं, मसूरी नगर पालिका परिषद में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन में कटौती पर भी कोर्ट ने रोक लगाते हुए उन्हें पूर्ववत वेतन देने के निर्देश दिए हैं।
यूपीसीएल में पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक
नैनीताल हाईकोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने यूपीसीएल में कार्यरत पांच सहायक अभियंताओं (ई एंड एम) मनोज कुमार, वेद प्रकाश, सौरभ चमोली, नरेंद्र सिंह नेगी और गुरदीप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए आगामी पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार वे वर्ष 2002 से कनिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत थे, लेकिन प्रशासनिक चूक और एसीआर उपलब्ध नहीं होने के कारण उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों को पहले पदोन्नति दे दी गई।
बाद में वर्ष 2012 की संशोधित वरिष्ठता सूची में उनकी वरिष्ठता दुरुस्त की गई, जिसके आधार पर उनका दावा था कि वे वर्ष 2008-09 से पदोन्नति के हकदार हैं।
विवाद उस समय बढ़ा जब यूपीसीएल प्रबंधन ने 21 जून 2023 और 4 जून 2025 को नई वरिष्ठता सूचियां जारी कीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के उनके नाम वर्ष 2008-09 की सूची से हटा दिए गए।
याचिकाकर्ताओं ने नियमावली और पूर्व न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उच्च पद पर पदोन्नति के बाद भी कर्मचारी अपनी मूल वरिष्ठता का हकदार रहता है। उन्होंने 4 जून 2025 की अंतिम वरिष्ठता सूची को निरस्त कर वर्ष 2008-09 की सूची में अपना नाम पुनः शामिल करने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगामी पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
मसूरी पालिका कर्मियों के वेतन में कटौती पर रोक
दूसरे मामले में हाईकोर्ट ने मसूरी नगर पालिका परिषद में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राहत दी है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कर्मचारियों के वेतन में कटौती पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि अंतिम निर्णय तक उन्हें वही वेतन दिया जाए, जो 8 जून 2026 के आदेश से पहले मिल रहा था।
देवेंद्र प्रसाद एवं अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि कर्मचारी पिछले दस वर्षों से अधिक समय से न्यूनतम वेतन प्राप्त कर रहे हैं और नियमित कर्मचारियों के समान कार्य एवं जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता शुभांग डोभाल ने कोर्ट को बताया कि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने 8 जून 2026 के आदेश के जरिए न्यूनतम वेतन की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति नियमित चयन प्रक्रिया के तहत नहीं हुई है।
याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के स्टेट ऑफ पंजाब बनाम जगजीत सिंह (2017) और जग्गो बनाम भारत संघ (2024) के फैसलों का भी हवाला दिया।
मामले को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक मसूरी नगर पालिका परिषद 8 जून 2026 के आदेश के आधार पर कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती नहीं करेगी और पूर्ववत वेतन का भुगतान जारी रखेगी।


